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'पेस, भूपति और सानिया से जुड़ना सौभाग्य' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के एसाम उल हक़ क़ुरैशी ने विंबलडन में अपने सफ़र की शानदार शुरुआत की है. पुरुष वर्ग में शानदार खेल दिखाकर क्वालीफ़ाई करने वाले क़ुरैशी ने पहले दौर में ली चाइल्डस को सीधे सेटों में मात दी. बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में क़ुरैशी ने बताया कि उन्हें सानिया, भूपति और पेस का पूरा समर्थन मिलता है और सभी उन्हें हमेशा आगे बढ़ाते हैं. पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश. अपने पहले दौर के मैच के बारे में बताइए मैं जीत गया. इसलिए मैच तो मेरे लिए काफ़ी अच्छा रहा. सबसे अच्छी बात ये रही कि अपने पहले विंबलडन में मैं दबाव में नहीं आया. हमेशा से मेरे प्रतिद्वंद्वी ही दबाव में थे. मैंने आक्रमक खेल भी खेला. तीसरे सेट में मुझे लग रहा था कि मैं जीत जाऊँगा और हुआ भी ऐसा ही. मैंने संयम बनाए रखा और आख़िरकार जीत मेरी हुई. पहले दो सेट में आपने शानदार खेल दिखाया. लेकिन तीसरे सेट में आप बैक फ़ुट पर क्यों आ गए? बैक फ़ुट तो मैं नहीं कहूँगा. पहली गेम से आख़िरी गेम तक मुझे उसकी सर्विस पर मौक़े तो मिल ही रहे थे. मुझे लगता है कि मैंने आक्रमक खेल खेला. लेकिन ली चाइल्डस ने भी वापसी करने की अच्छी कोशिश की. तीसरे सेट में थोड़ा दुर्भाग्यशाली भी रहा. लेकिन आख़िरकार मुझे जीत मिली. ली चाइल्स ब्रिटेन के हैं और बड़ी संख्या में उनके समर्थक मौजूद थे. ऐसे में आपको कोई परेशानी तो नहीं आई. देखिए, मैं डेविस कप खेल चुका हूँ और मुझे ऐसे माहौल में खेलने का काफ़ी अनुभव है. लेकिन मुझे ख़ुशी है कि मेरे मैच में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी दर्शक भी आए और उन्होंने मेरा हौसला भी बढ़ाया. मेरे परिवार के लोग और दोस्त भी थे, जिससे मुझे काफ़ी मदद मिली. अगला मैच साफ़िन से है, इसके लिए कोई ख़ास तैयारी. अभी तो मैं अपनी पहली जीत की ख़ुशियाँ मना रहा हूँ. लेकिन हाँ, सोने से पहले ज़रूर सोचूँगा कि कैसे साफ़िन का सामना करना है. साफ़िन वर्ल्ड क्लास के प्लेयर हैं. पहले नंबर वन भी रह चुके हैं. मेरे लिए अनुभव के हिसाब से काफ़ी अच्छा रहेगा कि मैं उनके ख़िलाफ़ खेलूँ. विंबलडन खेलना मेरा सपना रहा है इसलिए मैं इसके एक-एक पल का मज़ा लेना चाहता हूँ. ख़ुशियाँ कैसे मनाएँगे थोड़ा आराम करूँगा. अपने परिवार के साथ समय बिताऊँगा. वैसे तो ये तो ऐसी ख़ुशी है, जिसे शब्दों में बयाँ नहीं कर सकते. मुझे संतुष्टि भी है. मेरे माँ-बाप ने हमेशा मेरा समर्थन किया है. भारतीय उप महाद्वीप के खिलाड़ियों सानिया मिर्ज़ा, लिएंडर पेस और महेश भूपति के साथ अब आपका नाम भी जुड़ गया है. क्या कहेंगे आप? अल्लाह करे, मेरा नाम उनके साथ जुड़े. ये मेरा सौभाग्य होगा. सानिया ने इतनी उपलब्धि हासिल की है. यही हाल भूपति और पेस का भी है. ये सभी मुझसे हमेशा कहते थे कि भारत से जब खिलाड़ी ऐसा कर सकते हैं, तो तुम क्यों नहीं कर सकते हो. ये तीनों खिलाड़ी मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं. सानिया तो मुझे हमेशा शुभकामना देती हैं. उनकी माँ ने तो मेरा मैच भी देखा. ये बहुत अच्छा है कि आप किसी को इतना सपोर्ट करते हैं. आपका आदर्श खिलाड़ी कौन है? रोजर फ़ेडरर. मैंने दो-तीन बार उन्हें खेलते देखा भी है. इसमें कोई शक नहीं कि वे दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी हैं. पहले मेरे आदर्श स्टीफ़ेन एडबर्ग होते थे. लेकिन अब फ़ेडरर हैं. मुझे फ़ेडरर का आत्मविश्वास बहुत भाता है. उन्हें अपने आप पर बहुत भरोसा होता है. मैं भी अब अपने पर ज़्यादा भरोसा करने लगा हूँ. विंबलडन के आगे क्या? इस साल मेरा काफ़ी अच्छा रहा है. मुझे कई खिलाड़ियों का समर्थन भी मिलता रहता है. मुझे उम्मीद है कि इस साल मैं टॉप 100 खिलाड़ियों में ज़रूर पहुँच जाऊँगा. |
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