वागनर ग्रुप: अपराधियों की टोली जो बनी यूक्रेन में पुतिन की ढाल

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- Author, एलिज़ावेटा फ़ोश, ओल्गा इवशिना और सेनिया शुर्मानोवा
- पदनाम, बीबीसी रशियन
कई वर्षों तक बिज़नेसमैन येवगिनी प्रिगोझिन की पर्सनल आर्मी 'वागनर ग्रुप' लाइमलाइट से दूर रही. रूस का शीर्ष नेतृत्व इसके अस्तित्व से इनकार करता रहा.
लेकिन यूक्रेन पर रूसी हमले के दौरान, इसने जंग में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाना शुरू कर दिया.
जेल की सज़ा काट चुके इसके कुछ लड़ाकों को रूस के शीर्ष मेडल से सम्मानित किया गया है.
साल 2022 के अंतिम दिन रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने यूक्रेन में जंग लड़ चुके सिपाहियों और अधिकारियों को देश के शीर्ष मेडल से सम्मानित करने के लिए देश के दक्षिणी हिस्से का दौरा किया था.
सम्मानित होने वाले इन्हीं सैनिकों में जंग से थका दिखता दाढ़ी वाला वो नौजवान भी था जो बाकियों से बिल्कुल अलग वर्दी में था. ये वागनर ग्रुप का लड़ाका था.
इस नौजवान की पहचान आइक गैसपरयान के रूप में हुई जो मार्शल आर्ट के माहिर हैं. उन्हें अक्टूबर 2019 में मॉस्को के एक कैफ़े में लूटपाट के लिए गिरफ़्तार किया गया था. इसके कुछ महीने बाद ही उन्हें सात साल की सज़ा हुई.
वो दिसंबर में वागनर ग्रुप से जुड़े एक टेलीग्राम चैनल के वीडियो में दिखाई दिए. इसमें गैसपरयान ये कहते नज़र आते हैं कि वो रियाज़न शहर की जेल से बाहर निकलने के बाद यूक्रेन में जंग लड़ने पहुंच गए हैं.
वो रूस के 40,000 उन पूर्व क़ैदियों में शामिल हो गए थे जिनके बारे में अमेरिका का मानना है कि वे यूक्रेन में तैनात हैं. वे वागनर ग्रुप के 10,000 भाड़े के सैनिकों का हिस्सा हैं.
वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, ये बात मानवाधिकार ग्रुप 'रशिया बिहाइंड बार्स' द्वारा इकट्ठा किए गए डेटा से मैच करती है. यह मानवाधिकार ग्रुप जंग में रूसी क़ैदियों की भूमिका की पड़ताल कर रहा है.

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अच्छी रक़म और एडवेंचर का वादा
वागनर ग्रुप के संस्थापक येवगिनी प्रिगोझिन ने पिछले साल क़ैदियों के भर्ती अभियान के लिए रूस की जेलों का दौरा किया था.
उन्होंने यूक्रेन में रूस की जंग में और उनके संगठन में शामिल होने वाले क़ैदियों के क्रिमिनल रिकॉर्ड को मिटा देने का वादा किया था.
बाद में पता चला कि इन लोगों को यूक्रेन के जंगी मोर्चे की सबसे ख़तरनाक़ जगहों पर भेजा गया और इनमें से कई मारे गए.
यूक्रेनी सेना ने कहा है कि वागनर ग्रुप के बहुत से क़ैदियों को बलि का बकरा बनाया गया और इनमें से अधिकांश मारे जा चुके हैं.
हालांकि वागनर ग्रुप अपनी टीम में भर्ती के लिए हमेशा क़ैदियों पर निर्भर नहीं था.
साल 2014 में इसकी स्थापना हुई और 2015-16 से इसकी गतिविधियां बढ़ती गई. इस मिशनरी ग्रुप को पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थक अलगाववादियों की मदद के लिए बनाया गया था.
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लेकिन जल्द ही इसकी गतिविधि पूर्वी यूरोप से बाहर फैल गई. वागनर ग्रुप के भाड़े के सैनिकों की मौजूदगी सूडान, सीरिया, लीबिया और अफ़्रीकी महाद्वीप के कई देशों में देखी गई है.
इसमें शामिल होने वालों के लिए सबसे प्रमुख आकर्षण मोटी तनख़्वाह और एडवेंचर का वादा है.
एक पूर्व लड़ाके ने बीबीसी को बताया, "सीमाओं से परे रूस के हितों की रक्षा करने के लिए रूमानी तबीयत के लोगों ने इस संगठन को जॉइन किया."
यूक्रेन में जंग से पहले वागनर ग्रुप में शामिल होने वाले अधिकांश लोग एक छोटे कस्बे से थे, जहां अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी ढूंढने की संभावना सीमित थी.

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वागनर के लिए काम करने के लिए 1500 डॉलर (क़रीब 1.22 लाख रुपये) मिलते हैं और अगर किसी लड़ाके को जंग में भेजा जाता है तो 2,000 डॉलर (1.6 लाख रुपये) तक मिल जाते हैं.
वागनर के लड़ाके सीरिया में राष्ट्रपति असद के साथ कंधे से कंधा मिलकर लड़े. उन्होंने लीबिया में संयुक्त राष्ट्र की समर्थित सरकार के ख़िलाफ़ जनरल हफ़्तार की मदद के लिए जंग में हिस्सा लिया.
हालांकि एक अनुमान के अनुसार, 2014 से 2021 के बीच वागनर ग्रुप में 15,000 लोग शामिल हुए, फिर भी ये सीमित संख्या ही थी.
लेकिन रूस के अंदर इस ग्रुप के बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी है. यूक्रेन में जब रूस ने व्यापक युद्ध शुरू किया तब इसका प्रभाव और रुतबा भी बढ़ा.

येवगिनी प्रिगोझिन कौन है?
जंग से पहले रूस के अधिकारियों ने वागनर के अस्तित्व से इनकार किया था.
मॉस्को दुनिया के अन्य हिस्सों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए भाड़े के इन सैनिकों के इस्तेमाल को ख़ारिज़ करता रहा है. अधिकारियों ने कहा कि रूस में निजी आर्मी प्रतिबंधित है और इस तरह के संगठन में शामिल होना दंडनीय अपराध है.
बिज़नेसमैन येवगिनी प्रिगोझिन ने वागनर से अपना नाम जोड़े जाने पर कई पत्रकारों पर मुकदमा तक दायर किया.
साल 2019 में जब सीरिया में रूसी लड़ाकों के बारे में राष्ट्रपति पुतिन से पूछा गया था. उस वक़्त पुतिन ने कहा था कि वहां कुछ प्राइवेट सिक्युरिटी कंपनियां वहां काम कर रही हैं, लेकिन इनका रूसी सरकार से कोई लेना देना नहीं है.
पुतिन ने इसी तरह के बयान साल 2020 में लीबिया में रूसी लड़ाकों के बारे में पूछे जाने पर भी दिया था.
लेकिन जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो ये सब बदल गया. जब रूसी सेना यूक्रेन में जल्द अपना लक्ष्य हासिल करने में असफल रही तो येवगिनी प्रिगोझिन, रूसी सेना की आलोचना करने लगे और वागनर ग्रुप से अपने संबंध पर खुल कर बोलने लगे.
आख़िरकार उन्होंने बीते सितम्बर में स्वीकार किया कि उन्होंने ही 2014 में इस संगठन की स्थापना की थी.

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हाल ही में उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन के सोलेडार क़स्बे पर कब्ज़ा करने में वागनर लड़ाकों ने अहम भूमिका निभाई थी.
इस जंग का वागनर लड़ाकों ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया जो वायरल हो गया. इस घटना के बाद यूक्रेन में रूसी ऑपरेशन के कमांडर और चीफ़ ऑफ़ जनरल स्टाफ़ जनरल वैलेरी गेरासिमोव की कड़ी आलोचना हुई.
जानकारों का दावा है कि वागनर के एक लड़ाके को सम्मानित होते और पुतिन के साथ हाथ मिलाते देख कर न केवल इन लड़ाकों का उत्साह बढ़ा बल्कि ये इस गोपनीय ग्रुप को शांत करने की एक कोशिश भी थी.
इस ग्रुप पर युद्ध अपराधों के आरोप भी लगे है. ये आरोप हाल ही में यूक्रेन में और इससे पहले लीबिया और सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में लग चुके हैं.
महिमामंडित हीरो
बीते अगस्त में रूस के सरकारी टीवी चैनल ने एक व्यक्ति के बारे में रिपोर्ट प्रसारित की थी जिसने "मोर्चे पर जाने के लिए खुद ही अपील की थी" और जो यूक्रेन में मारा गया.
रिपोर्ट में कहा गया कि एक हीरो ने खुद को उड़ा लिया और अपने साथ तीन यूक्रेनी सैनिकों को भी मार डाला.
इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि ये 26 साल का कोंस्टैटिन तुलिनोव थे जिन्हें पहले कार चुराने, लूटपाट करने और ड्रग्स के मामलों में सज़ा दी गई थी और जब युद्ध शुरू हुआ तो वो जेल में बंद थे.
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सैनिक होने का अनुभव न होने के बावजूद जंग में शामिल होने की अपील की थी.
इसके बाद साल 2019 में रूसी मानवाधिकार मीडिया संगठन गुलागु डॉट नेट ने जेल के अंदर का लीक हुआ. उसमें तुलिनोव एक दूसरे कैदी के साथ दुर्व्यवहार करते दिखे थे.
तुलिनेव जिस जेल से छूटे थे, वहां से बीबीसी ने टिप्पणी मांगी थी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

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बीबीसी ने तुलिनोव की मां से बात की, जिन्होंने ये पुष्टि की कि उन्हें पता था कि उनके बेटे ने जंग में शामिल होने के लिए खुद को वालंटियर किया था.
उन्होंने कहा, "हां, उसने मुझसे कहा था कि वो मातृभूमि की रक्षा के लिए जा रहा है और उसने जंग में इस स्पेशल ऑपरेशन में शामिल होने का खुद फैसला किया था."
'दुनिया की सबसे अनुभवी सेना'
येवगिनी प्रिगोझिन ने बीते सितंबर में कहा था कि उन्होंने 2014 में वागनर ग्रुप की स्थापना की थी. उन्होंने दावा कि ये ग्रुप रूसी लोगों की रक्षा के लिए बनाया गया है. उन्होंने अपनी कंपनी को 'रूस का एक स्तंभ' बताया.
अक्तूबर की शुरुआत में रूस की सरकार ने उन्हें एक सच्चा नागिरक और एक ऐसा व्यक्ति बताया जिसका दिल रूस के लिए धड़कता है.
एक महीने बाद येवगिनी के शहर सेंट पीटर्सबर्ग में एक वागनर सेंटर खोला गया.
ये बहुत आलीशान ऑफ़िस काम्प्लेक्स है जहां 'रूस की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए आईटी, मीडिया और बुनियादी सैन्य ट्रेनिंग' को लेकर स्कूली बच्चों और नौजवानों के लिए शैक्षणिक और ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाते हैं.
पहले रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी वागनर ग्रुप के बारे में बहुत बात नहीं करती थी. लेकिन अब वे दिन में कई बार और खुलकर क़ैदियों की भर्ती रिपोर्ट चलाते हैं.

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रूस के सरकारी चैनल एनटीवी ने वागनर ग्रुप पर एक स्टोरी प्रासारित की जिसमें इसे 'दुनिया की सबसे अनुभवी सेना' बताया गया.
पिछले हफ़्ते येवगिनी प्रिगोझिन ने रूसी संसद के स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोडिन को एक चिट्ठी लिख कर उन पत्रकारों की शिकायत की जो "भर्ती किए गए क़ैदियों के बारे में बेकार की जानकारी मांग रहे हैं और उन्हें अपराधी के रूप में दिखा रहे हैं."
प्रिगोझिन ने क़ानून को और कड़ा करने और वागनर में भर्ती नए लोगों के आपराधिक अतीत के बारे में लिखने से रोकने के लिए मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था.
वोलोडिन ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया और रूसी दंड संहिता में संभावित संशोधन के लिए एक संसदीय समिति गठित करने का आदेश दिया.
रूसी संसद के प्रमुख ने कहा, "हमारे देश की रक्षा करने वाला हरेक व्यक्ति हीरो हैं."

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