कॉमनवेल्थ खेल 2022: महिला हॉकी में भारत नहीं भेद सका हिंच की दीवार, हार ने बढ़ा दी मुश्किल

भारत और इंग्लैंड की खिलाड़ी बॉल को हिट करने की कोशिश करती हुई

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    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स की महिला हॉकी के पूल ए में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हमले किए, पेनल्टी कॉर्नर प्राप्त किए लेकिन इंग्लैंड की गोलकीपर मेडलिन हिंच से पार पाना संभव नहीं हो सका और भारत को यह मुकाबला 1-3 से हारना पड़ा.

इस हार के बाद भारत की मुश्किलें बढ़ गई हैं. असल में दोनों ग्रुपों से टॉप दो टीमों को ही सेमीफाइनल में स्थान बनाना है. इस हार के बाद उसकी पहले स्थान पर रहने की संभावनाएं लगभग ख़त्म हो गई हैं.

लेकिन दूसरे स्थान पर रहने के लिए भी उसे तीन अगस्त को कनाडा के साथ होने वाले मुकाबले को हर हाल में जीतना होगा. यह जीत ही उसे ग्रुप में दूसरा स्थान दिला सकती है. सही मायनों में इसकी अहमियत अब क्वार्टर फाइनल जैसी हो गई है.

इंग्लैंड इस मुकाबले में गोल खाए बग़ैर मैच ख़त्म करती नज़र आ रही थी. लेकिन खेल समाप्ति से नौ सेकेंड पहले भारत को आठवां और आखिरी पेनल्टी कॉर्नर मिला. इस पर गुरजीत की ड्रैग फ़्लिक को गोल के ठीक सामने खड़ी वंदना कटारिया ने गोल में डिफ़्लेक्ट कर दिया और भारतीय टीम एक गोल उतारने में सफल हो गई.

जश्न मनाती हुईं इंग्लैंड की खिलाड़ी

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हिंच से पार पाना रहा मुश्किल

इंग्लैंड की गोलकीपर मेडलिन हिंच को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में शुमार किया जाता है. उन्होंने अपने प्रदर्शन से दिखाया है कि उन्हें क्यों बेहतरीन गोलकीपर माना जाता है.

वैसे तो इंग्लैंड की कप्तान हॉली पियर्ने वेब की अगुआई वाली डिफेंस ने भारतीय खिलाड़ियों को सर्किल में घुसने से रोके रखा और वह अंदर पहुंच भी गए तो उन्हें शॉट लेने के लिए स्पेस नहीं दी. इस सबके बाद हिंच से पार पाना बहुत ही दुष्कर काम साबित हुआ.

भारतीय टीम के हमलों की जान हमेशा ही वंदना कटारिया रही हैं पर इंग्लैंड ने वंदना को पूरी तरह से मार्क करने की रणनीति अपनाई. एक बार वंदना को रोक दिया गया तो भारतीय हमलों का पैनापन काफी हद तक कम हो गया.

वंदना ने इंग्लैंड के डिफेंस द्वारा फैलाए जाल से निकलने का भरपूर प्रयास किया. लेकिन वह अपने प्रयासों में सफल नहीं हो सकीं.

भारतीय टीम के लिए नवनीत, मोनिका, नेहा और सलीमा टेटे ने दाहिने से हमले बनाए. लेकिन वंदना के मार्क होने से बायाँ फ्लैंक हमलों में इस्तेमाल नहीं होने से इंग्लैंड के डिफेंस को भारतीय हमलों को रोकने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई.

भारत ने पहले क्वार्टर में पहल खोने के बाद दूसरे क्वार्टर में हमलावर रुख अपनाकर खेल में वापसी का प्रयास किया. टीम ने ताबड़तोड़ हमले करके इंग्लैंड को इस क्वार्टर में बचाव में व्यस्त रखा.

लेकिन हमेशा ही दवाब को आप जब तक गोल में नहीं बदलते हैं तो सामने वाली टीम का रक्षात्मक रुख अपनाने के लिए मजबूर नहीं कर पाते हैं.

भारत की भी इस क्वार्टर में दिक्कत यही रही कि वह दवाब को हमलों में तब्दील नहीं कर सकी. इस समय तक इंग्लैंड की टीम सिर्फ एक गोल की बढ़त बना सकी थी. भारत यदि गोल जमा पाता तो मैच की स्थिति बदल सकती थी.

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इंग्लैंड हाल के समय में भारत से बेहतर प्रदर्शन करती रही है और उन्होंने इस मैच में शुरुआत भी इसी अंदाज में की. उन्होंने खेल की शुरुआत से ही हमलावर रुख अपनाया और दूसरे मिनट में मिले पहले पेनल्टी कॉर्नर पर भारतीय खिलाड़ी से फाउल होने पर दूसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला.

इस पर गिसेली एंसले ने शॉट लेकर गोल भेद दिया. भारत ने यह कहकर रेफरल लिया कि गेंद खतरनाक ढंग से उठी. पर गेंद सलीमा टेटे की स्टिक से लगकर उठी थी, इसलिए गोल का फैसला बरकरार रहा.

इस क्वार्टर में भारतीय खिलाड़ियों के लिए विपक्षी सर्किल में घुसना थोड़ा मुश्किल रहा. इस क्वार्टर के समाप्ति से तीन मिनट पहले भारतीय हमले में वंदना की पुश पर इंग्लैंड की गोलकीपर गच्चा खा गई पर गेंद के गोल लाइन पार करने से पहले गोलकीपर ने गेंद को क्लियर कर दिया.

भारत गोल के लिए रेफरल रहा पर वह बर्बाद हो गया. इसके बाद भारतीय टीम पहला क्वार्टर ख़त्म होने में सात सेकेंड बाकी रहने पर पहला पेनल्टी कॉर्नर पाने में सफल रही.

पर गुरजीत की ड्रेग फ़्लिक पर गोलकीपर से रिबाउंड हुई गेंद पर भारतीय खिलाड़ी से फाउल होने से मौका बर्बाद हो गया. भारत भले ही इन दोनों मौकों पर गोल जमाकर बराबरी नहीं कर सकी. पर इन दोनों मौकों से भारतीय खेल में एकदम से बदलाव आ गया और यह दूसरे क्वार्टर में दबदबे के रूप में दिखा.

हॉकी

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मौके नहीं भुनाना बनी मुश्किल

भारतीय टीम दूसरा क्वार्टर आने तक पूरी रंगत में खेलने लगी. भारत ने दाहिने फ्लैंक से लगातार हमले बनाकर इंग्लैंड को ज्यादातर समय बचाव में व्यस्त रखा. इस दौरान भारत ने दो पेनल्टी कॉर्नर प्राप्त किए. इसके अलावा गोल जमाने के दो मौके जुटाए. पर इनमें से किसी भी मौके को भुनाया नहीं जा सका.

पेनल्टी कॉर्नर पर पहले मौके पर गुरजीत कौर की शॉट को गालकीपर हिंच ने रोक दिया और दूसरे मौके पर उनकी ड्रेग फ़्लिक गोल पोस्ट के बराबर से बाहर निकल गई.

इस बीच इंग्लैंड ने तीसरे क्वार्टर में एक शानदार गोल जमाकर बढ़त 2-0 कर ली. इस मौके पर सोफी हेमिल्टन ने दाहिने से गोल के सामने क्रास फेंका और वहां मौजूद टेस हावर्ड ने गेंद गोल में डिफ़्लेक्ट कर दी. वहीं आखिरी क्वार्टर में जब भारतीय टीम वापसी का प्रयास कर रही थी, तब इंग्लैंड के लिए हान्नाह मार्टिन ने तीसरा गोल जमा दिया.

भारत को इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के ख़िलाफ़ जीत पाने के लिए पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में बदलने की कला में सुधार करना होगा. पिछले काफी समय से भारतीय टीम इस मामले में कमजोर नजर आ रही है.

भारतीय टीम टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ इसी कारण हारी थी. इसके अलावा हाल के समय में उसने कई मैच गंवाए हैं. हालांकि, वेल्स के ख़िलाफ़ पेनल्टी कॉर्नरों पर तीन गोल जमाने से लगा था कि टीम ने इसमें सुधार कर लिया है. लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ आठ पेनल्टी कॉर्नरों में से सिर्फ एक को गोल में बदलने से ही टीम को इस तरह की हार का सामना करना पड़ा है.

भारतीय टीम को हमलों में फ्लैंक बदलकर डिफेंस में दरार बनाने का प्रयास करना चाहिए. इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टीम ने ज्यादातर हमले दाहिने फ्लैंक से बनाए. भारत ने पहले तीन क्वार्टरों में हमलों में बाएं फ्लैंक का इस्तेमाल नहीं करने से इंग्लैंड के डिफेंस को छितराने में मदद नहीं मिल सकी. भारत ने आखिरी क्वार्टर में हमलों में दोनों फ्लैंकों का इस्तेमाल किया पर तब तक काफी देर हो चुकी थी.

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