विराट कोहली टीम इंडिया के कितने दिन कप्तान रहेंगे यह मुंबई टेस्ट तय करेगा?

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
ऐसा कम ही देखा गया है कि जब भारतीय ज़मीन पर कोई विदेशी टीम भारत के जबड़े से जीत छीन ले और मैच को ड्रॉ करा ले जाए लेकिन कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में खेले गए पहले टेस्ट मैच में ऐसा हुआ.
जीत के लिए दूसरी पारी में 284 रन की तलाश में उतरी न्यूज़ीलैंड के नौ विकेट, 89.2 ओवर में 155 रन के स्कोर पर गिर चुके थे लेकिन उसके बाद अंतिम जोड़ी के रूप में रचिन रविंद्र ने 91 गेंदों पर दो चौकों की मदद से नाबाद 18 और एजाज़ पटेल ने 23 गेंदों पर नाबाद दो रन बनाकर मैच को हैरतअंगेज़ अंदाज़ में ड्रॉ करा दिया.
जब मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ तब न्यूज़ीलैंड का स्कोर 98 ओवर के बाद नौ विकेट खोकर 165 रन था.
भारत के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अपने तरकश का हर तीर मैच जीतने के लिए आज़माया, लेकिन बात नहीं बनी.
रचिन रविंद्र और एजाज़ पटेल ने अपना पांव अंगद की तरह जमाए रखा. ख़ैर जो भी हो अजिंक्य रहाणे ने नियमित कप्तान विराट कोहली और केएल राहुल, रोहित शर्मा और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियो की ग़ैर-मौजूदगी के बावजूद विश्व टेस्ट चैंपियन न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ अपने खिलाड़ियों से दमदार प्रदर्शन करवाया.

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पहली पारी में शतक लगाने वाले श्रेयस अय्यर
इस मैच की सबसे बड़ी खोज रहे श्रेयस अय्यर, जिन्होंने पहली पारी में 105 और दूसरी पारी में 65 रन बनाए तो अक्षर पटेल ने पहली पारी में पांच विकेट झटके.
श्रेयस अय्यर पहले ही टेस्ट मैच में शतक और अर्धशतक बनाने का कारनामा करने वाले भारत के पहले बल्लेबाज़ बने.
लेकिन यह टेस्ट मैच कई सवाल छोड़ गया.
कप्तान के रूप में तो अजिंक्य रहाणे अपनी कठिन परीक्षा पास करने में सफल रहे लेकिन एक बल्लेबाज़ के तौर पर उन्होंने पहली पारी में 35 और दूसरी पारी में केवल चार रन बनाए. उनके अलावा चेतेश्वर पुजारा ने पहली पारी में 26 और दूसरी पारी में 22 रन बनाए.

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मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच दूसरा टेस्ट मैच तीन दिसंबर से शुरू होगा जिसमें विराट कोहली की नियमित कप्तान के रूप में वापसी भी होगी.
अब सवाल यह है कि क्या एक बल्लेबाज़ के तौर पर अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा की जगह टेस्ट मैच में बनती है... ख़ासकर यह देखते हुए कि भारत का अगला दौरा दक्षिण अफ्रीका का है, जहां भारत ने आज तक कोई भी टेस्ट सीरीज़ नहीं जीती है.
सवाल यह भी है कि अगर अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा को टेस्ट टीम से निकाल दिया गया तो इनकी जगह कौन लेगा.
वैसे कानपुर में खेले गए पहले टेस्ट मैच से पहले अजिंक्य रहाणे ने पिछले 12 टेस्ट मैच में 19.57 के औसत से 411 और चेतेश्वर पुजारा ने पिछले 10 टेस्ट मैच में 24.15 की औसत से 483 रन बनाए हैं.

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ख़राब फ़ॉर्म और सेलेक्शन पर सवाल
इस आशंका पर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन कहते हैं कि यह यक्ष प्रश्न जैसा है क्योंकि भारत का अगला विदेशी दौरा दक्षिण अफ्रीका का है जहां चुनौतियां अलग तरह की होंगी. वहां तेज़ आउटफ़ील्ड वाले उछाल लेते विकेट होंगे और विपक्षी टीम में कई तेज़ गेंदबाज़ भी हैं.
वह कहते हैं, "अगर पिछले दो साल का समय निकाल दिया जाए तो अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा का विदेशों में भी शानदार प्रदर्शन रहा है. अब टीम प्रबंधन की कोशिश यही होगी कि किसी तरह ये फ़ॉर्म में वापस आ जाएं लेकिन इसके लिए दोनों ही बल्लेबाज़ों को रन बनाने होंगे."
अब भारतीय टीम और कप्तान विराट कोहली की यह रणनीति भी होगी कि मुंबई में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में सलामी बल्लेबाज़ मयंक अग्रवाल को टीम से निकाल दें और श्रीकर भरत से ओपनिंग करवाएं.
ऐसा करने से पुजारा और अजिंक्य रहाणे की जगह भी टीम में बनी रहेगी और विराट कोहली की तो वापसी हो ही रही है. इसके बावजूद यह एक क्षणिक प्रयोग ही है क्योंकि यह नया बल्लेबाज़ी क्रम नहीं है. नए बल्लेबाज़ी क्रम में तो रोहित शर्मा और केएल राहुल ही सलामी बल्लेबाज़ होंगे. ऐसे में अगर रहाणे और पुजारा रन नहीं बनाते हैं तो इनके लिए टीम में जगह बनाने में समस्या हो जाएगी.
न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ दूसरे टेस्ट मैच में नाकाम रहने पर दक्षिण अफ्रीका के दौरे से दोनों खिलाड़ियों की छुट्टी के सवाल पर अयाज़ मेमन कहते हैं कि यह ख़तरा दोनों के लिए है.
वह कहते हैं, "अगर इन्हें दूसरा टेस्ट मैच खेलने की लाइफ़ लाइन मिल भी गई पर अगर इन्होंने रन नहीं बनाए तो अंतिम ग्यारह तो दूर इनके लिए दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ भारतीय टीम में जगह मिलनी भी मुश्किल हो जाएगी."
अयाज़ मेमन कहते हैं कि दोनों का फॉर्म ख़राब रहा है. विराट कोहली भी पिछले दो साल से ख़राब फॉर्म से जूझ रहे हैं लेकिन उनका रिकॉर्ड फिर भी इतना बुरा नहीं है.

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टीम में जगह बनाने का दबाव
सूर्यकुमार यादव बाहर बैठे हुए हैं. रोहित शर्मा और केएल राहुल के आने से शुभमन गिल भी अपनी जगह खो सकते हैं, लेकिन उन्हें टीम में बनाए रखने की कोशिश हो सकती है.
रहाणे और पुजारा बेहद दबाव में हैं और अगर यह दोनों ही अगले टेस्ट मैच में खेलते हैं और रन नहीं बनाते हैं तो फिर कोई तर्क नहीं रह जाता है कि उन्हें किस तरह दक्षिण अफ्रीका ले जाएं.
क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली कहते हैं कि पिछले कुछ समय से रहाणे और पुजारा के नाम के आगे प्रश्नचिन्ह तो लगा ही है. रहाणे के रन नहीं बन रहे हैं तो पुजारा बेहद धीमे हैं. उनके स्ट्राइक रेट पर हमेशा सवाल उठता है. अब सब सोच रहे हैं कि विराट कोहली आएंगे तो कौन बाहर बैठेगा, अजिंक्य रहाणे, चेतेश्वर पुजारा या मयंक अग्रवाल.
विजय लोकपल्ली कहते हैं, "मयंक अग्रवाल को बाहर कर रहाणे से भी ओपनिंग करायी जा सकती है लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि अगला दौरा दक्षिण अफ्रीका का है. वहां अगर बिल्कुल नए खिलाड़ी गए तो मुश्किल हो सकती है. रहाणे और पुजारा, उतने रन ना बनाने के बावजूद अनुभव के आधार पर, टीम को फ़ायदा दे सकते हैं. उनकी तकनीक और क्षमता पर किसी को कोई शक नहीं है लेकिन फिर युवा खिलाड़ियों को अवसर कब मिलेगा. अब यह चयनकर्ताओं पर निर्भर करता है कि वह किस तरह का निर्णय करते हैं."
रहाणे और पुजारा की जगह लेने वाले खिलाड़ियों को लेकर अयाज़ मेमन कहते हैं कि श्रेयस अय्यर, हनुमा विहारी और शुभमन गिल उनकी जगह ले सकते हैं. शुभमन गिल तो अक्सर घरेलू क्रिकेट में मध्यम क्रम में ही खेलते हैं. ऐसे में रोहित शर्मा और केएल राहुल सलामी बल्लेबाज़ और उसके बाद नम्बर तीन पर चाहें तो विराट कोहली ख़ुद आ सकते हैं या श्रेयस अय्यर को भी आज़मा सकते हैं.
मुंबई के लिए टॉप ऑर्डर में खेलने वाले सूर्यकुमार यादव भी टीम में आ सकते हैं.
दूसरे टेस्ट मैच में भी नाकाम रहने के बावजूद क्या एक मौक़ा इनके लिए दक्षिण अफ्रीका के लिए बनता है. इसे लेकर अयाज़ मेमन कहते हैं कि ऐसे में तो भारतीय टीम के दल के लिए ही मुश्किल हो जाएगी क्योंकि वहां अधिक से अधिक 15 या 16 खिलाड़ी ही जा सकते हैं. दो बल्लेबाज़ जो बेहद दबाव में हैं भले ही वह अनुभवी हों लेकिन उन्हें टीम में शामिल करने से लाभ नहीं होगा.

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विराट कोहली पर कितना दबाव
क्या दक्षिण अफ्रीका का दौरा विराट कोहली की भी कप्तानी और बल्लेबाज़ी को लेकर महत्वपूर्ण हो सकता है.
इस पर अयाज़ मेमन कहते हैं कि रन बनाना तो सबके लिए बेहद ज़रूरी है चाहे वह कोई भी हो. विराट कोहली तो अपने युग के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ माने जाते हैं. उनका रिकॉर्ड भी पिछले दो साल से अच्छा नहीं है. उन्हें अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप रन बनाने होंगे.
वह कहते हैं, "विराट कोहली जैसे बल्लेबाज़ अगर रन ना बनाएं तो विरोधी टीम का आत्मविश्वास बढ़ जाता है. जहां तक उनकी कप्तानी की बात है तो टी-20 की कप्तानी तो वह छोड़ ही चुके हैं, शायद लाल गेंद की कप्तानी भी रोहित शर्मा को मिल जाए क्योंकि चयनकर्ता भी नहीं चाहते हैं कि एक कप्तान सफ़ेद और एक कप्तान लाल गेंद के लिए हो. अब अगर लाल गेंद वाली क्रिकेट में रन ना बने और अपेक्षित परिणाम भी ना निकले तो कप्तान पर उंगलियां तो उठेंगी ही."
विजय लोकपल्ली कहते हैं कि विराट कोहली की कप्तानी पर तो सवाल उठ ही रहे है क्योंकि उन्होंने कोई भी आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीता है.
वह कहते हैं, "सभी कहते है कि वह अच्छे कप्तान नहीं हैं. ऑस्ट्रेलिया में भी अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में भारत जीता. यह सब बातें मिल जुलकर विराट पर दबाव बना रही हैं. उनकी कप्तानी पर सबकी पैनी नज़र है ऐसे में विराट कोहली को तो प्रदर्शन करना ही पड़ेगा. अगर वह फॉर्म में नही होंगे तो अपनी कप्तानी को कैसे न्यायोचित ठहरा पाएंगे."
विजय लोकपल्ली कहते हैं कि उम्मीद करें कि विराट अपनी फॉर्म में मुंबई में ही लौटें ताकि दक्षिण अफ्रीका के लिए तैयार हो सकें, ऐसे में मुंबई टेस्ट मैच उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
हालांकि, अहम ये भी है कि भारत- दक्षिण अफ्रीका सिरीज़ पर कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का साया मंडराने लगा है. फ़िलहाल दोनों बोर्ड हालात पर नज़र रखने की बात कह रहे हैं. अभी के मुताबिक पहला टेस्ट मैच 17 दिसंबर से खेला जाना है.
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