विकीलीक्स का दावा ग़लत, 'आधार' डेटा सुरक्षित- सरकार

इमेज स्रोत, NARINDER NANU/AFP/Getty Images
- Author, मानसी दाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने रविवार को कहा है कि आधार कार्ड के लिए लिया जा रहा डेटा पूरी तरह सुरक्षित है. प्राधिकरण के अनुसार डेटा को सुरक्षित रखने के लिए कड़े सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता है ताकि कोई भी ये जानकारी चुरा ना सके.
इस मामले में प्राधिकरण ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पीटीआई के हवाले से लिखी गई एक रिपोर्ट को भी रीट्वीट किया.
साथ ही ट्वीट में लिखा, "हमारे सिस्टम सुरक्षित हैं और आधार डेटा के चोरी की जो ख़बर फैलाई जा रही है, वो ग़लत है."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
मंगलवार को डिजिटल इंडिया ने अपने आधिकारिक फ़ेसबुक पन्ने पर एक वीडियो जारी किया था, जिसमें अपने आधार डेटा को कोई व्यक्ति किस प्रकार लॉक यानी सुरक्षित कर सकता है इस बारे में बताया गया है.
डिजिटल इंडिया का कहना था, "सबको यह चिंता तो रहती है कि कहीं आपके आधार से जुड़ी जानकारी लीक न हो जाए."
हालांकि वीडियो में ये भी कहा गया था कि ऐसा करने पर किसी भी प्रकार की सेवा के लिए अपने डेटा का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. इसका मतलब है कि आपका डेटा इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं होगा.
डेटा हैक की आशंका?

इमेज स्रोत, Digital India, Facebook
इसी महीने की 25 तारीख को विकीलीक्स ने आशंका जताई थी कि अमरीकी ख़ुफ़िसा एजेंसी सीआईए ने भारत के बायोमेट्रिक डेटा सिस्टम यानी आधार के डेटाबेस से जानकारी चुराई है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
इससे पहले 24 अगस्त को विकीलीक्स ने एक पोस्ट में इस बारे में विस्तृत जानकारी दी थी.
विकीलीक्स का दावा था कि सीआईए बायोमेट्रिक जानकारी में सेंध लगाने के लिए एक ऐसे साइबर टूल का इस्तेमाल कर रही है, जिसे अमरीका की कंपनी क्रॉस मैच द्वारा इजाद किया गया है. ये कंपनी सरकार के लिए और ख़ुफ़िया संस्थानों के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम बनाती है.
यह कंपनी भारत सरकार को आधार के लिए बायोमेट्रिक तकनीक उपलब्ध है.

इमेज स्रोत, Wikileaks
विकीलीक्स का दावा था कि साल 2011 में पाकिस्तान में एक सैन्य अभियान में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की हत्या के बाद क्रॉस मैच कंपनी का नाम ख़बरों में आया था.
रिपोर्टों के मुताबिक अमरीकी सेना ने इस कंपनी की तकनीक का इस्तेमाल ओसामा की पहचान करने के लिए किया था.
'देश के भीतर विकसित हुई है तकनीक'

इमेज स्रोत, NOAH SEELAM/AFP/Getty Images
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार यूआईडीएआई प्राधिकरण का कहना है, "बायोमेट्रिक्स लेने के लिए जो तकनीक है वो हमारे देश के भीतर विकसित की गई है और इसमें सुरक्षा के पर्याप्त फीचर्स मौजूद है ताकि किसी भी बायोमेट्रिक डिवाइस के उपयोग से इसमें से डेटा हैक ना किया जा सके."
विकीलीक्स के दावे को खारिज करते हुए प्राधिकरण ने कहा है कि इस तरह की जानकारी "ग़लत है" कुछ "निहित स्वार्थ" वाले इसे फैला रहे हैं.
"आधार तंत्र में विभिन्न रजिस्ट्रार और एजेंसियों द्वारा डेटा लेने के लिए जिन उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है उनमें से एक 'क्रॉस मैच' की भी है, इसीलिए कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग इस तरह की जानकारी फैला रहे हैं कि अनाधिकृत रूप से आधार की जानकारी दूसरों के पास जा रही है."
विकीलीक्स के दावे से छिड़ी बहस
विकीलीक्स के दावे का खंडन किया 'द हैकर न्यूज़' ने. इस ट्विटर हैंडल ने लिखा, "ऐसा करना संभव नहीं है क्योंकि भारतीय सरकार ने इस काम लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सिस्टम ऐसी कंपनी से खरीदे हैं जो सीआईए से जुड़ी नहीं है."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 3
विकीलीक्स के सवाल के इस जवाब ने इंटरनेट पर एक बहस को जन्म दिया.
माईलाइफ्सऑपेरा नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, "लेकिन हैकिंग तो बाहर से भी की जा सकती है."
मैक्स रॉन्टजेन ने लिखा, "मुद्दा ये है कि क्रॉस मैच अमरीकी सरकार और सीआईए के करीब है और एक संदेहास्पद ग्रुप के साथ इसके तार जुड़े हैं. इस बात से इंकार करना सही नहीं है."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 4
रवि ए ने लिखा, "आप मूल बात नहीं समझ रहे हैं. सीआईएक इस कंपनियों को कंट्रोल करती है और मैलवेयर इस्तेमाल करती है. ये पहली बार नहीं है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)












