बांग्लादेश में झिनाईदह के सांसद अनवारुल अज़ीम कोलकाता से लापता कैसे हुए?

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भारतीय अधिकारियों ने बांग्लादेश में झिनाईदह के सांसद अनवारुल अजीम का पता लगाने के लिए उनकी मोबाइल के लोकेशन को ट्रैक किया है.
इससे उनको पता चला है कि कोलकाता में अपने मित्र के घर से निकलने के बाद एक बार उनकी मोबाइल की लोकेशन महानगर के न्यू मार्केट इलाके में मिली थी.
इसके बाद 17 मई को उनका फोन बिहार के किसी इलाके में कुछ देर के लिए ऑन हुआ था.
कोलकाता स्थिति बांग्लादेश के उच्चायोग को भारतीय अधिकारियों से इसकी जानकारी मिली है.
उच्चायोग के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर इसकी जानकारी दी है.
अज़ीम कोलकाता के उत्तर में स्थित बरानगर के उपनगरीय इलाके में अपने एक मित्र गोपाल विश्वास के घर ठहरे थे.
गोपाल ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि पुलिस की ओर से उनको सूचना मिली है कि बीती 13 मई को अजीम उनके घर से निकलने के बाद किराए की जिस कार में सवार हुए थे उसके ड्राइवर का पता चल गया है.
उनका कहना था, "मैंने पुलिस में अजीम के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पुलिस ने उस कार का पता लगा लिया है और उसके ड्राइवर से पूछताछ की जा रही है."
अजीम ने कहा, "ड्राइवर ने पुलिस को बताया है कि सांसद के साथ एक बांग्लादेशी नागरिक भी था. 13 मई को ड्राइवर ने उन दोनों को कोलकाता से सटे न्यू टाउन इलाके में छोड़ दिया था."
लापता सांसद के बारे में अब तक इससे ज्यादा कोई जानकारी नहीं मिली है.
बांग्लादेश के कोलकाता स्थित उच्चायोग की ओर से प्रेस सचिव रंजन सेन ने औपचारिक तौर पर बीबीबी बांग्ला को बताया, "हमें शनिवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की ओर से सांसद के लापता होने की सूचना दी गई थी. उसके बाद हमने भारतीय विदेश मंत्रालय से संपर्क कर इस मामले की जानकारी दी थी."
रंजन सेन ने कहा, "हमें बताया गया है कि वो इस मामले की जांच कर रहे हैं."
यह भी पता चला है कि बांग्लादेश के सांसद को आखिरी बार कोलकाता में ही देखा गया था. इसलिए उच्चायोग के अधिकारी कोलकाता पुलिस से भी नियमित संपर्क बनाए हुए हैं.
डॉक्टर को दिखाने निकले थे?

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कोलकाता के सिंथी इलाके के रहने वाले कारोबारी गोपाल विश्वास बताते हैं कि अनवारुल अजीम के साथ बीते दो दशकों से उनके पारिवारिक संबंध हैं.
उन्होंने बीबीसी बांग्ला को बताया, "उन्होंने यहां आने के बाद मुझे बताया था कि वो किसी न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाना चाहते हैं. उन्होंने मुझे किसी बढ़िया न्यूरोलॉजिस्ट के बारे में भी जानकारी मांगी थी."
गोपाल विश्वास कहते हैं, "मैं ऐसे किसी डॉक्टर को नहीं जानता था. इसलिए मैंने उनको सलाह दी कि वो साल्टलेक स्थित अपोलो अस्पताल में अपना इलाज करा सकते हैं."
"हमने सुबह एक ही साथ नाश्ता किया था. मैंने उनसे यह भी कहा था कि आज मेरी कार उपलब्ध नहीं है, इसलिए वो किसी कार का इंतजाम कर लें. उसके बाद मैं घर की पहली मंजिल पर बने अपने दफ्तर में चला गया."
विश्वास का कहना था कि उसके बाद वो अपने काम में व्यस्त हो गए. अजीम ने दोपहर को घर से निकलते समय मुझसे कहा कि वो शाम तक घर लौट आएंगे, लेकिन देर शाम तक उनका पता नहीं चलने पर विश्वास ने अपने सीसीटीवी कैमरे का फुटेज देखा. उससे पता चला कि अजीम दोपहर को 1.41 बजे घर से निकले थे.
गोपाल विश्वास ने बरानगर थाने में उनके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज करवाई है.
पुलिस की मिसिंग डायरी में लिखा है कि अनवारूल अजीम उनके घर से कुछ दूर स्थित विधान पार्क इलाके से किराए की कार में सवार हुए थे.
उन्होंने पुलिस को बताया है कि एक प्रत्यक्षदर्शी ने अजीम को कार में सवार होते देखा था.
अजीम को शाम को अपने मित्र के घर लौटना था, लेकिन वो नहीं लौटे.
'दिल्ली जा रहा हूं...'

अजीम ने व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा था, "मैं एक खास काम से दिल्ली जा रहा हूं और वहां पहुंचने के बाद फोन करूंगा. तुमको फोन करने की जरूरत नहीं है."
गोपाल विश्वास कोलकाता में आभूषण के निर्यात के कारोबार से जुड़े हैं.
विश्वास बताते हैं, "बांग्लादेश में बीएनपी सरकार के सत्ता में रहने के दौरान वो (अजीम) भारत में रहते थे. हमारा घर माझदिया में है. अनवारुल वहां सुभाष अग्रवाल के घर में रहते थे. वहीं उनसे मेरा परिचय हुआ जो आगे चलकर मित्रता में बदल गया. अब यह पारिवारिक संबंध में तब्दील हो गया है."
इसी वजह से इलाज कराने के लिए यहां आने पर अजीम अपने मित्र के घर ठहरे थे.
उस दिन गोपाल के घर से निकलने के बाद अजीम जिस कार में सवार होकर बाहर गए थे, पुलिस उसके ड्राइवर से पूछताछ कर रही है.
पूछताछ के बाद पुलिस ने ड्राइवर के हवाले से गोपाल को बताया है कि उसने अजीम के साथ एक अन्य बांग्लादेशी नागरिक को भी न्यू टाउन इलाके में छोड़ा था.
इसके बाद 15 मई को गोपाल विश्वास को अजीम का एक और व्हाट्सएप मैसेज मिला कि वो दिल्ली पहुंच गए हैं और उनके साथ कुछ वीआईपी हैं. इसलिए उनको फोन नहीं किया जाए.
इसके दो दिन बाद अजीम की बेटी ने गोपाल विश्वास को फ़ोन पर बताया कि हरसंभव प्रयास के बावजूद पिता के साथ उनका कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है.
विश्वास बताते हैं कि इस बात की सूचना मिलने के बाद मैंने कोलकाता में अज़ीम के तमाम करीबियों को इसकी जानकारी दे दी. उन लोगों ने भी अजीम का पता लगाना शुरू किया, लेकिन अजीम से फोन पर संपर्क ही नहीं हो पा रहा था.
उसके बाद अगले दिन यानी 18 मई को गोपाल थाने में गए.
गोपाल बताते हैं, "थाने में मुझे पूरे दिन बिठा कर रखा गया. पुलिस की एक टीम मेरे घर जाकर वहां सीसीटीवी का फुटेज ले आई. उस फुटेज की जांच के बाद शिकायत दर्ज की गई."
उनका कहना है, "पुलिस को किराए की उस कार का नंबर भी मिल गया. उन्होंने ड्राइवर से बात की हैं. पुलिस निश्चित तौर पर इस मामले की जांच कर रही है. वह मुझे तो सब कुछ नहीं बताएगी."
पिता की तलाश में भारत में सांसद की बेटी

बांग्लादेश उच्चायोग को भारतीय विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, 17 मई को अज़ीम का मोबाइल कुछ देर के लिए बिहार में सक्रिय था.
यह भी पता चला है कि मोबाइल सेट से सिम कार्ड निकाल देने के कारण उसकी सही लोकेशन का पता लगाना संभव नहीं हो पा रहा है.
दूसरी तरफ ढाका में खुफिया विभाग (डीबी) के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त हारून रशीद ने पत्रकारों को बताया है, "अजीम के पास दो बांग्लादेशी मोबाइल नंबर के अलावा एक भारतीय कंपनी का सिम भी है. हमने भारतीय पुलिस के सहयोग से उनके भारतीय नंबर की लोकेशन ट्रैक कर देखा कि वह मुजफ्फराबाद यानी बिहार की ओर है."
लेकिन बिहार में मुजफ्फराबाद नामक कोई जगह नहीं है. मुजफ्फराबाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी है. बिहार में इससे मिलता-जुलता नाम है मुजफ्फरपुर.
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त का कहना था, "हम इस मामले का पता लगा रहे हैं. इस सिलसिले में बांग्लादेश में रहने वाले भारतीयों के अलावा भारत के पुलिस अधिकारियों के साथ भी बातचीत की गई है. अजीम का परिवार हमारे साथ नियमित संपर्क में है. उनकी बेटी भी हमारे पास आई थी."
सांसद की बेटी मुमतरीन फ़िरदौस डोरिन ने पुलिस में पिता के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि पिता का पता लगाने के लिए वो खुद भारत जा रही हैं.
डोरिन का कहना था, "हम अक्सर भारत जाते रहते हैं. यहां संसद बंद हो जाने के कारण वो दो-तीन दिन के लिए भारत गए थे. इसी तरह नियमित रूप से वो वहां जाते रहते हैं. उनके कान में दिक्कत है. एक कान पूरी तरह बंद हो गया है यानी उससे कुछ सुनाई नहीं देता. मेरे पिता उसी का इलाज कराने वहां गए थे."
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