जूलियन असांज: विकिलीक्स संस्थापक गुनाह क़ुबूल करने के बाद भी कैसे हुए रिहा?

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विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज पांच साल बाद ब्रिटेन की जेल से रिहा हो गए हैं.
अमेरिका के साथ हुए समझौते के बाद असांज ब्रिटेन से ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हो चुके हैं.
अमेरिकी सरकार और जूलियन असांज के बीच एक समझौता हुआ है जिसके तहत असांज कोर्ट में जासूसी मामले में अपना गुनाह कबूल करेंगे.
असांज बुधवार को दक्षिणी प्रशांत महासागर में स्थित नॉर्थर्न मरियाना आयलैंड्स की एक अदालत में पेश होंगे.
इसी कोर्ट में असांज जासूसी के आरोपों पर गुनाह कबूल करेंगे.
अमेरिकी अभियोजन पक्ष पहले 18 मामलों में असांज के खिलाफ सुनवाई चाहता था. इनमें से ज़्यादातर मामले इराक और अफ़ग़ानिस्तान युद्ध से जुड़े दस्तावेज़ों को लीक करने से जुड़े हुए थे.
साल 2019 में अमेरिकी सरकार ने विकिलीक्स के फ़ाउंडर को लेकर एक बयान जारी किया था जिसमें 18 आरोपों का ज़िक्र था.
असांज ने इन आरोपों को ये कहते हुए खारिज़ किया था कि ये उनकी पत्रकारिता का हिस्सा थे.
लेकिन बुधवार को होने वाली उनकी पेशी में वो सिर्फ़ एक आरोप का ही जवाब देंगे.
अमेरिका में बीबीसी के सहयोगी सीबीएस न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़, न्याय विभाग के अभियोजन पक्ष ने असांज के कबूलनामे के बाद 62 महीनों की कैद की सज़ा का सुझाव दिया है.
अगर ऐसा होता है तो जूलियन असांज अमेरिकी जेल नहीं जाएंगे क्योंकि इतना वक्त वो पहले ही ब्रिटेन की जेल में गुज़ार चुके हैं.
असांज के वकीलों ने कहा है कि अगर वो पहले के लगाए गए 18 आरोपों में दोषी पाए जाते तो उन्हें 175 सालों की सज़ा हो सकती थी.
हालांकि अमेरिका में अभियोजन पक्ष ने चार से छह साल की ही सज़ा होने की बात कही थी.
अब सारी निगाहें नॉर्थर्न मरियाना आयलैंड्स की अदालत में होने वाली सुनवाई पर है.

क्या असांज को है जान का खतरा?
जूलियन असांज की पेशी के लिए एक अनोखा रास्ता निकाला गया है.
दक्षिणी प्रशांत महासागर में स्थित नॉर्थर्न मरियाना आयलैंड्स जो कि अमेरिका का ही हिस्सा है, वहां की एक अदालत को पेशी के लिए चुना गया है.
डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस की एक चिट्ठी में लिखा है कि जूलियन असांज ने जो समझौता किया है उसके मुताबिक वो अमेरिका आना भरोसे के लायक नहीं समझते. वो अपनी मर्ज़ी से अमेरिका नहीं जाएंगे. अमरिकी सरकार पर उन्हें बिल्कुल भी भरोसा नहीं है, उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों पर अपनी हत्या की साज़िश रचने का आरोप तक लगाया है.
इसके अलावा ये आयलैंड्स ऑस्ट्रेलिया के भी नज़दीक है, ऐसे में पेशी के बाद वो जल्दी ऑस्ट्रेलिया लौट पाएंगे.

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विकिलीक्स ने क्या कहा?
जूलियन असांज की रिहाई की खबर आने के बाद विकिलीक्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया.
इसमें विकिलीक्स ने कहा, ''जूलियन असांज आज़ाद हैं. 1901 दिनों की कैद के बाद वो 24 जून की तड़के बेलमार्श की जेल से बाहर आए. लंदन की हाईकोर्ट से उन्हें ज़मानत मिली और स्टैंस्टेड एयरपोर्ट पर उन्हें रिहा किया गया जहां से उन्होंने ब्रिटेन को छोड़ा.''
विकिलीक्स के मुताबिक जूलियन असांज की रिहाई वैश्विक कैंपेन, संयुक्त राष्ट्र में आवाज़ उठाने वाले नेताओं के प्रयास हैं. इसके बाद ही अमेरिका के न्याय विभाग के साथ समझौता हो पाया, हालांकि अभी ये समझौता फ़ाइनल नहीं हुआ है. हमारे पास जैसे ही जानकारियां आएंगी हम अपडेट करेंगे.''
विकिलीक्स ने कहा, ''पांच साल तक 2*3 मीटर की सेल में हर रोज़ 23 घंटे बिताने के बाद वो अपनी पत्नी स्टेला असांज और अपने बच्चों से मिलेंगे, जिन्होंने उन्हें(असांज) को जेल में ही देखा.''

हमने तमाम कोशिशें कीं: एंथनी एल्बनीज़
असांज की रिहाई की खबर आने बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी एल्बनीज़ की भी प्रतिक्रिया आई है.
एल्बनीज़ ने कहा, ''सकारात्मक नतीजों के लिए हमने हर सही रास्तों को अपनाते हुए ऑस्ट्रेलियाई हितों की वकालत के लिए लगे रहे और ये मैं प्रधानमंत्री पद संभालने के पहले दिन से करता आया हूं.''
''कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद मैं और भी बातें कहूंगा, जो कि मुझे लगता है कि जल्द ही हो जाएगा और सही वक्त पर मैं हाज़िर रहूंगा.''
साल के शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई संसद ने असांज की रिहाई के लिए एल्बनीज़ के समर्थन वाले एक उपाय को पास किया था.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की तरफ़ से इस मामले में अभी कोई बयान नहीं आया है.
हालांकि एक मौके पर उन्होंने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया की तरफ़ से आए अनुरोध पर वो विचार कर रहे थे.

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असांज के मामले में अबतक क्या-क्या हुआ?
जूलियन असांज पांच साल की कैद के बाद ब्रिटेन की जेल से रिहा हुए हैं.
काफ़ी लंबे वक्त तक जूलियन असांज का मामला चला है और इसमें कई देश शामिल रहे हैं.
आगे पढ़िए इस पूरे मामले में कब-कब क्या हुआ है?
- अगस्त 2010- बलात्कार और एक उत्पीड़न के मामले में स्वीडन में जारी हुआ था जूलियन असांज के खिलाफ़ अरेस्ट वॉरंट. असांज ने बताया 'निराधार'
- दिसंबर 2010- लंदन में गिरफ़्तार हुए थे असांज और दूसरी सुनवाई में मिल गई थी ज़मानत
- मई 2012- यूके की अदालत ने कहा, सवालों का सामना करने के लिए असांज को स्वीडन किया जाए प्रत्यर्पित
- जून 2012- लंदन स्थित इक्वाडोर दूतावास में घुसे जूलियन असांज. इक्वाडोर ने शरण दी.
- अप्रैल 2017- अमेरिका के अटॉर्नी जनरल ने कहा- अमेरिका के लिए प्राथमिकता है असांज की गिरफ़्तारी
- मई 2017- स्वीडन ने पहले से चली आ रही जांचों को रोकते हुए असांज के खिलाफ़ चल रहे बलात्कार की जांच को रोकने की घोषणा की
- नवंबर 2018- अमेरिका की तरफ से गुप्त रूप से आरोप तय किए जाने की जानकारी सामने आई.
- अप्रैल 2019- इक्वाडोर की सरकार ने खत्म किया शरणार्थी का स्टेटस. ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन करते पाए जाने पर भेजे गए बेलमार्श जेल
- मई 2019- असांज को मिली 50 हफ्तों के कैद की सज़ा. इसी मामले में वो जेल में थे बंद.
- जनवरी 2021- एक जज ने दिया आदेश अमेरिका में नहीं होगा असांज का प्रत्यर्पण
- दिसंबर 2021- असांज के प्रत्यर्पण मामले में अमेरिका ने जीता केस, पलटा फैसला
- अप्रैल 2022- दिसंबर 2021 के फैसले के खिलाफ़ अपील करने के लिए असांज को मंज़ूरी न मिलने पर ब्रिटेन के गृह मंत्री ने किए थे असांज के प्रत्यर्पण पर हस्ताक्षर. जुलाई महीने में प्रत्यर्पण पर कीअपील
- जून 2023- प्रत्यर्पण की अपील में हुई असांज की हार
- मई 2024- यूके की अदालत ने कहा असांज कर सकते हैं नई अपील
- जून 2024- अमेरिकी प्रशासन से बातचीत के बाद असांज को ज़मानत मिली और वो जेल से रिहा हुए

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असांज का प्रत्यर्पण क्यों चाहता था अमेरिका?
जूलियन असांज ने साल 2006 में विकिलीक्स की स्थापना की था.
इसका उद्देश्य गोपनीय दस्तावेज़ और तस्वीरों को प्रकाशित करना था. विकिलिक्स ने इसके चार साल बाद यानी साल 2010 में तब सुर्खियां बटोरी जब उसने एक फ़ुटेज जारी किया जिसमें अमेरिकी सैनिक इराक़ में हेलिकॉप्टर से आम नागरिकों की हत्या कर रहे थे.
इस वीडियो के सामने आने के बाद उनका साथ देने वाली अमेरिकी विश्लेषक चेल्सी मैनिंग को साल 2010 में अमेरीका मे गिरफ़्तार किया गया.
मैनिंग पर आरोप था कि उन्होंने 7 लाख गोपनीय दस्तावेज़, वीडियो और डिप्लोमैटिक केबल का पर्दाफाश एंटी सीक्रेसी वेबसाइट के साथ मिलकर किया.
चेल्सी के मुताबिक़, उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि अमेरिका की विदेश नीति पर बहस शुरू हो लेकिन अमेरिका का कहना है कि उन्होंने ऐसा करके कई जानों को ख़तरे में डाल दिया है.
साल 2018 में अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में जारी किए गए असांज के ख़िलाफ़ अभियोग में आरोप है कि उन्होंने 2010 में मैनिंग के साथ रक्षा विभाग की गोपनीय जानकारी हासिल करने की साज़िश रची थी.
अभियोग के मुताबिक़ मैनिंग ने जनवरी और मई 2010 के बीच अमेरिकी विभागों और एजेंसियों से चार डेटाबेस डाउनलोड किए और इसे विकिलीक्स को मुहैया कराई.
अमेरिका के न्याय विभाग ने इसे "संयुक्त राज्य अमरीका के इतिहास की सबसे बड़ी गोपनीय जानकारी के साथ छेड़छाड़'' का मामला बताया था.
यही कारण है कि जूलियन असांज के पीछे अमेरिकी सरकार पड़ी हुई थी.

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अमेरिका ने ऐसे बदला रुख़
वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता नोमिया इकबाल के मुताबिक़, अमेरिका के बाइडन प्रशासन पर लंबे वक्त से जूलियन असांज मामले को सुलझाने का दबाव था.
अप्रैल महीने में ही राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि उनके करीबी सहयोगी ऑस्ट्रेलिया ने जूलियन असांज के प्रत्यर्पण केस और कानूनी मसलों को खत्म करने के लिए अनुरोध किया है.
ये उस घटना से बिल्कुल ही अलग है जब तीन साल पहले अमेरिका के न्याय विभाग ने प्रत्यर्पण का केस चलाने का फैसला किया था.
साल 2019 में इक्वाडोरियन दूतावास को छोड़ने के बाद जूलियन असांज ब्रिटेन में गिरफ़्तार हुए थे, उस वक्त हिलेरी क्लिंटन समेत कई डेमोक्रेट नेताओं ने कहा था कि ''उन्होंने(असांज ने) जो किया है उसका जवाब देना होगा.''
जूलियन असांज पर अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री और कई अन्य नेताओं ने ये आरोप लगाया था कि उन्होंने साल 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में रूस के साथ मिलकर हेरा फेरी की.
लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर ही कई प्रगतिशील नेताओं ने इसे अलग नज़रिए से देखा था. उनका कहना था कि एक ऑस्ट्रेलियन नागरिक के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने का मतलब फ़्री स्पीच का उल्लंघन होगा, बतौर पत्रकार असांज इसके हकदार हैं.
अब इस मामले में अमेरिका का ये कदम उसके शुरुआती स्टैंड से बिलकुल उलट दिखाई देता है.

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कौन हैं जूलियन असांज?
विकिलीक्स के ज़रिए अमेरिकी दस्तावेज़ों को सार्वजनिक कर पूरी दुनिया में मशहूर हुए जूलियन असांज विवादित शख्सियत हैं.
दुनियाभर में उनके लाखों प्रशंसक हैं और विश्व के कई देश अब उन्हें अपने रास्ते की रुकावट भी मानते हैं. जूलियन के साथी उन्हें कंप्यूटर-कोडिंग का महारथी बताते हैं जिन्होंने अपनी बुद्धिमता और लगन से ये मुकाम हासिल किया है.
असांज के आलोचकों का कहना है कि वो प्रचार के भूखे हैं और प्रशंसक उन्हें सच का सिपाही मानते हैं. जूलियन असांज का जन्म 1971 में उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में हुआ. माता-पिता रंगमंच से जुड़े थे इसलिए उनका बचपन अलग-अलग जगहों पर अलग माहौल में बीता.
18 साल की उम्र में वो पिता बन गए और पत्नी से अलग होने के बाद बच्चे के क़ानूनी संरक्षण के लिए भी उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी.
इंटरनेट के विकास ने उन्हें गणित के अपने हुनर को आज़माने की ओर प्रेरित किया. साल 1996 में कंप्यूर हैक करने की अपनी एक कोशिश के दौरान वो पकड़े भी गए लेकिन उन्होंने अपना काम और कंप्यूटर के क्षेत्र में अनुसंधान जारी रखे.
असांज ने विकिलीक्स की शुरुआत साल 2006 में की जब जूलियन के साथ कंप्यूटर कोडिंग के कुछ और महारथी जुड़ गए. इनका मक़सद था एक ऐसी वेबसाइट बनाना जो उन दस्तावेज़ों को जारी करे जो कंप्यूटर हैक कर के पाए गए हों.
बीबीसी से हुई एक बातचीत में असांज ने कहा था, ''अपने स्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए हमें अलग-अलग देशों से काम किया. अपने संसाधनों और टीमों को भी हम अलग-अलग जगह ले गए, ताकि क़ानूनी रुप से सुरक्षित रह सकें. अब हम ये सब करना सीख गए हैं. आज तक न हमने कोई केस हारा है न ही अपने किसी स्रोत को खोया है.''
साल 2010 में लगे बलात्कार के आरोप और अमेरिकी खुफिया दस्तावेज़ सार्वजनिक करने के मामलों ने असांज की ज़िंदगी पूरी तरह से बदल दी.
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