पर्यटकों का स्वर्ग कहा जाने वाला देश कैसे बना माफ़िया का गढ़

- Author, अना मारिया रौरा, डेनियल विटनवर्ग, ब्लांका मॉनकाडा
- पदनाम, बीबीसी मुंडो और वर्ल्ड सर्विस
तीस साल के पॉल काफ़ी कमज़ोर दिखते हैं. वे कहते हैं, "फ़िलहाल हालात काफ़ी ख़तरनाक हैं. मौत कहीं से भी आ सकती है. पॉल को लगता है कि वो दूसरी गैंग की हिटलिस्ट में हैं और वो अब तक ज़िंदा सिर्फ़ अपनी माँ की दुआओं की वजह से हैं.
वे कहते हैं, "ऐसा लगता है कि ईश्वर मुझे नहीं बुलाना चाहता और शैतान मुझे छूना नहीं चाहता."
पॉल इस शख़्स का असली नाम नहीं है. उनकी पहचान गुप्त रखने के लिए हमने उन्हें ये नाम दिया है. पॉल 15 साल के थे जब उन्होंने गैंग जॉइन की थी. अब वो 30 के हैं. उन्हें लगता था कि गैंग में शामिल होने के बाद ज़िंदगी में बस मौज मस्ती होगी.
पॉल से हम ये बातचीत इक्वाडोर के सबसे बड़े शहर गुआक़िल में कर रहे हैं. इस शहर में 20 गैंग सक्रिय हैं और अपनी धाक जमाने के लिए आए दिन गोलीबारी होती रहती है.
पॉल को लगता है कि अगर हम एक स्थान पर रुककर बात करते हैं तो उनके दुश्मन उन्हें निशाना बना सकते हैं. इसलिए उन्हीं की सलाह पर हम शहर में घूमते हुए पॉल का इंटरव्यू कर रहे थे. वे कहते हैं, "मुझे सम्मान चाहिए था."

लेकिन पॉल और उनकी गैंग ने इक्वाडोर में फैली हिंसा में अहम भूमिका निभाई है.
ये लातिनी अमेरिकी का सबसे सुरक्षित देश हुआ करता था. इस देश में घने जंगल हैं और गालापागोस जैसे दिलकश द्वीप भी हैं. लेकिन बीते पाँच वर्षों में देश के हालात बद से बदतर होते गए हैं.
साल 2023 में इक्वाडोर में 8 हज़ार मर्डर हुए हैं. ये आंकड़ा 2018 के मुक़ाबले आठ गुना अधिक है. ये संख्या मेक्सिको और कोलंबिया जैसे देशों से भी अधिक है.
इसी साल जनवरी में इक्वाडोर सारी दुनिया में छा गया था. कुछ बंदूकधारी एक लाइव शो के दौरान एक टीवी स्टेशन में घुस गए थे.
ठीक उसी समय देश के कई हिस्सों से धमाकों और जेलों में दंगों की ख़बरें आनी शुरू हो गई थीं. साथ ही कई लोगों को किडनैप करने की भी ख़बरें आ रही थीं.

सिर्फ़ दो महीने पहले राष्ट्रपति बने नोबोआ ने इसके बाद देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी. उनके निशाने पर ड्रग्स की स्मगलिंग करने वाले अपराधी थे.
आपातकाल की घोषणा करते हुए नोबोओ ने कहा था, "ये नार्को-टेररिस्ट हमें डराना चाहते हैं और उन्हें लगता है कि हम डरकर उनकी माँगें मान लेंगे."
तब से इक्वाडोर में 16 हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.
आठ अप्रैल को आपातकाल ख़त्म हो गया है. लेकिन राष्ट्रपति ने कहा है कि देश की सुरक्षा के मद्देनज़र सेना को कई विशेष अधिकार दिए गए हैं.
राष्ट्रपति नोबोआ अपराधियों के लिए सख़्त सज़ाओं वाले कानून बनाना चाहते हैं. साथ ही वो हथियार रखने के कानूनों में भी बदलाव करना चाहते हैं.
ये सब प्रस्ताव 21 अप्रैल को होने वाले जनमत संग्रह का हिस्सा हैं.
सड़क पर आने का ख़ौफ़

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गैंगवार ने लोगों की आम ज़िंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया है. लोग घरों से बाहर निकलने से डरते हैं. किडनैपिंग और फ़िरौती आम बात है.
हमने ऐसे कई लोगों से बात की जिन्होंने साफ़ कहा कि वे अब बाहर जाने से डरते हैं, विशेषकर रात के वक्त. सरकार ने क्विटो और गुआक़िल समेत कई शहरों में रात का कर्फ़्यू लगा रखा है.
देश की राजधानी क्विटो में गेबिरियाला अल्मेडा नाम की एक डॉक्टर ने हमें बताया, "मैं हर रोज़ ऐसे मरीज़ों से मिल रही हूं जो भारी मानसिक दबाव में हैं."
अल्मेडा ऐसी जगह रहती हैं जहां एक बड़ा गेट लगा हुआ है ताकि कोई कॉलोनी में प्रवेश न कर सके. उन्होंने अपने क्लिनिक का रूटीन भी बदला है और वे रात को बाहर जाने से बचती हैं.
जब वो घर से बाहर जाती हैं तो तब तक सड़क पर नहीं जातीं जब तक टैक्सी वाला आ न जाए. और टैक्सी में बैठने के बाद वे तुरंत अपने परिजनों के साथ लोकेशन शेयर करती हैं.
इक्वाडोर: ड्रग्स के धंधे का केंद्र

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अल्मेडा कहती हैं, "हाल ही में यहां एक अपहरण हुआ था. यहां पास ही. जब में छोटी थी तो सोचती थी कि कोलंबिया में इतनी हिंसा क्यों होती है. कभी नहीं सोचा था कि हमारे देश का हाल एक दिन ऐसा भी होगा. अब तो बसों में आपका बटुआ चुराया जा सकता है. लेकिन मुझे मौत का डर नहीं है. हां, हम एक भयानक दुस्वपन के दौर में जी रहे हैं."
एक बच्चे की मां अल्मेडा स्पेन में बसने के बारे गंभीरता से विचार कर रही हैं. वो कहती हैं, "मैं अपने बेटे को ऐसी जगह ले जाना चाहती हूँ जहाँ हिंसा और अपहरण के डर के बिना बेख़ौफ़ घूम सके."
जैसा कि इक्वाडोर के राष्ट्रपति का आकलन है, समस्या की जड़ में ड्रग्स का धंधा है.
पॉल की कहानी से भी यही बात समझ आती है. पॉल ने बताया कि जब उन्होंने गैंग जॉइन की थी तो वे अपने इलाक़े में गांजा और कोकेन बेचते थे.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, तब से लेकर अब तक दुनिया भर में कोकेन का उत्पादन और खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी है. साल 2020 और 2021 के बीच में ही कोकेन का उत्पादन तीन गुना बढ़ गया है.

मेक्सिको, कोलंबिया और अल्बानिया के गैंग अब ड्रग्स के धंधे के लिए नई जगहों की तलाश में हैं.
इक्वाडोर इन लोगों के लिए एक माकूल जगह साबित हुई है क्योंकि इसकी सरहदें दुनिया के दो सबसे बड़े कोकेन उत्पादक देशों से मिलती हैं. ये दो देश हैं - कोलंबिया और पेरू.
इसका नतीजा ये हुआ कि इक्वाडोर एक ऐसे ग्लोबल डिस्ट्रिब्यूशन हब के रूप में बदल चुका है जहां ड्रग्स स्टोर किए जाते हैं और जिसका इस्तेमाल ट्रांज़िट प्वॉयंट के रूप में होता है जहां से उन्हें शिपिंग कंटेनरों के ज़रिए दूसरे देशों में उनके अंतिम ठिकानों पर भेजा जाता है. गैंग्स इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं.
पॉल ने हमें बताया कि वो पहले ड्रग्स की छोटी मात्रा से अपना धंधा चलाते थे लेकिन बाद में उन्होंने किलो की मात्रा में कोकेन की तस्करी शुरू कर दी थी.
उन्होंने बताया कि नई भूमिका में वो दूसरे प्रोडक्ट्स के साथ अवैध ड्रग्स को छिपाकर कंटेनरों में रखवाते थे.

इक्वाडोर से होने वाले निर्यात की तीन चौथाई से भी अधिक चीज़ें गुआक़िल बंदरगाह से ही रवाना होती हैं. प्रशांत महासागर के तट पर बने इस बंदरगाह से केले और झींगे का मुख्य रूप से निर्यात होता है.
लेकिन इक्वाडोर के कोस्ट गार्ड ने हमारे सामने तस्वीर का दूसरा पहलू रखा. वो कहते हैं कि इक्वाडोर से होने वाली ड्रग्स तस्करी का 90 फ़ीसदी इसी बंदरगाह के इन्हीं कंटेनरों से निकाला जाता है.
इक्वाडोर में जब से आंतरिक सशस्त्र संघर्ष की घोषणा हुई है, कोस्ट गार्ड ने अपनी गश्त बढ़ा दी है.
कोस्ट गार्ड की टीम जब बंदरगाह के आस-पास के इलाकों में गश्त कर रही थी तो हम उनकी टीम में शामिल हो गए.
उनके एक कमांडर ने हमें बताया, "अतीत में हम आम अपराधियों से निपटते थे. लेकिन अब हमारा वास्ता जिन लोगों से पड़ता है, उनमें से किसी के पास भी भारी-भरकम हथियार हो सकते हैं."

गैंग्स से ख़तरे की आशंका के मद्देनज़र वे नहीं चाहते थे कि उनका नाम ज़ाहिर किया जाए. उन्होंने अपना चेहरा छुपाने के लिए काले रंग का मास्क पहना हुआ था.
उनकी हथियारबंद टीम दिन में चार बार गश्त करती है. वे स्पीड बोटों में सवार अपराधियों की तलाश करते हैं, ऐसे अपराधियों की तलाश जो बड़े जहाजों पर रखे कंटेनरों में ड्रग्स छुपाने की कोशिश कर रहे हों.
लेकिन भ्रष्टाचार की समस्या ने उनके काम को मुश्किल बना दिया है.
पॉल बताते हैं कि बंदरगाह पर तैनात किसी व्यक्ति को अगर सही क़ीमत दी जाए तो वो सिक्योरिटी कैमरों का रुख मोड़ देता है कि ताकि उनकी नज़र में अवैध गतिविधियों को अंज़ाम देता कोई अपराधी न आ जाए.
कोस्ट गार्ड के वो कमांडर बताते हैं, "सिस्टम में बहुत से लोग करप्ट हैं. कभी-कभी मैं पोर्ट के भीतर सिक्योरिटी चेक प्वॉयंट्स पर ये कह सकता हूं कि कंटेनर के साथ छेड़खानी की गई है लेकिन सच तो ये है कि उनमें से ज़्यादातर के साथ पहले ही छेड़खानी हो गई होती है."
'हर कोई अपना इलाका चाहता है...'

पॉल के लिए अधिक तस्करी का मतलब 'ज़्यादा पैसा, बेहतर हथियार' है. साल 2020 के बाद इक्वाडोर पुलिस द्वारा ज़ब्त किए गए हथियार 58 फ़ीसदी तक बढ़ गए हैं.
पुलिस का कहना है कि वो इसे यूं देखते हैं कि ज़ब्ती बढ़ने का मतलब देश में हथियारों का सर्कुलेशन बढ़ना है. सड़कों पर आपराधिक गिरोहों के बीच तनाव बढ़ने के साथ-साथ जेल की चहारदीवारी के भीतर भी हिंसक झड़पें जानलेवा होने की हद तक बढ़ी हैं.
पॉल बताते हैं, "हर कोई अपना इलाका चाहता है. अपराधियों को ड्रग्स बेचने के लिए इलाका चाहिए, स्मगलिंग के लिए इलाका चाहिए और यहां तक कि अवैध वसूली और अपहरण के लिए भी इलाका चाहिए."
हमने पॉल से ये पूछा कि वो गैंग क्यों नहीं छोड़ देते हैं? इस पर पॉल का जवाब था कि वो जब से छिपकर रह रहे हैं, तब से आपराधिक गतिविधियों से उनकी दूरी बढ़ गई है.

लेकिन पॉल का ये भी कहना है कि उन्हें तलाश रहे लोग 'हर जगह पर' मौजूद हैं.
पॉल का कहना है कि वे अपने गैंग के लोगों से अभी तक संपर्क में हैं ताकि उन्हें सुरक्षा के लिए ज़रूरत पड़ने पर मदद मिलती रहे. वे चाहते तो पुलिस के सामने सरेंडर कर सकते थे लेकिन उनका दावा है कि गैंग छोड़ने का एक ही तरीका है कि देश छोड़ना होगा क्योंकि गैंग के लोग जेलों में भी सक्रिय हैं.
हमने उनसे ज़ोर देकर पूछा कि अपराध की दुनिया में उनकी संलिप्तता किस तरह की थी? इस सवाल पर पॉल ने हिचकिचाते हुए कबूल किया कि उन्होंने लोगों की जान ली है लेकिन ये भी कहा कि लोगों के घर बर्बाद करने का उन्हें अफ़सोस है.
"लोगों की जान लेने का मुझे दुख होता है. मैं कसम खाकर कहता हूं कि जिन लोगों को मैंने नुक़सान पहुंचाया है, मुझे उसका पछतावा है."
इंसाफ़ के लिए लड़ाई

जब हमने ये सारे मुद्दे सरकार के सामने रखे तो हमें बताया गया कि हिंसा से होने वाली मौत के मामलों में 'उल्लेखनीय कमी' आई है, जेलों में 'संगठित गिरोहों की ताक़त को ख़त्म कर दिया गया' है, भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की गई है और वो 'माफ़िया' के ख़िलाफ़ जीत रही है.
जहां सरकार एक तरफ़ इन गैंग्स से निपटने की कोशिश कर रही है तो दूसरी ओर इन अपराधियों को इंसाफ़ के कटघरे में खड़ा करने की जिम्मेदारी उठा रहे लोग अब खुद निशाना बन रहे हैं.
हालात की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो साल में छह सरकारी वकील मारे जा चुके हैं.
इन्हीं में से एक सीज़र सुआरेज़ भी थे. वे टीवी स्टेशन अटैक केस और भ्रष्टाचार के बड़े मामले 'मेस्टास्टासिस केस' की जांच का नेतृत्व कर रहे थे. जनवरी के महीने में गुआक़िल उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई.

उनकी सहकर्मी और सरकारी वकील मिशेल लूना कहती हैं, "वे एक खुशमिज़ाज़ शख़्स थे. एक अच्छे आदमी. वे अपने काम से प्यार करते थे."
लूना बताती हैं कि जब वो छह साल की थीं तो उनके पिता धोखाधड़ी का शिकार हो गए थे. वो कहती हैं, "उस उम्र से ही मैं ये समझ गई थी कि अन्याय का असली मतलब क्या होता है."
"जब मैं बड़ी हुई तो मैंने खुद से ये वादा किया कि मैं इसके ख़िलाफ़ जंग लड़ूंगी."
हालांकि अब उन्हें अपनी जान का डर भी सताता है और वे करियर का रास्ता बदलने के बारे में भी सोच रही हैं.
वो कहती हैं, "अगर हमें हमारी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं मिलेगी तो मैं इस्तीफ़ा दे दूंगी."

लूना और उनके सहकर्मी चाहते हैं कि लोक अभियोजकों की पहचान गुप्त रखी जाए और उनके मुक़दमों की सुनवाई वर्चुअल तरीके से हो ताकि वे उन्हीं अदालतों में अपराधियों के साथ जाने के जोख़िम से बच सकें.
अटॉर्नी जनरल डायना सालाज़ार भी 'मेस्टास्टासिस केस' में ही तस्करों और सरकारी महकमों के बीच की कड़ी की जांच कर रही हैं. उन्हें भी धमकियां मिलती रही हैं. उन्होंने पुलिस और सेना से और मदद मांगी है.
लेकिन संसाधनों की कमी भी एक मुद्दा है. मिशेल लूना पूछती हैं, "एक सरकारी वकील के लिए ये कैसे मुमकिन हैं कि पांच हज़ार मुक़दमों से निपटने के लिए उसे केवल दो लोग मदद के लिए दिए जाएं?"
हालांकि लूना को निजी तौर पर कोई धमकी नहीं मिली है लेकिन उन्हें ये फिक्र है कि ऐसा कभी भी हो सकता है. उन्हें डर है कि इक्वाडोर के हिंसक गिरोहों से निपटने की जो भी कोशिश करता है वो संगठित अपराध का टारगेट बन जाता है.
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)
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