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संकट सिर्फ़ भारतीय क्रिकेट पर नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई हमले के बाद क्रिकेट और क्रिकेट की वित्तीय स्थिति के बारे में बातें करना थोड़ा असंवेदनशील ज़रूर लग सकता है लेकिन सच ये भी है कि ज़िंदगी फिर भी चलती रहती है. कई लोगों के लिए खेल का मतलब होता है विभिन्न राष्ट्रीयता, नस्ल और धर्म के लोगों की एक-दूसरे से भिड़ंत. लेकिन इस जंग में जीतने और हारने वाले बाद में एक साथ ड्रिंक भी लेते हैं. क्रिकेट की बात करें और ख़ासकर भारतीय क्रिकेट की बात करें तो इस खेल के कारण खिलाड़ियों के साथ-साथ कई देशों के क्रिकेट बोर्ड दिनों-दिन धनी होते जा रहे हैं. मुंबई की घटना के बावजूद दुनिया की नज़रों में पाकिस्तान की तुलना में भारत अभी उतना असुरक्षित नहीं है. कई देश पाकिस्तान का दौरा इसलिए नहीं करते क्योंकि वहाँ उन्हें जान का ख़तरा लगता है. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज़ ने पाकिस्तान का अपना दौरा रद्द कर दिया है और अब भारतीय टीम भी वहाँ जाने से कतरा रही है. 'अछूत नहीं भारत' भारत में कई धमाकों के बावजूद खिलाड़ी और बोर्ड भारत को अछूत नहीं मान रहे थे. इस साल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान बंगलौर और जयपुर में धमाके हुए, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका के खिलाड़ी मैच खेलने से नहीं चूके. दरअसल अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भारत को ऐसा देश नहीं मानते थे, जहाँ आतंकवादी मनमर्ज़ी से बिना डरे हमले कर सकते हैं. उस समय आईपीएल छोड़कर जाने का मतलब था आकर्षक पैकेज का नुक़सान. खिलाड़ियों के साहसिक फ़ैसले को घृणा और बँटवारे की राजनीति पर खेल की जीत के रूप में देखा गया. उनके फ़ैसले को पैसे का लालच नहीं समझा गया. मुंबई की घटना के बाद इंग्लैंड की टीम ने जब वनडे सिरीज़ को छोड़कर जाने का फ़ैसला किया, तो किसी ने इस पर आपत्ति नहीं उठाई. और तो और भारतीय खिलाड़ी भी बहुत ज़्यादा मानसिक सदमे में थे. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने तुरंत ही वनडे सिरीज़ के बाक़ी मैचों को रद्द कर दिया लेकिन टेस्ट मैच कराने के लिए इंग्लिश बोर्ड को मना भी लिया. इंग्लिश बोर्ड के अधिकारियों के लिए उन खिलाड़ियों को मनाना मुश्किल हो सकता है जो टेस्ट सिरीज़ के लिए भारत आने में हिचकिचा रहे हैं लेकिन ये असंभव स्थिति भी नहीं है. दांव पर बहुत कुछ बहुत कुछ दांव पर है, सिर्फ़ इंग्लैंड या भारत के लिए नहीं बल्कि क्रिकेट को बचाए रखने के लिए. क्योंकि अगर भारत में अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं कराएँ जाएँगे तो क्रिकेट के लिए यह स्थिति अच्छी नहीं होगी.
पाकिस्तान से अलग भारत क्रिकेट का केंद्र है, लोकप्रियता और वित्तीय स्थिति दोनों मामलों में. अगर आज क्रिकेट से आने वाला राजस्व कई गुना बढ़ा है और खिलाड़ी भी ख़ूब कमा रहे हैं, तो इसका बहुत कुछ श्रेय भारत और इसके बढ़ते क़द को जाता है. चैम्पियंस लीग ट्वेन्टी 20 के स्थगित होने से ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका की प्रांतीय टीमों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. दोनों देशों की प्रांतीय टीमें और बोर्ड चैम्पियंस लीग से बहुत बड़ी कमाई की उम्मीद लगाए बैठे थे. अगर आतंकवादी हमलों के डर से क्रिकेट की दुनिया में भारत की प्राथमिकता कम हुई और आर्थिक मंदी के कारण खेल में निवेश कम हुआ, क्रिकेट के अस्तित्व पर गहरा संकट पैदा हो जाएगा. इससे क्रिकेट में आने वाला राजस्व के नुक़सान का भी ख़तरा बढ़ जाएगा. इन्हीं कारणों से विदेशी टीमें भारत आने से इनकार करने से पहले दस बार सोचेंगी. भारत अभी पाकिस्तान की तरह नहीं हुआ है. फ़िलहाल तो ऐसा कह ही सकते हैं. (लेखक हिंदुस्तान टाइम्स स्पोर्ट्स के सलाहकार हैं) |
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