भारत में क़ानून के रखवालों के लिए एक ख़बर!
दुनिया के सबसे शक्तिशाली आदमी से, जो मेहमान भी था, सड़क पर गाड़ी चलाने का टैक्स माँगा गया है.
हाल में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा लंदन के दौरे पर थे. लंदन के मेयर बोरिस जॉनसन ने बराक ओबामा के काफ़िले में शामिल सभी गाड़ियों को 'कन्जेशन चार्ज'भरने का नोटिस भेज दिया है.
सेंट्रल लंदन की संकरी सड़कों पर सोमवार से शुक्रवार के बीच कार चलाने पर प्रति दिन 10 पाउंड यानी लगभग 700 रुपए भरने पड़ते हैं. इस व्यवस्था का उद्देश्य मध्य लंदन को ट्रैफ़िक जैम से मु्क्ति दिलाना है.
मामला ज़रा पेचीदा है, अंतरराष्ट्रीय प्रावधानों के मुताबिक़ कूटनयिक और विदेशी मेहमान दूसरे देशों में स्थानीय टैक्सों से मुक्त होते हैं लेकिन विवाद इसी बात पर है कि कन्जेशन चार्ज टैक्स है या नहीं.
यह मुद्दा 10 पाउंड वसूलने का नहीं है, लंदन के मेयर की दलील है कि जब ब्रिटेन के कूटनयिक विदेशी पुलों और सड़कों पर टोल टैक्स देते हैं तो लंदन में विदेशी कूटनयिक कन्जेशन चार्ज क्यों न भऱें.
लंदन स्थित दस से अधिक दूतावासों के ऊपर स्थानीय प्रशासन का कन्जेशन चार्ज का पाँच करोड़ पाउंड बक़ाया है, बक़ाया चुकता करने से इनकार करने वालों में अमरीकी, स्पेनी, रूसी, जापानी दूतावासों के अलावा भारतीय उच्चायोग भी है.
लंदन के मेयर ने बराक ओबामा को नोटिस भेजकर दूतावासों को साफ़ संदेश देने की कोशिश की है कि हर किसी को नियमों का पालन करना चाहिए, भले ही वह अमरीका का राष्ट्रपति ही क्यों न हो.
मेयर जॉनसन की कन्जेशन चार्ज वसूलने की ज़िद सही हो या नहीं, उनका तरीक़ा शायद सही है.
अगर किसी भी व्यवस्था या क़ानून को लागू कराना है तो उसे शीर्ष पर सबसे पाबंदी से लागू किया जाना चाहिए ताकि नीचे वालों के लिए आनाकानी की कोई गुंजाइश न हो.
ज़रा सोचिए, अगर अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने काफ़िले का कन्जेशन चार्ज भर दिया तो लंदन में अमरीकी राजदूत और दूसरे दूतावासों पर बक़ाया रक़म चुकता करने का नैतिक दबाव कितना बढ़ जाएगा.
पता नहीं, भारत में क़ानून के रखवालों तक यह ख़बर पहुँची है या नहीं.





