रूस का नया समूह 'अफ़्रीका कॉर्प्स' क्या है, जिसने ली है वागनर लड़ाकों की जगह

पुतिन

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    • Author, मैट मर्फी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, लंदन

पिछले साल राष्ट्रपति पुतिन की सरकार के ख़िलाफ़ बग़ावत कर पूरी दुनिया को सकते में डालने वाली प्राइवेट आर्मी वागनर ग्रुप को रूस ने प्रभावी तरीक़े से भंग करके बदल दिया है.

कुछ एक्सपर्ट ने बीबीसी से इसकी पुष्टि की है.

मॉस्को में सेना प्रमुखों के साथ महीनों तक चले तनाव के बाद वागनर ग्रुप के नेता येवगेनी प्रिगोझिन ने 23 जून 2023 को यूक्रेन से सीमा पार की और दक्षिणी शहर रोस्तोव पर कब्ज़ा कर लिया था.

इसके बाद उनकी सशस्त्र बल ने मॉस्को की ओर कुछ दूरी तक मार्च किया. प्रिगोझिन ने इसे "न्याय के लिए मार्च" कहा था. हालांकि इसके ठीक अगले दिन अचानक उन्होंने इसे रोक दिया था.

इस घटना के सिर्फ़ दो महीने बाद, एक विमान दुर्घटना में प्रिगोझिन और वागनर के कई वरिष्ठ सदस्यों के मौत हो गई, जिससे वागनर समूह का भविष्य अनिश्चितता में चला गया.

मर्सिनरीज़ पर संयुक्त राष्ट्र के वर्किंग ग्रुप के सदस्य और कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में लेक्चरर डॉ. सोरचा मैकलियोड का कहना है कि इसके बाद वागनर ग्रुप के पूर्व लड़ाके रूस में बिखर गए.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "वागनर शायद पहले की तरह बिलकुल मौजूद ना हो, लेकिन इस समूह के कुछ हिस्से अभी भी मौजूद हैं. हालांकि ये रूस में इस तरह से बिखरे हुए हैं कि इन पर किसी एक का कंट्रोल नहीं है."

वो कहती हैं, "वागनर ग्रुप रूस के लिए भू-राजनीतिक और आर्थिक रूप से बहुत अधिक अहम था, इसलिए कुछ लोगों का कहना है कि इसका अस्तित्व कभी खत्म नहीं होने जा रहा."

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मॉस्को की ओर कूच के दौरान वागनर लड़ाके

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रूस के लिए क्यों अहम था वागनर समूह

पिछले कई सालों से प्रिगोझिन के सशस्त्र बल अफ़्रीका और सीरिया में रूसी अभियानों के लिए अहम भी रहे हैं और इससे वो इनकार भी करता रहा है.

लेकिन यूक्रेन में जब रूस की परंपरागत सेना कीएव की रक्षा पंक्ति को भेदने के लिए संघर्ष कर रही थी उसी वक़्त प्रिगोझिन और वागनर लड़ाके सामने आए.

साल 2022 के अंत और 2023 की शुरुआत में वागनर समूह ने रूस की कुछ जंगी सफलताओं में अहम भूमिका निभाई थी. ज़्यादातर पूर्व कैदियों वाला यह समूह, बखमूत की महीनों तक चली भीषण लड़ाई में फँसने से पहले पूर्वी शहर सोलेडार पर कब्ज़ा करने में क़ामयाब रहा था.

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अनुसार, "अपने चरम पर वागनर के पास यूक्रेन में लगभग 50 हज़ार भाड़े के सैनिक थे."

लेकिन अब, विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन में वागनर के संचालन को अन्य रूसी सरकार और अर्धसैनिक इकाइयों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है.

वागनर के एक पूर्व कमांडर ने हाल ही में बीबीसी रूसी सेवा को बताया कि भाड़े के सैनिकों को "रक्षा मंत्रालय में शामिल होने" या चले जाने का आदेश दिया गया था.

वागनर लड़ाके

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अफ़्रीका में होनी थी वागनर सैनिकों की तैनाती

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ब्रिटेन के खुफ़िया अधिकारियों का मानना है कि समूह की कुछ पैदल सेना इकाइयों को रोसगवार्डिया या नेशनल गार्ड में शामिल कर लिया गया है. 2016 में बनी इस इकाई को पुतिन की "निजी सेना" कहा जाता था और इसका कंट्रोल पुतिन के पूर्व बॉडीगार्ड विक्टर ज़ोलोटोव के पास था.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वागनर समूह के लड़ाके अक्टूबर 2023 में नेशनल गार्ड के नियंत्रण में आने लगे थे.

पूर्व वागनर सैनिकों को छह महीने के अनुबंध पर यूक्रेन और नौ महीने के अनुबंध पर अफ़्रीका में तैनात किया जाना था.

हालांकि हाल ही में बखमूत में भाड़े के सैनिकों के खूनी अभियानों की कमान संभालने वाले और लंबे समय तक वागनर लड़ाके रहे एंटोन येलिजारोव ग्रुप के एकीकरण की पुष्टि करते लगे.

वागनर से जुड़े टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा था कि वह एक कैंप के निर्माण में मौजूद थे, जहां वागनर लड़ाके "रूस की भलाई के लिए काम करेंगे" और नेशनल गार्ड इकाइयों के साथ एक नए फ़ॉर्मेशन में जुड़ेंगे.

ब्रिटेन के अधिकारियों ने कहा कि वागनर की पूर्व असॉल्ट टुकड़ियों को रोसगवार्डिया के वालंटियर कोर में शामिल करने से संकेत मिलता है कि उन्हें शामिल कर लिया गया है और वागनर समूह पर रूसी सरकार का नियंत्रण बढ़ गया है.

हाल ही में बीबीसी रूसी सेवा की पड़ताल में पाया गया कि अन्य पूर्व वागनर लड़ाकों ने चेचन्या में व्लादिमीर पुतिन के ताकतवर नेता रमज़ान कादिरोव और उनकी अखमत सेना के साथ लड़ने के लिए हस्ताक्षर किए हैं.

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इमेज कैप्शन, वागनर ने बखमूत पर कब्जा करने में बहुत मदद की लेकिन उनके कई सैनिक भी मारे गए.

जब वागनर की कमज़ोरी आई सामने

वागनर समूह के कमजोर होने की एक घटना उस वक़्त भी सामने आई, जब रूसी शहर सेंट पीटर्सबर्ग में इसके कब्जे़ वाले टॉवर ब्लॉक से कथित तौर पर इसका लोगो हटा दिया गया था.

बग़ावत के बाद के दिनों में कहा गया कि प्रिगोझिन ने पुतिन के साथ एक समझौता किया था, ताकि प्रिगोझिन अपने समूह के अफ़्रीका में संचालन पर ध्यान केंद्रित कर सकें, शासन को मजबूत कर सकें और रूस के लिए संसाधन सुरक्षित कर सकें.

लेकिन प्रिगोझिन की मौत के बाद रूस के उप रक्षा मंत्री यूनुस-बेक येवकुरोव ने कथित तौर पर अफ़्रीकी राजधानियों का दौरा किया.

अपने दौरे में उन्होंने अधिकारियों को आश्वासन दिया कि जो सेवाएं वागनर ग्रुप दे रहा था, उनको खत्म नहीं किया जाएगा.

इस महीने की शुरुआत में पोलिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफ़ेयर्स थिंक टैंक के मुताबिक़, प्रिगोझिन की मौत के बाद रूसी सरकार का अफ़्रीका पर ध्यान कमज़ोर होने के बजाय मज़बूत हुआ है.

फ़रवरी में बीबीसी को मिले एक दस्तावेज़ में यह पता चला कि रूस रणनीतिक तौर पर अहम प्राकृतिक संसाधनों तक पहुँच के बदले में 'रिजीम सर्वाइवल पैकेज' की पेशकश रहा था. इसे अवधारणा को वागनर समूह का समर्थन भी मिला हुआ था.

वागनर ग्रुप

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क्या है अफ़्रीका कॉर्प्स

इस योजना को तथाकथित एक रूसी अभियान समूह की ओर से पेश किया गया था, जिसे अफ़्रीका कॉर्प्स का नाम दिया गया.

इसकी कमान पूर्व जीआरयू जनरल एंद्रे एवरियानोव के पास थी. इस अभियान से पहले एवरियानोव टार्गेट किलिंग और विदेशी सरकारों को अस्थिर करने में विशेषज्ञता वाले गुप्त अभियानों की निगरानी करते थे.

विशेषज्ञों ने बीबीसी को बताया कि अफ़्रीका कॉर्प्स ने पश्चिम अफ़्रीका में वागनर की जगह ले ली है. टेलीग्राम पर, यूनिट ने भर्ती करने वालों को हर महीने एक लाख 10 हज़ार रूबल तक का वेतन देने और "जंग का लंबा अनुभव रखने वाले कमांडरों के मातहत सेवा देने का दावा किया जा रहा है."

जनवरी में, अफ़्रीका कॉर्प्स ने बुर्किना फासो में 100 सैनिकों की अपनी पहली तैनाती का एलान किया था. कथित तौर पर अप्रैल में 100 और सैनिक नाइजर पहुंचे.

अटलांटिक काउंसिल के एक सुरक्षा विश्लेषक रुस्लान ट्रैड ने बीबीसी को बताया कि वास्तव में वागनर अब अफ़्रीका कॉर्प्स बन गया है और अब उसका काम सैन्य ख़ुफ़िया और रक्षा मंत्रालय के मकसद को पूरा करना है.

रुस्लान ट्रैड के मुताबिक़, "अफ़्रीका में ये सैनिक लगभग वही काम कर रहे हैं, जो वागनर समूह करता था. जैसे कि व्यापार मार्गों की रखवाली करना, उन संसाधनों को सुरक्षित करना, रूस जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है और स्थानीय जनता की सेवा करना और प्रवासियों के आने-जाने को निर्देशित करना."

पीआईएसएम ने बताया कि अफ़्रीका कॉर्प्स का इस्तेमाल वागनर के मुक़ाबले और भी ज्यादा खुले तौर पर किया जाएगा. इसका उद्देश्य अफ़्रीका में पश्चिमी और विशेष रूप से फ़्रांसीसी प्रभाव को कम करना है.

बीबीसी रूसी सेवा ने बताया कि केवल मध्य अफ़्रीकी गणराज्य (सीएआर) में वागनर अभी भी अपने पूर्व स्वरूप की छाया में काम कर रहा है, जिसे कथित तौर पर प्रिगोझिन के बेटे पावेल नियंत्रित कर रहे हैं.

येवजिनी प्रिगोझिन के साथ काम करने वाले एक सूत्र ने बीबीसी रूसी सेवा को बताया, "असल में रूस ने ही अफ़्रीका में पावेल को अपने पिता के कामों को जारी रखने की मंज़ूरी दी है. हालांकि शर्त यह है कि वे रूसी हितों के ख़िलाफ़ नहीं जाएंगे."

मॉस्को में वागनर का अस्थाई मेमोरियल.

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वागनर की सालगिरह

पिछले हफ़्ते 'ले मोंडे' ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि लगभग 1,500 वागनर सैनिकों ने विद्रोहियों के कब्ज़े वाले क्षेत्रों पर हमलों में स्थानीय सुरक्षा बलों की सहायता की थी. हालांकि, पीआईएसएम के मुताबिक़ रूस की रणनीतिक सोच में सीएआर की अहमियत घटती जा रही है.

डॉ. मैकलियोड के मुताबिक़, "सीएआर में वागनर का असल मकसद इस अवधारणा को साबित करना था कि भाड़े समूहों को एक सफल आतंकवाद विरोधी समूह के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि रूस का ऐसा मानना है कि इस उद्देश्य को अब पूरा किया जा चुका है."

लेकिन मैकलियोड ने आगे कहा, "वागनर सीएआर के भीतर पूरी तरह से उलझा हुआ था. जिससे इसे नए अफ़्रीका कॉर्प्स के साथ बदलना एक मुश्किल भरा काम था.

प्रिगोझिन के विद्रोह से पैदा हुए ख़तरे के बावजूद, रविवार को वागनर की सालगिरह रूस में बड़े पैमाने पर बिना किसी घटना के गुज़री.

ओवीडी-इंफो निगरानी समूह के डैन स्टोरीव ने बीबीसी को बताया कि प्रिगोझिन की विरासत ज्यादातर क्रेमलिन के साथ जुड़े लोगों के पास थी.

उन्होंने कहा, "आम तौर पर वागनर विद्रोह को ज़मीनी स्तर पर बहुत ज़्यादा समर्थन नहीं मिला, अगर मिला भी है तो सालगिरह मनाने के लिए बड़े पैमाने पर रैलियां आयोजित करने के लिए. इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि उस आयोजन में कोई वास्तविक युद्ध-विरोधी संदेश नहीं था. रूस में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाले लोग हैं, लेकिन वे युद्ध-विरोधी सक्रियता पर केंद्रित हैं और उनका प्रिगोझिन से कोई लेना-देना नहीं है."

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