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ब्रिटेन की राजसी शादी

राजेश प्रियदर्शीराजेश प्रियदर्शी|रविवार, 01 मई 2011, 11:05 IST

हो गई शाही शादी जिसकी तैयारियाँ महीनों से चल रही थीं.

महारानी एलिज़ाबेथ के बड़े पोते की इस शादी को जितना पास से पत्रकार देख सकते थे, उतने पास से देखने का मौक़ा मुझे भी मिला.

कुछ छोटी-छोटी बातें जो पूरब और पश्चिम को एक-दूसरे से अलग करती हैं और कई बार जोड़ती भी हैं, इस शादी के दौरान ज़हन में आईं.

पूरब में शादी का मतलब ही है दावत यानी ढेर सारा और तरह-तरह का खाना, यहाँ खाने की कोई चर्चा नहीं थी, शादी में 1900 लोग बतौर मेहमान न्यौते गए लेकिन दोपहर के खाने के लिए सिर्फ़ 600 लोगों को बकिंघम पैलेस बुलाया गया.

बाक़ी के 1300 लोगों को पौने बारह बजे वेस्टमिंस्टर ऐबी से ही चलता कर दिया गया, शायद उन्होंने एक गिलास पानी भी नहीं पिया होगा, हमारे जैसे लोगों की तो ख़ैर बात ही छोड़िए.

पूरब में अच्छी से अच्छी शादी में थोड़ी बहुत अफ़रा-तफ़री और लेट-लतीफ़ी ज़रूर होती है लेकिन इस शादी में सब कुछ घड़ी की टिकटिक के साथ चल रहा था, लगभग दो घंटे में सब संपन्न हो गया.

कहीं कोई भूल नहीं, कोई ग़लती नहीं, चर्च में चलने के दो रिहर्सल दुल्हन पहले ही कर चुकी थी.

किसी के हाथ से फिसलकर भी कोई चीज़ गिरी नहीं, शादी कराने वाली पादरी की ज़बान भी नहीं लड़खड़ाई, सब कुछ इतना व्यवस्थित था कि अवास्तविक लग रहा था.

एक और ख़ास बात ये थी कि यह सही मायने में पब्लिक इवेंट था, आम जनता सड़क किनारे पत्रकारों से आगे खड़ी थी, पत्रकार भले ही थोड़े ऊँचे प्लेटफ़ॉर्म पर हों लेकिन थे आम जनता के पीछे.

सुरक्षा तो थी लेकिन बेवजह रोक-टोक नहीं थी लोग खा-पी रहे थे, बकिंघम पैलेस के बड़े गेट के बिल्कुल पास खड़े होकर लोग बीयर पीकर नाच रहे थे.

दूल्हे, उसके भाई और पिता को फौजी पोशाक में देखना भी थोड़ा विचित्र लग रहा था, ऐसा लगा कि प्रिंस विलियम शादी करने के नहीं बल्कि जंग लड़ने जा रहे हों लेकिन फ़ौरन ख़याल आया कि हमारे यहाँ भी तो कई शादियों में दूल्हा तलवार लेकर घोड़ी पर सवार होता है.

बहरहाल, इस शादी को देखने और भारत की शादियों को याद करने के बाद यही लगा कि अच्छा-बुरा कोई नहीं, ईस्ट इज़ ईस्ट, वेस्ट इज़ वेस्ट.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 12:11 IST, 01 मई 2011 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    राजेश जी, आपने और बीबीसी ने अपना धर्म निभा दिया है. हमें इस शादी से क्या मतलब. ये वो देश है जिसने पैसे के अभाव के कारण बीबीसी की हिंदी सेवा को बंद कर दिया.. जब पैसा नहीं था तो शादी में पैसा बहाना क्या ज़रुरी था.

  • 2. 12:38 IST, 01 मई 2011 shivan shukla:

    ये दिखाता है कि वो क्वालिटी में हमसे कितने बेहतर हैं. हम सिर्फ दिखावा करने में यकीन करते हैं. हमारे में चीज़ों को परफेक्टली करने की कोई इच्छा नहीं होत है.

  • 3. 14:12 IST, 01 मई 2011 Amitabh Chowdhary:

    क्वालिटी में यह लोग इसलिये बेहतर हैं क्योंकि यहाँ पर व्यवस्था चलाने वालो की नीयत जिंदा है. शादियाँ हमारे यहाँ भी कई गुना बेहतेर हो सकती है सिर्फ़ व्यक्तिगत प्रयासो से भी. पर भ्रष्‍ट अधिकारी और नेता होने नही देते. फिर जनता भी आदी हो गयी है दूसरे दर्जे की जिंदगी की. सब तात्कालिक लाभ की सोचते हैं. दूर दृटि का अभाव हो गया है. ऐसी शादी के लिए तो हमारे लोगो को सरकारी धन की आवश्यकता की ज़रूरत नही है लोग स्वयं सेवा एवं रिश्ते दारी में ही कई गुना बहतेर अंजाम दे सकते है. पर ना तो हम सिविक सेन्स रखते हैं और नही अपने किलो और मंदिरो का ध्यान रखते है.
    एक बहुत दुखी भारतीय होने के नाते मैं चाहता हूँ की मेरे बच्चे भारत इसलिए लौटे ताकि वहाँ भ्रष्टाचार ना हो भले ही दो रोटी कम ही सही.

  • 4. 15:27 IST, 01 मई 2011 Rajeev:

    बकवास शादी....

    एक तरफ लीबिया को तबाह करने में लगे पडे हैं और दूसरी तरफ दुनिया को अपनी शान शौकत दिखाना चाहते हैं ।

  • 5. 23:19 IST, 01 मई 2011 braj kishore singh,hajipur,bihar:

    अंग्रेजों ने भारत को जितना लूटा है किसी अन्य हमलावर ने उतना नहीं लूटा. उनकी भव्यता में कहीं-न-कहीं हमारे देश का भी योगदान है. कम-से-कम इस नाते तो उन्हें आपको भरपेट भोजन करवाना ही चाहिए था.

  • 6. 01:01 IST, 02 मई 2011 SK_UK:

    राजकुमार विलियम सेना में काम कर रहे हैं. लेकिन हमारे राजकुमार राहुल देश के लिए क्या कर रहे हैं?

  • 7. 01:03 IST, 02 मई 2011 rajneesh tripathi:

    कम से कम पानी तो पिलाना ही चाहिए था.

  • 8. 01:29 IST, 02 मई 2011 Rakesh Kumar Verma, Mount Abu:

    हमारे यहाँ शादियाँ दो दिलों का मेल होती हैं, दिखावा नहीं कि मेहमानों को बुला लिया पर खिलाने का दम नहीं. हमारे यहाँ कितना भी ग़रीब हो, खाना खिलाए बिना तो नहीं भेजता. वैसे हम आम भारतीय को कोई मतलब नहीं पर मीडिया द्वारा ज़बरदस्ती, दिखाया, सुनाया जा रहा है.

  • 9. 07:26 IST, 02 मई 2011 Dr.Lal Ratnakar-Ghaziabad/Jaunpur:

    राजेश जी यह आम शादी नहीं थी इंग्लॅण्ड के शाही परिवार का शादी समारोह था जिसकी दुनियाभर में चर्चा हुयी है, परमपराओं का निर्वहन या शक्ति का प्रदर्शन जैसा नहीं तो फिर क्या. हिंदुस्तान की फ़िल्मी शादियों के अलावा कई यहाँ की शाही शादियों में जाने का मौका मिला है. जिसमे दकियानुशी परम्पराओं को छोड़ एक नई रित गढ़ी गयी थी या है पर
    ब्रिटेन की इस राजसी शादी का जितना प्रचार प्रसार हुआ उसका मकसद क्या है. मुझे याद आ रहा है 'हिंदुजा' फॅमिली की भी एक शादी बहुत चर्चित हुयी थी, कब तक आम आदमी को ये शादियाँ चिढ़ाती रहेंगी.

  • 10. 12:24 IST, 02 मई 2011 Yasar Imam:

    अनुशासन ही किसी देश को महान बनाता है. यह पूरा समारोह बहुत ही अनुशासित और सुसंगठित था. इससे ही पता चलता है कि उन्होंने कैसे दो सौ साल तक 70 प्रतिशत दुनिया पर राज किया होगा.

  • 11. 12:26 IST, 02 मई 2011 BHEEM dildar nagar/ mumbai:

    प्रियवर राजेश जी, आपका लेखन साफ़, शुद्ध गंगा जल की तरह, कोई मिर्च-मसाला नहीं, 100 प्रतिशत सकारात्मक सोच. मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं. फ़िलहाल आपका अपना नज़रिया, किंतु भारत की विवाह प्रथा, दुनिया में बेजोड़ है. कोई तुलना लायक़ चीज़ नहीं. भावनात्मक स्तर पर, दूल्हा विष्णु रूप, दुल्हन लक्ष्मी रूप होती है. आपको धन्यवाद, साधुवाद.

  • 12. 13:02 IST, 02 मई 2011 Sanjay Verma:

    यह शादी दिखाती है कि लोग चाहे कितना ढकोसला कर लें, लेकिन वे आज भी राजाओं के ग़ुलाम हैं और चापलूसी करना नहीं छोड़ पाए हैं. फिर वह चाहे भारत हो या ब्रिटेन.

  • 13. 13:20 IST, 02 मई 2011 Dinesh Pal:

    पश्चिम हमेशा सर्वश्रेष्ठ रहेगा.

  • 14. 14:38 IST, 02 मई 2011 कुमार भवेश चंद्र , लखनऊ:

    शाही शादी की बहुत सारे व्यवहार अलग और अनोखे थे पर एक बात भारतीय परंपरा के बेहद करीब थी, वह था दुलहन के पिता का अपने दामाद विलियम के हाथ में अपनी बेटी का हाथ सौंपना और दूसरा पादरी का दूल्हा और दुलहन से हर हाल में एक दूसरे का साथ निभाने और प्यार करने का वचन दिलाना...

  • 15. 15:49 IST, 02 मई 2011 arun kalwani:

    शाही दम्पत्ति शाही स्टाइल में शादी करेंगे. शाही परिवार एक वास्तविकता है और यह सैकड़ों साल से ब्रिटेन और भारत में क़ायम है. केट और विलियम का विवाह शाही तरीक़े से हुआ क्योंकि वह शाही परिवार है. वह परंपरा का पालन ही कर रहे थे.

  • 16. 21:17 IST, 02 मई 2011 ankit:

    राजेश जी,मेने तो इस शाही शादी को बहेतरीन शादी की मूवी की तरह देखा.प्रिंस विलियम और केथरीन अपने अपने पोशाक में अच्छे लग रहे थे.में इतिहास से अवगत हूँ,पर वो भारत और ब्रिटेन का इतिहास था,आज कुछ और है.हकीक़त में इस शाही शादी ने पुरे यूनाइटेड किंगडम को एकजुट बना के रखा है,और छोटे छोटे राज्यों में बदलने से रोका है.लेट-लतीफ़ी हमारे यंहा आम है,एक बार गिल साहेब ने कहा था राष्ट्रमंडल खेल का आयोजन बेटी की शादी की तरह है....!! तो इतना इशारा काफी है..!

  • 17. 13:13 IST, 04 मई 2011 TAHIR KHAN,PUTTHA(MEERUT).:

    जिस शादी के लिए काफी दिनों से कहानी चल रही थी वो शादी भी आख़िरकार ख़त्म हो गई.इस शादी में जो अनुशासन देखा वो सच मे तारीफ़ के क़ाबिल है.भारत में भी थोड़ा अनुशासन अपनाया जाए तो कुछ भी काम मुशिकल नहीं होगा.

  • 18. 12:10 IST, 05 मई 2011 Neil:

    राजेशजी आपने इस शाही शादी को देखा लगता है आपका नसीब ही बदल गया.आपका जीवन धन्य हो गया.लेकिन अगर ब्रिटेन एक लोकतांत्रिक देश है तो वह राजा-रानी कैसे हो सकते है जबकि नेपाल जैसे छोटे देश ने बादशाहत को त्याग दिया है.

  • 19. 19:11 IST, 06 मई 2011 RICHA SINGH:

    कैट की शादी हो या फिर नयी पीढ़ी की बात हो. भारत में मुह दिखाई की रस्म होती है. वही समझ लेना चाहिए. इन सभी को शुभकामनाएं.

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