कॉमनवेल्थ खेल 2022: हरमनप्रीत की हैट्रिक से भारत की ज़ोरदार जीत... पर खली एक कमी

इमेज स्रोत, Sonu Mehta/Hindustan Times via Getty Images
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
मनप्रीत सिंह की अगुआई वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उम्मीदों के मुताबिक जीत से अभियान शुरू किया. उन्होंने पूल बी में घाना को 11-0 से हराकर अपने अभियान की शुरुआत की.
भारत ने इस मुक़ाबले में गोल जमाने के जितने मौके बनाए, उनमें से अगर आधों को गोल में बदला जा सकता, तो यह जीत और बड़ी हो सकती थी.
आमतौर पर कमजोर टीम से खेलते समय खेल में ढीलापन आ जाता है. पर भारतीय टीम की तारीफ़ करनी होगी कि उन्होंने खेल में तो ढिलाई नहीं आने दी और लगातार गोल जमाने के मौकों का सिलसिला बनाए रखा.
इतना ज़रूर है कि टीम की फिनिश उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही. इसकी वजह से ही भारत ने जितने गोल जमाए, उससे ज़्यादा मौके बर्बाद किए.
यह सही है कि घाना की टीम कमजोर थी, इसलिए मौके गंवाना खला नहीं. पर ग्रुप के मुश्किल मैचों में इस तरह गोल जमाने के मौके गंवाने को झेला नहीं जा सकता है. यह सही है कि मजबूत टीमों के ख़िलाफ़ खेलते समय खेल में और कसावट आ सकती है.

इमेज स्रोत, Dean Mouhtaropoulos/Getty Images
हरमनप्रीत ने 150वां मैच बनाया यादगार
भारतीय टीम के विशेषज्ञ ड्रेग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह का यह150वां अंतरराष्ट्रीय मैच था. इसमें उन्होंने हैट्रिक जमाकर मैच को यादगार बना दिया. उन्होंने खेल के 53वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रेग फ्लिक पर टीम का 11वां गोल करके अपनी हैट्रिक पूरी की. इस तरह वह अपने अंतरराष्ट्रीय गोलों की संख्या 109 करने में सफल रहे.
हरमनप्रीत ने यदि सभी भारतीय पेनल्टी कॉर्नरों को लिया होता तो उनके गोलों की संख्या कहीं ज़्यादा होती. पर भारतीय कोच ग्राहम रीड ने भारतीय जीत पक्की होने पर ज़्यादा से ज़्यादा खिलाड़ियों को आजमाने की रणनीति अपनाई.
भारत इस प्रयास से जुगराज सिंह और वरुण कुमार को अनुभव दिलाने में कामयाब रहा. जुगराज सिंह ने दो और वरुण कुमार ने एक गोल जमाया. असल में आगे आने वाले मैचों में इसका भारत को फायदा मिल सकता है.
जुगराज सिंह ऐसे खिलाड़ी हैं, जिसने भारत का जूनियर या आयु वर्ग में प्रतिनिधित्व किए बगैर सीधे सीनियर वर्ग में खेलने का गौरव हासिल किया है. वह अब टीम में रूपिंदर पाल का स्थान लेने में कामयाब हो गए हैं.

इमेज स्रोत, GLYN KIRK/AFP via Getty Images
क्या यह जीत विश्व कप की तरह ही शुभहोगी
भारतीय टीम घाना से इससे पहले सिर्फ़ एक बार 1975 के क्वालालंपुर विश्व कप में खेली थी. भारत ने उस समय ग्रुप मुक़ाबले में उसे 7-0 से हराया था.
घाना के साथ खेला इकलौता यह मैच भारत के लिए शुभ साबित हुआ था. भारत के नाम विश्व कप का यह इकलौता खिताब है. इस विश्व कप को अजितपाल सिंह की अगुआई में जीता था.
हमें याद है कि भारत ने फ़ाइनल में अपनी परंपरागत प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 2-1 से हराकर यह खिताब जीता था. इसमें भारत को विजय दिलाने वाला गोल अशोक कुमार ने जमाया था.
मुझे याद है कि इस विश्व कप की सफलता के बाद अजितपाल भारतीय हॉकी में एक हीरो के तौर पर उभरे थे. जब भी भारत के विश्व कप जीतने की चर्चा होती थी, तो टीम के कप्तान अजितपाल को जरूर याद किया जाता है.
इस पर एक बार अशोक कुमार ने कहा था कि कमाल इस बात का है कि भारत को विश्व कप जिताने वाला गोल जमाने वाले का कोई नाम ही नहीं लेता है. यह काम उन्होंने ही किया था.
हम जानते हैं कि ओलंपिक से लेकर एशियाई खेलों और विश्व कप तक में भारत ने गोल्ड जीता है पर कॉमनवेल्थ गेम्स का एकमात्र गोल्ड है, जिसकी भारत ने दूरी बनी हुई है.
इस दूरी की वजह हॉकी में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा होना है. पर इस बार भारतीय कप्तान मनप्रीत ने गेम्स से पहले कहा था कि इस बार हमारा प्रयास गोल्ड मेडल जीतना होगा. अब सवाल यह है कि घाना पर भारत की यह जीत विश्व कप की तरह इस खिताब दिलाने की राह में अहम भूमिका निभाएगी.

इमेज स्रोत, GLYN KIRK/AFP via Getty Images
मैच का हाल
भारतीय खिलाड़ियों को शुरुआत में घाना के डिफेंस को छकाने में थोड़ी दिक्क़त महसूस हो रही थी. हालांकि, भारत ने पहले ही मिनट में पेनल्टी कॉर्नर रिबाउंड पर अभिषेक के गोल से बढ़त बना ली थी.
लेकिन, पहले क्वार्टर के मध्य तक भारतीय टीम पूरी रंगत में खेलने लगी और उन्होंने खेल पर पूरी तरह से दबदबा बना लिया.
इस क्वार्टर में भारत ने अपने दबदबे को गोल में बदलने में कामयाबी हासिल की. इस दौरान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर और शमशेर ने अभिषेक से मिले पास पर गोल करके स्कोर 3-0 कर दिया.
भारत के लिए पहले क्वार्टर की तरह दूसरा क्वॉर्टर भी ठीक रहा क्योंकि वह दो गोल जमाने में सफल रहा.
लंबे समय बाद भारतीय टीम में वापसी करने वाले आकाशदीप सिंह ने बेहतरीन रिवर्स शॉट से चौथा गोल किया तो जुगराज सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल करके पांचवां गोल जमाया. यह स्ट्रोक पेनल्टी कॉर्नर पर लिए गए ड्रेग फ्लिक पर गोल के सामने खड़े डिफेंडर के पैर से लगकर गेंद रुकने पर दिया गया.

इमेज स्रोत, GLYN KIRK/AFP via Getty Images
आठ खिलाड़ियों का गोल ज़माना अच्छा संकेत
घाना के ख़िलाफ़ मैच में भारत के लिए 11 गोल आठ खिलाड़ियों का जमाना अच्छा संकेत है. इससे आगे के मुक़ाबलों के लिए खिलाड़ियों का मनोबल ऊंचा रहेगा. भारतीय टीम के खेल को देखकर यह तो लगा कि टीम में हमलों को बनाने के लिए अच्छा तालमेल है.
भारत को अगला ही मैच एक अगस्त को मेजबान इंग्लैंड के साथ खेलना है. यह मैच ग्रुप में टॉप पर रहने वाली टीम का निर्धारण करने में अहम भूमिका निभाएगा. यह सही है कि हाल के सालों में भारत का इंग्लैंड के ख़िलाफ़ प्रदर्शन अच्छा रहा है. पर भारतीय डिफेंस ने घाना जैसी कमजोर टीम के साथ खेलते हुए जिस तरह सात पेनल्टी कॉर्नर दिए, वह इंग्लैंड और कनाडा जैसी मजबूत टीमों के ख़िलाफ़ मुश्किल बन सकता है.
घाना टीम के कोच गजनफर अली भारतीय हैं. उन्होंने टीम में संघर्ष करने की जो क्षमता विकसित की है वो टीम के बड़े अंतर से पिछड़ जाने पर भी संघर्ष करने के दौरान दिखी.
गजनफर अली खुद अच्छे पेनल्टी कॉर्नर लगाने वाले रहे हैं और वह इस खूबी में टीम को शायद महारत नहीं दिला सके हैं. पर भारत जैसी दिग्गज टीम के ख़िलाफ़ सात पेनल्टी कॉर्नर पाना ही उनके खुश होने के लिए काफी है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















