कोलंबिया : टिकटॉक के ज़रिए बच्चों को अपने गिरोह में कैसे शामिल कर रहे हैं गुरिल्ला लड़ाके

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    • Author, रेचल क्रिगेर और लॉरा गार्सिया
    • पदनाम, बीबीसी मॉनटरिंग और बीबीसी मुंडो

कोलंबिया के दक्षिण में काउका के ग्रामीण इलाके की एक महिला टीचर लोरेना (बदला हुआ नाम) कहती हैं, ''एक-दो लोगों ने ये ट्रेंड शुरू किया और अब ये क्लासरूम में फैशन बन गया है.''

वो कहती हैं कि क्लासरूम में घुसते ही बच्चे स्मार्टफोन पर अपना वीडियो बनाते दिखते हैं.

अब वो भंग कर दिए गए संगठन फार्क के प्रतीकों से प्रेरणा लेकर फिल्म बनाते हैं. वो क्रांतिकारी धुनोंं पर नाचते हुए टिकटॉक वीडियो बनाते हैं.

नाम ना छापने की शर्ते पर लोरेना कहती हैं कि इस तरह का गुरिल्ला समर्थक व्यवहार अब तेजी से आम होता जा रहा है.

बीबीसी के साथ ज़ूम पर एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा, ''पहले ये गुप्त रूप से होता था लेकिन अब सामान्य होता जा रहा है. दुर्भाग्य से पहले एक या दो बच्चों ने क्लास-रूम में टिकटॉक पर ये क्लिप देखने शुरू किए थे लेकिन अब तो खूब देखे जा रहे हैं.''

उन्होंने कहा कि ये बच्चे पहले अक्सर गायब हो जाया करते थे. लेकिन अगली बार वो टिकटॉक वीडियो में दिखते थे, गुरिल्ला यूनिफॉर्म में हथियार लिए हुए.

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बच्चों को गुरिल्ला संगठनों में भर्ती करने का तरीका

कउका में बच्चे और बड़े फार्क के साथ आगे बढ़े हैं. 1964 में इस वामपंथी संगठन की स्थापना हुई थी. यहां लंबे समय तक इनकी मजबूत मौजूदगी रही है.

लेकिन कभी 20 हजार सदस्यों वाले इस संगठन को 2016 में सरकार के साथ एक शांति समझौते के बाद आधिकारिक तौर पर भंग कर दिया गया.

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हालांकि इस संगठन के कई असंतुष्ट गुटों ने अपने हथियार नहीं डाले हैं. इनमें से मजबूत कई संगठन अभी भी कउका में सक्रिय हैं.

फार्क के इन गुटों ने इसके एक संगठन से हाथ मिला लिया है. इसे एस्टेडो मेयर सेंट्रल (ईएमसी) कहा जाता है.

अधिकारियों का अनुमान है कि ईएमसी के तीन हजार से ज्यादा सदस्य हो सकते हैं.

कोलंबिया में राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो की वामपंथी सरकार इनमें से कुछ गुटों से समझौते की कोशिश कर रही है. लेकिन इसमें अभी सफलता नहीं मिली है.

ये संगठन सक्रिय हैं. कहा जा रहा है कि ड्रग्स की तस्करी से उनके पास पैसा आता है. कई ग्रामीण इलाकों पर उनका दबदबा है. इस तरह वो अपना कद बढ़ाते जा रहे हैं.

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने बताया कि कोलंबिया में दशकों से गुरिल्ला संगठनों में बच्चों की भर्ती का मामला एक पेचीदा मसला रहा है.

लेकिन इसमें अब सोशल मीडिया का पहलू आ गया है. अब इससे जूझना मुश्किल हो रहा है.

कोलंबियाई ओम्बुड्समैन दफ़्तर के अर्ली अलर्ट सिस्टम के प्रतिनिधि रिकार्डो एरिया मकियेस ने बीबीसी से कहा कि गुरिल्ला संगठनों ने 2023 में कम से कम 184 युवा लोगों को भर्ती किया था.

इस साल जून तक 159 युवा भर्ती हुए हैं. इनमें से सभी 18 साल से कम उम्र के हैं. 124 बच्चे कउका के हैं.

ये मामले ऐसे हैं जिनके बारे में हमें पता है. इनमें से ज्यादातर के बारे में तो रिपोर्ट ही नहीं हुई है.

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'ये सब देख कर निराशा और दर्द महसूस होता है'

लोरेना गरीब और सुदूर इलाकों में रहने वाले समुदायों के बीच नौ साल तक टीचर रहीं. वो बताती हैं कि उनके स्कूल के कम से कम 15 बच्चे गुरिल्ला संगठन में शामिल होने के लिए पढ़ाई छोड़ कर जा चुके हैं.

वो ज़मीन की ओर देखते हुए कहती हैं, ''ये सब देख कर आपको इतना ज्यादा दर्द और निराशा होती है. अब खुद को असहाय महसूस करते हैं.''

लोरेना के मुताबिक़- कोविड महामारी के बाद गुरिल्ला ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल काफी बढ़ा दिया. खास कर टिकटॉक पर उनकी सक्रियता बहुत ज्यादा बढ़ गई है.

वो कहती हैं कि ज्यादातर छात्र-छात्राओं के पास अब मोबाइल फोन और इंटरनेट है. वो हर समय सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं. इस पर नियंत्रण मुश्किल है.

चार सप्ताह के दौरान बीबीसी ने टिकटॉक पर ऐसे 50 से ज्यादा अकाउंट की पहचान की है, जिनमें कोलंबिया के गुरिल्ला अपनी आलीशान जीवन शैली दिखा रहे थे और दूसरों से इसमें शामिल होने के लिए अपील कर रहे हैं.

हालांकि कुछ लोग इसमें ये कह कर शामिल नहीं होते और इसके लिए हथियारबंद समूहों के खतरों को गिनाते हैं.

ईएमसी के गुटों की ओर से पोस्ट किए गए कई वीडियो में सीधी भाषा में किसी गुट में शामिल होने की अपील की गई है.

इनमें मारे गए लड़ाकों की याद में गाने हैं. वीडियो में युवा लड़के और लड़कियां हथियार लेकर चलते दिख रहे हैं.

कुछ अकाउंट्स में साफ तौर पर गुटों का नाम लिया जा रहा है. कुछ में फार्क को सीधे श्रेय दिया जा रहा है. इनमें समुराई के इमोजी और कोलंबिया के झंडे लगे हैं.

लुभावने वादे

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इमेज कैप्शन, टिकटॉक पर इस तरह के मैसेज दिखते हैं- आइए, हमारे साथ शामिल होइए, भविष्य अच्छा रहेगा.

अप्रैल में कोलंबिया के रक्षा मंत्री इवान वेलासक्वेज ने इस तरह के ईएमसी टिकटॉक के वीडियो के ख़तरों से आगाह किया है.

उन्होंने कहा, ''ऐसे वीडियो से बच्चों को खासकर नाबालिगों को हथियारबंद समूहों में शामिल होने के लिए उकसाया जा रहा है.''

कोलंबिया के खोजी न्यूज़ के ला सिला वेसिया के लिए काम करने वाले पत्रकार सेंटियोगो रोड्रिग्ज का कहना है कि ईएमसी के अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनल हैं.

इस पर ये लंबे समय से अपने बयान जारी करता रहता है. पत्रकारों के साथ भी उसका वॉट्स ऐप ग्रुप है. उसका फेसबुक अकाउंट भी है.

लेकिन ज्यादातर कंटेंट अब टिकटॉक पर डाला जा रहा है और इसके जरिए युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश हो रही है.

इनवेस्टिगेटिव मीडिया संगठन इनसाइट क्राइम में कोलंबिया के विशेषज्ञ सर्गियो सेफॉन कहते हैं कि गरीब इलाकों के बच्चों में इस तरह के वीडियो की काफी अपील है.

इन्हें उनके बीच ये दिखा कर प्रचारित किया जाता है कि ऐसे फाइटर बन कर आप सबकुछ हासिल कर सकते हैं- पैसा, औरत, मोटरसाइकिल सबकुछ.

बीबीसी ने जिन टिकटॉक अकाउंट्सकी पहचान की है उन्हें बाद में प्रतिबंधित कर दिया था. इसके बाद भी नए कंटेंट आते रहते हैं. टिकटॉक ने बीबीसी के इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि ऐसा क्यों हो रहा है.

कोलंबिया के अधिकारियों के लिए गुरिल्लाओं की ओर से सोशल मीडिया के इस्तेमाल को रोकना आसान काम नहीं है.

कोलंबिया के अधिकारियों के लिए गुरिल्लाओं की ओर से सोशल मीडिया के इस्तेमाल को रोकना आसान काम नहीं है.

ओम्बुड्समैन के दफ्तर ने इसके लिए नया तरीका अपनाया है ताकि इस मुद्दे को सुलझाया जा सका. एरियस ने बताया कि हालांकि अभी ये शुरू ही हुआ है.

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सरकार की कोशिश और ताजा हालात

ईएमसी के एक गुट के एक सदस्य का कहना है ईएमसी भी ये कोशिश कर रहा है कि इसके सदस्य खुद को टिकटॉक पर न दिखाएं .

ये सदस्य हाल में सरकार और गुरिल्लाओं के बीच बातचीत में शामिल थे. हालांकि बातचीत रुक गई है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि फार्क सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भर्ती करने का कोई अभियान नहीं चला रहा है.

उन्होंने ज़ूम पर बीबीसी से बताया कि कभी-कभी कुछ मामले संगठन के नियंत्रण में नहीं होते. ये उनकी सुरक्षा के लिए जोखिम है. वो लोग इसे नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं.

मार्टिनेज़ ने भी माना कि ईएमसी के पास पैसा गैर-कानूनी गतिविधियों से इकट्ठा होता है. जैसे कोकोआ, अफीम और गांजे की खेती करने वालों पर टैक्स लगा कर. अब वो कानूनी तौर पर खेती के धंधे में भी उतर रहे हैं.

उन्होंने ये भी माना कि संगठनों में 15 साल के बच्चों को भी शामिल किया जा रहा है. कोलंबियाई अधिकारी कहते हैं कि इन्हें जबरदस्ती भर्ती किया जा रहा है.

इस बीच, लोरेना बच्चों को गुरिल्लाओं की जिंदगी के ख़तरों से बचाने की कोशिश में लगी हैं.

वो और दूसरे टीचर्स के एक ग्रुप ने स्कूल का अपना नेटवर्क तैयार किया जो सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर रखता है. इसके साथ ही ये ग्रुप इन बच्चों के साथ इमरजेंसी चैट भी करता है.

वो कहती हैं, ''हम उन्हें सबकुछ नहीं दे सकते है. हम अपने डर को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जब हमारे पास बच्चे आते हैं और कहते हैं कि उन्होंने ग्रेजुएशन कर ली और अपना कारोबार कर रहे हैं. इससे आपको हिम्मत मिलती है और आप लड़ते रहते हैं.''

(बीबीसी ट्रेंडिंग के संवाददाता जोनाथन ग्रिफिन की अतिरिक्त रिपोर्टिंग)

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