रूस-यूक्रेन की जंग में आख़िर पोलैंड पर किसने दाग़ी मिसाइल

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  • 15 नवंबर को पोलैंड के एक गांव में मिसाइल गिरी, दो लोग मारे गए. ये गांव यूक्रेन की सीमा के नज़दीक है.
  • यूक्रेन ने इस मिसाइल हमले के लिए रूस को ज़िम्मेदार बताते हुए इसे 'जंग का विस्तार' बताया.
  • कुछ की आशंका - यूक्रेन की एयर डिफेंस मिसाइल इसके लिए ज़िम्मेदार
  • यूक्रेन में कुछ लोगों ने कहा- रूस ने जान-बूझकर किया हमला, नेटो ने ख़ारिज किया दावा

15 नवंबर को एक तरफ़ दुनिया की आर्थिक और सैन्य महाशक्तियां इंडोनेशिया के शहर बाली में आयोजित जी20 सम्मेलन में यूक्रेन संकट पर चर्चा में मशगूल थीं, वहीं दूसरी तरफ़ रूस की सेना कुछ दिनों के अंतराल के बाद यूक्रेन के शहरों पर मिसाइल और बम बरसा रही थी.

इन सबके बीच जो ख़बर आई उसने कुछ देर के लिए ही सही, लेकिन ये आशंका पैदा कर दी थी कि कहीं ये जंग यूक्रेन की सीमाओं से बाहर न आ जाए और इसमें नेटो देश न कूद जाएं. रूस और यूक्रेन के बीच पिछले पिछले दस महीनों से चल रही जंग के शायद ये सबसे तनावपूर्ण लम्हे थे.

पोलैंड चूंकि नेटो का सदस्य है, तो उसने प्रतिक्रिया देने में ज़रा भी देर नहीं की. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल पैट्रिक राइडर ने कहा कि नेटो के संकल्प पत्र के आर्टिकल 5 में 'कॉमन डिफेंस' का ज़िक्र साफ़ तौर पर है.

राइडर ने कहा, "अभी तक इस मामले में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है, इसलिए मैं अटकलें नहीं लगाना चाहता. लेकिन जब हमारी सुरक्षा की बात आएगी तो हमें ये अच्छी तरह से पता है कि हम नेटो सदस्य देशों के हर एक इंच की रक्षा करेंगे."

जो बाइडन

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पोलैंड के गांव पर गिरी ये मिसाइल किसकी थी और कहाँ से दाग़ी गई, सुरक्षा एजेंसियां अब भी इसकी जाँच में जुटी हुई हैं. हालाँकि पोलैंड ने शुरुआत में कहा था कि ये रूस निर्मित मिसाइल है, लेकिन पोलैंड के अधिकारी अब ये दावा कर रहे हैं कि ये हादसा यूक्रेन के एंटी एयरक्राफ्ट डिफेंस की वजह से हुआ है.

पोलैंड के गांव में मिसाइल गिरने की ख़बर पर प्रतिक्रिया देने में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने जरा भी देरी नहीं की.

उन्होंने कहा, "मुझे यूक्रेन की फ़ौज और वायु सेना से जानकारी मिली है कि ये मिसाइल रूस की है और उन पर यकीन न करने की कोई वजह नहीं है."

हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सब्र दिखाते हुए कहा कि ऐसा लगता नहीं है कि मिसाइल रूस के इलाके से दाग़ी गई होगी.

नेटो के प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग

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मिसाइल किसकी, कन्फ्यूज़न कायम

नेटो के सहयोगी देश ब्रसेल्स में इस मुद्दे पर बैठक कर रहे हैं. मुद्दा इसलिए अति संवेदनशील है क्योंकि रूस और यूक्रेन की नौ महीने से चली आ रही जंग में ऐसा पहली बार हुआ है जबकि नेटो देश की ज़मीन पर 'हमला' हुआ है.

नेटो के प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने भी माना कि पोलैंड पर गिरी मिसाइल की घटना शायद यूक्रेन के रूस की मिसाइलों को निशाने बनाने के क्रम में हुई.

उन्होंने कहा, "अभी जाँच पूरी नहीं हुई है, इसलिए निर्णायक रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता. पोलैंड इस हादसे की जाँच की अगुवाई कर रहा है. मुझे पूरा यकीन है कि इस मामले में पोलैंड और यूक्रेन के अधिकारियों के बीच बात होगी. भविष्य में इस तरह की जोखिम को रोकने के लिए ज़रूरी है कि रूस जंग को रोक दे."

जिस समय पोलैंड के गांव पर ये मिसाइलें गिरीं, यूक्रेन के कई शहरों को रूस निशाना बना रहा था. यूक्रेन के अलग-अलग हिस्सों में रूस की सेनाएं नागरिक ठिकानों और सैन्य आधारभूत ढाँचे को निशाना बना रही थीं. अब माना जा रहा है कि रूस की मिसाइलों को रोकने के लिए यूक्रेन ने जवाब में जो मिसाइलें दागीं वो निशाना चूक गईं.

हालाँकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ज़ोर देकर बार-बार दोहरा रहे थे कि रूस ही इस हमले के लिए ज़िम्मेदार है और ये वास्तव में जंग का विस्तार है. ज़ेलेंस्की ने कहा, "नेटो के क्षेत्र में मिसाइल से हमला... यह एकजुट सुरक्षा पर रूसी हमला है. कार्रवाई की जानी चाहिए."

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने पहले ही आगाह किया था कि 'रूसी आतंक' के यूक्रेन की सीमाओं से परे जाने की पूरी-पूरी संभावना है.

रक्षा मंत्री ने भी अपने राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के सुर में सुर मिलाया. उन्होंने कहा, "हम बहुत पहले से हवाई क्षेत्र बंद करने की मांग करते आ रहे हैं, क्योंकि आसमान की कोई सीमा नहीं होती."

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नेटो में ब्रिटेन के राजदूत डेविड कोरी ने बीबीसी से कहा, "पिछले कुछ दिनों से हम देख रहे हैं कि रूस जान-बूझ कर यूक्रेन के नागरिक ठिकानों को निशाना बना रहा है. यूक्रेन को अपनी रक्षा करने का पूरा-पूरा हक़ है और इस समय वो यही कर रहे हैं."

भविष्य में भी ऐसा होने की संभावना है, इस जोखिम से बचने के लिए नेटो और ब्रिटेन के पास क्या रास्ते हैं, कोरी ने कहा, "इस जटिल समस्या को सुलझाने को सीधा-सीधा तो कोई रास्ता नहीं है, लेकिन नेटो देश और ब्रिटेन, यूक्रेन की अधिक से अधिक मदद कर सकते हैं. रूसी रॉकेट और मिसाइलों से बचाने के लिए यूक्रेन को एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम दे सकते हैं."

क्या नेटो ने रूस को साफ़ तौर पर कहा है कि वो इस तरह से जोखिम से बचने के लिए यूक्रेन के सीमावर्ती इलाकों पर हमला न करे? कोरी ने कहा, "हमने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और नेटो के ज़रिये शुरू से ही ये कहा है रूस को नागरिक ठिकानों और आधारभूत ढाँचों को निशाना नहीं बनाना चाहिए. रूस को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए."

आख़िर यूक्रेन ने इतनी जल्दी और इतने भरोसे के साथ इस मिसाइल के रूस से दाग़े जाने की बात क्यों की, क्या इसके पीछे ज़ेलेंस्की की कोई ख़ास रणनीति है? कोरी ने इसके जवाब में कहा, "अभी जाँच जारी है और इस मोड़ पर कुछ नहीं कहा जा सकता.

हम जो कर रहे हैं और कह रहे हैं उसमें पूरी तरह पारदर्शी हैं. वहीं दूसरी ओर रूस लगातार झूठी ख़बरें फैलाता आ रहा है और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बर्ताव कर रहा है."

उधर, पोलैंड उकसावे में आकर कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता. पोलैंड के प्रधानमंत्री मैटिअस्ज़ मोराविएकी ने मंगलवार रात को अपने देश के लोगों से शांति और धैर्य बनाए रखने की अपील की.

पोलैंड की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद उन्होंने कहा, "हादसे की इस घड़ी में मैं लोगों से शांत रहने की गुज़ारिश करता हूँ... हमें संभलकर और सावधानी से कार्रवाई करनी चाहिए."

यूक्रेन पर रूस का हमला

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इमेज कैप्शन, रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर हमले किए और मंगलवार को करीब 90 मिसाइलें दागी थीं

पोलैंड की ज़मीन पर मिसाइल गिरने की ख़बर जैसे ही आई, नेटो के सभी प्रतिनिधियों को ब्रसेल्स में इकट्ठा होने के लिए कहा गया. शुरुआती जाँच में भले ही रूस के मिसाइल दाग़ने की संभावना को नकारा जा रहा है, लेकिन अगर ये रूसी हमले की आशंका पड़ताल में सच साबित हुई तो अभी यूक्रेन की ज़मीन तक सिमटा युद्ध नेटो के हस्तक्षेप के बाद विकराल रूप ले सकता है.

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के रक्षा और सामरिक अध्ययन मामलों के विभाग से जुड़े मैथ्यू ससेक्स कहते हैं, "फ़रवरी में शुरू हुई इस जंग के बाद से लगातार ये डर और आशंका बनी हुई है कि इस टकराव का विस्तार हो सकता है."

ससेक्स का मानना है कि 'परमाणु हथियारों का संभावित इस्तेमाल' हालाँकि अक्सर सुर्खियां बनता है, लेकिन अगर जंग को और भड़काना है तो इरादतन या ग़ैरइरादतन नेटो सदस्यों पर हमला कर ही ऐसा किया जा सकता है.

अगर इस जंग में नेटो देश कूदे तो ज़ाहिर तौर पर रूस में प्रौपेगेंडा फैलाने वालों को अपनी बात साबित करने का मौका मिल जाएगा कि 'हम तो महीनों से ऐसा कर रहे थे' और तब जंग रूस बनाम पश्चिमी यूरोप के बीच हो जाएगी.

ज़ेलेंस्की

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सबक क्या हैं?

बीबीसी के सुरक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर का कहना है कि पोलैंड की ज़मीन पर मिसाइल गिरने की घटना से कई सबक मिले हैं. सबसे बड़ा सबक ये रहा कि जब तक सभी पहलुओं की जाँच पूरी न हो जाए तब तक किसी निर्णायक नतीजे पर नहीं पहुँचा जाना चाहिए. यही वजह है कि पोलैंड और अमेरिका की उनकी 'बेहद संतुलित प्रतिक्रिया' को लेकर चौतरफ़ा तारीफ़ हो रही है.

इसके उलट, यूक्रेन के दावे को अपरिपक्व माना गया और साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि अब तक अलग-थलग नज़र आ रहे रूस को इससे कुछ बढ़त मिली है. इसमें कोई शक़ नहीं कि कोई भी देश जिस पर एक दिन में 90 मिसाइलें दाग़ी गई हों, वो ये 'आसान ग़लती' कर सकता है, लेकिन ये ग़लती यूक्रेन को शर्मसार कर देने वाली साबित हो रही है.

दूसरा सबक ये है कि अगर ये जंग 2023 तक खिंचती है और रूस यूक्रेन के पश्चिम में लंबी दूरी की मिसाइलें दागता रहता है तो ऐसी संभावना है कि भविष्य में फिर 'पोलैंड पर मिसाइल' गिरने जैसी घटना होगी. नेटो को इसके लिए तैयार रहना होगा.

तीसरी बात ये है कि रूस और यूक्रेन की जंग में और ख़तरनाक़ हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है. हथियार ख़तरनाक और मारक होंगे तो इनके निशाना चूकने का जोखिम तो बना ही रहेगा.

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