रूस ने भारत को दी ख़ास तवज्जो, जयशंकर ने पहले ही कर दी थी पुष्टि- प्रेस रिव्यू

एस जयशंकर

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तालिबान ने पिछले साल अगस्त महीने में अफ़ग़ानिस्तान की अमेरिका समर्थित सरकार को बेदख़ल कर कमान अपने हाथों में ले ली थी तब भारत ख़ुद को बिल्कुल अलग-थलग पा रहा था. 

यहाँ तक कि अफ़ग़ानिस्तान को लेकर जितनी अंतरराष्ट्रीय वार्ताएं हो रही थीं, उनमें भी भारत किसी पक्ष के तौर पर आमंत्रित नहीं था. 

रूस की अगुआई वाली अहम वार्ताओं में भी भारत को नहीं बुलाया जा रहा था. लेकिन बुधवार को रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित 'मॉस्को फॉर्मैट कंसल्टेसन्स ऑन अफ़ग़ानिस्तान' में भारत को बुलाया गया.

काबुल की सत्ता पर तालिबान के नियंत्रण के बाद मॉस्को फॉर्मैट की शुरुआत हुई थी. बुधवार मॉस्को फॉर्मैट की बैठक में रूस, चीन, पाकिस्तान, ईरान, कज़ाख़्सतान, ताजिकिस्तान, कीर्गिस्तान, उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और भारत के प्रतिनिधि शामिल हुए. 

इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान-ईरान मामलों के प्रभारी संयुक्त सचिव जेपी सिंह ने किया. 

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, ''बैठक में शामिल देशों ने अफ़ग़ानिस्तान से जुड़े मुद्दों पर बात की. इनमें अफ़ग़ानिस्तान में वर्तमान मानवीय संकट और इससे निपटने के लिए मदद को लेकर भी बात हुई. अफ़ग़ानिस्तान में सरकार को समावेशी बनाने, आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं पर भी सभी पक्षों ने बात की.''

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नहीं पहुँचा तालिबान

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक की घोषणा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अफ़ग़ानिस्तान मामलों के विशेष प्रतिनिधि ज़ामिर कबुलोव ने इस महीने की शुरुआत में की थी. कबुलोव ने कहा था कि इस बैठक में तालिबान से जुड़ी नकारात्मक चीज़ों पर भी बात होगी. 

कबुलोव ने कहा था, ''धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों में बिना कोई दख़ल के हम इस बात पर ध्यान दिलाने की कोशिश करेंगे कि महिलाओं के स्कूल जाने और बाहर काम करने पर पाबंदी नहीं लगाई जाए.'' अख़बार ने लिखा है कि कबुलोव की विशेषज्ञता अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता लाने को लेकर है. 

मॉस्को फॉर्मैट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे जेपी सिंह ने इसी साल जून महीने में काबुल में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गए थे. इस दौरान जेपी सिंह ने तालिबान के बड़े नेताओं से मुलाक़ात की थी. 

जेपी सिंह ने तालिबान की सरकार को मेडिकल सुविधाओं की बड़ी खेप भी सौंपी थी. शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार की बैठक में तालिबान का कोई भी प्रतिनिधि नहीं था. तालिबान ने अभी तक अपने प्रतिनिधि नहीं भेजने का कोई ठोस कारण नहीं बताया है. 

भारत इस बैठक में शामिल होगा, इसकी पुष्टि भारतीय विदेश मंत्री ने आठ नवंबर को मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोफ़ के साथ बैठक के बाद की थी.

पहले मॉस्को फॉर्मैट से नाराज़ था भारत

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जयशंकर ने कहा था, ''यह बहुत अहम है कि दुनिया को अफ़ग़ानिस्तान के हालात भूलने नहीं चाहिए. आज के समय में अफ़ग़ानिस्तान पर जितना ध्यान देना चाहिए, उतना नहीं दिया जा रहा है.'' 

मॉस्को फ़ॉर्मैट के सदस्यों के अलावा क़तर, सऊदी अरब, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात को अतिथि के तौर पर बुलाया गया था. मॉस्को फॉर्मैट में भारत, ईरान और रूस को अलग समूह के तौर पर भी देखा जाता है. तीनों देश अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के आने के बाद से सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. 

मॉस्को फ़ॉर्मैट के तहत पिछले साल 20 अक्टूबर को बैठक हुई थी और इसमें तालिबान के प्रतिनिधियों से बात की गई थी. पिछले साल तालिबान के आने के बाद से कई देशों ने काबुल में अपना राजनयिक मिशन फिर से खोल दिया है लेकिन तालिबान को अभी किसी ने मान्यता नहीं दी है. 

पिछले साल अक्टूबर में मॉस्को फॉर्मैट की हुई बैठक के बाद कहा गया था कि भारत, मॉस्को फॉर्मैट की ओर से जारी बयान से बहुत ख़ुश नहीं है. मॉस्को फॉर्मैट के बयान में कहा गया था कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान एक नई हक़ीक़त है और इस देश से संबंधों में भी इसका भी ध्यान रखना होगा. 

पिछले साल मॉस्को फॉर्मैट की बैठक में अमेरिका ने शामिल होने से इनकार कर दिया था. पिछले साल अक्टूबर में भारत को रूस ने पहली बार इस तरह की बैठक में बुलाया था. इससे पहले रूस ने अफ़ग़ानिस्तान मामले में वार्ता के लिए ट्रॉइक प्लस में भारत को शामिल करने से इनकार कर दिया था.

श्रद्धा के पिता ने कहा- आफ़ताब ने बेटी को मरती माँ से नहीं मिलने नहीं दिया

आफ़ताब का फ्लैट

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हिन्दी अख़बार दैनिक भास्कर ने पहले पन्ने पर श्रद्धा के पिता का बयान छापा है. उन्होंने कहा है कि आफ़ताब ने बेटी को मरती माँ से नहीं मिलने दिया था.

दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, श्रद्धा के हत्यारे आफ़ताब पूनावाला के नार्को टेस्ट के लिए दिल्ली के साकेत कोर्ट ने मंज़ूरी दे दी है.

अब इस पूरे मामले का सच पुलिस उगलवाएगी. पुलिस ने बताया है कि आफ़ताब ग़लत जानकारी दे रहा है और जाँच को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है. इसीलिए साकेत कोर्ट से उसके नार्को टेस्ट की मांग की थी. दैनिक भास्कर के अनुसार, श्रद्धा के पिता ने आफ़ताब के लिए फांसी की मांग करते हुए कहा कि जब श्रद्धा की माँ की तबीयत ख़राब थी, तब मैंने आफ़ताब से बात की थी लेकिन उसके घरवालों ने एक बेटी को उसकी मरती माँ से नहीं मिलने दिया. पुलिस बुधवार को आफ़ताब को लेकर उसके फ़्लैट पर गई थी. फ्लैट में फ़्रिज से कोई सुराग नहीं मिला लेकिन किचन में ख़ून के धब्बे मिले हैं. इसकी जांच की जा रही है.

पुलिस ने कहा कि श्रद्धा के पिता के डीएनए सैंपल लिए गए हैं. अब उनसे इन ख़ून के धब्बों और जंगल में शव के टुकड़ों का डीएनए मिलान किया जाएगा. लेकिन इसमें एक हफ़्ते का समय लग सकता है.

पुलिस ने श्रद्धा की हत्या में इस्तेमाल की गई आरी, श्रद्धा का मोबाइल और श्रद्धा के शव के कुछ टुकड़े नहीं मिले हैं. भास्कर से श्रद्धा के पिता ने कहा, ''मैं नहीं चाहता था कि मेरी बेटी किसी मुसलमान के साथ रहे या उससे शादी कर ले. मैंने आफ़ताब को लेकर शुरू में ही मना किया था लेकिन वो मानी नहीं. उसने बहुत ग़लत किया. मैं चाहता हूं कि जितना बुरा उसने किया, उतनी ही बुरी उसे सज़ा मिले.''

''श्रद्धा के ग़ायब होने पर मैंने आफ़ताब से बात की थी लेकिन उसने बताया कि वह अपनी लाइफ़ ख़ुद ही मैनेज कर लेगी. आजकल बच्चे बात नहीं सुनते हैं. मेरी बात नहीं सुनी होती तो ये सब नहीं होता.''

जल्दीबाज़ी में गुणवत्ता से समझौता नहीं

ऋषि सुनक

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अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने इंडोनेशिया में जी-20 की बैठक से अलग ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाक़ात की ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी बात की. दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड डील दिवाली से पहले होनी थी लेकिन ब्रिटेन में राजनीतिक अस्थिरता के कारण यह लटकती गई. ऋषि सुनक ने भारत से ट्रेड डील पर कहा है कि वह जल्दीबाज़ी में गुणवत्ता से समझौता नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि वह ट्रेड डील आराम से करना चाहते हैं. ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने ट्रेड डील को लेकर अपनी प्रतिबद्धता भी ज़ाहिर की.

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