राहुल द्रविड़ के हाथ टीम इंडिया का दारोमदार, दिल में टीस लिए विदा हुए रवि शास्त्री

रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

''मैं इस समय बड़ा सुकून महसूस कर रहा हूँ.'' यह कहना था भारत के विराट कोहली का, जब वह टी-20 विश्व कप में नामीबिया के ख़िलाफ़ टी-20 में कप्तान के रूप में अंतिम बार मैदान में उतरे.

ठीक उसी समय कैमरा पवेलियन में बैठे भारत के हेड कोच और पूर्व कप्तान रवि शास्त्री के चेहरे पर गया. वे कुछ उदास से दिखाई दिए. उनकी बग़ल में भारत के ही पूर्व कप्तान और इस विश्व कप में भारतीय टीम के मेंटॉर महेंद्र सिंह धोनी भी बैठे थे. उनका चेहरा सपाट था लेकिन शास्त्री और धोनी के चेहरे पर इस विश्व कप में सेमी फ़ाइनल में ना पहुँचने की टीस साफ़ देखी जा सकती थी.

यह संयोग ही कहा जा सकता है कि विराट कोहली कप्तान के तौर पर टीम से विदाई ले रहे थे, तो रवि शास्त्री का कार्यकाल भी कोच के रूप में पूरा हो रहा था. उनकी जगह भारत के पूर्व कप्तान और नेशनल क्रिकेट एकेडमी के चेयरमैन रहे राहुल द्रविड़ कोच की ज़िम्मेदारी संभालेंगे.

नामीबिया के ख़िलाफ़ भारत के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फ़ैसला किया. नामीबिया ने 20 ओवर में आठ विकेट खोकर 132 रन बनाए. भारत ने जीत का लक्ष्य केएल राहुल के नाबाद 54 और रोहित शर्मा के 56 रनों की मदद से 15.2 ओवर में केवल एक विकेट खोकर हासिल कर लिया. सूर्यकुमार यादव 25 रन बनाकर नाबाद लौटे.

भारत और नामीबिया का ग्रुप-2 में यह आख़िरी मैच था. इसके साथ ही दोनों टीमों का अभियान भी इस विश्व कप में समाप्त हो गया. भारतीय खिलाड़ियों ने कप्तान विराट कोहली और रवि शास्त्री को जीत का तोहफ़ा तो दिया, लेकिन ख़िताबी जीत का नहीं, जिसका मलाल शायद उन्हें भी था.

भारत की आसान जीत के बाद फीकी सी मुस्कराहट के साथ विराट कोहली ने कहा कि उनकी टीम ने पिछले मैचों में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन टीम शुरुआती दो मैचों में पाकिस्तान और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ निडर होकर नहीं खेली.

टी20 विश्व कप में भारत और न्यूज़ीलैंड के मैच के दौरान रवि शास्त्री

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इमेज कैप्शन, टी20 विश्व कप में भारत और न्यूज़ीलैंड के मैच के दौरान रवि शास्त्री

कोहली ने आगे कहा कि वह पिछले सात साल से टी-20 प्रारूप में टीम की कप्तानी कर रहे थे और उस दौरान टीम ने शानदार प्रदर्शन किया जिसके लिए वह सभी खिलाड़ियों का शुक्रिया अदा करते हैं. उन्होंने रवि शास्त्री की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी कोचिंग के दौरान टीम के वातावरण को बेहद शानदार रखा और भारत की क्रिकेट में अपना अहम योगदान दिया.

विराट कोहली तो ख़ैर अभी भी एक कप्तान के तौर पर भारत की एकदिवसीय और टेस्ट टीम की कमान सँभालकर खेलते रहेंगे, लेकिन कोच के रूप में रवि शास्त्री के साथ उनकी जुगलबंदी टूट गई है.

विराट कोहली और रवि शास्त्री

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शास्त्री और कोहली की जुगलबंदी

रवि शास्त्री तब भारत के पूर्णकालिक चीफ़ कोच बने, जब साल 2017 में इंग्लैंड में हुई आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में भारत पाकिस्तान के हाथों बुरी तरह हारा. तब टीम के कोच पूर्व कप्तान और जम्बो के नाम से मशहूर लेग स्पिनर अनिल कुंबले थे.

तब अफ़वाह फैली कि अनिल कुंबले कुछ ज़्यादा ही सख़्त क़िस्म के कोच हैं और वह किसी भी तरह की अनुशासनहीनता सहन नहीं करते और इसी बात को लेकर उनके कप्तान विराट कोहली से मतभेद है. भारत में कोई भी कोच तब तक ही कामयाब है और तब तक ही टीम के साथ रहता है जब तक टीम कामयाबी की राह पर चलती रहे और कप्तान के साथ उसके रिश्ते सहज हों.

बीसीसीआई ने तब भाँप लिया था कि विराट कोहली और अनिल कुंबले जैसे बड़े क़द के खिलाड़ी को कोच के रूप में एक साथ रखना एक म्यान में दो तलवार रखने जैसा है, जो मुमकिन नहीं है. इससे पहले कि कोच और कप्तान के आपसी रिश्तों की खटास अधिक बढ़ती बीसीसीआई ने उन दिनों एक कमेंटेटर के तौर पर बेहद कामयाब रवि शास्त्री को आनन-फ़ानन में भारतीय टीम का कोच बना दिया.

विराट कोहली और अनिल कुंबले

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रवि शास्त्री को इससे पहले कोचिंग का कोई आधिकारिक अनुभव नहीं था क्योंकि अंतराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद उन्होंने साल 1993 से ही कमेंट्री की दुनिया में अपने पाँव जमा लिए थे. एक खिलाड़ी के रूप में उनके पास विशाल अनुभव था.

रवि शास्त्री साल 1983 में कपिल देव की कप्तानी में जीते गए विश्व कप की विजेता टीम के सदस्य थे तो साल 1986 में ऑस्ट्रेलिया में खेले गए मिनी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट बेंसन एंड हेज़ेज़ के चैंपियन ऑफ़ चैम्पियंस भी थे.

सुनील गावस्कर की कप्तानी में भारत ने वह टूर्नामेंट जीता था. तब रवि शास्त्री को ईनाम में एक बड़े ब्रांड की कार भी मिली थी जिस पर सवार होकर पूरी भारतीय टीम ने मैदान का चक्कर भी लगाया था. उस समय मैन ऑफ़ द मैच या मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट का पैसा पूरी टीम आपस में बाँट लेती थी. तब रवि शास्त्री ने कहा कि वह कार को बेचेंगे नहीं और टीम चाहें तो अपने अपने हिस्से के दरवाज़े या बोनट ले जाए.

रवि शास्त्री अपने बिंदास लाइफ़स्टाइल के लिए भी जाने जाते थे और विराट कोहली भी ऐसे ही थे, इसलिए रवि शास्त्री और कोहली की जोड़ी कोच और कप्तान के रूप में जम गई. अगर रवि शास्त्री अपने समय में पोस्टर ब्वॉय थे, तो विराट कोहली आज भी विज्ञापनों में छाए रहते हैं.

भारतीय क्रिकेट टीम के साथ रवि शास्त्री

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रवि शास्त्री का भारतीय टीम में योगदान

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रवि शास्त्री के बाद राहुल द्रविड़ भारत के कोच के रूप में कितना कामयाब होंगे और टी-20 क्रिकेट में विराट कोहली की जगह रोहित शर्मा भी कप्तान के तौर पर टीम को कितनी ऊँचाइयाँ दे सकेंगे?

ये जानने के लिए हमने क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन से बात की, तो सबसे पहले उन्होंने रवि शास्त्री को लेकर कहा कि एक कोच के रूप में भारतीय क्रिकेट में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा. उनकी और विराट कोहली की साझेदारी में भारत ने बहुत कुछ हासिल किया.

उन्होंने कहा, "सबको यही याद रहता है कि उनकी कोचिंग में भारत ने आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीते, लेकिन भारत ने द्विपक्षीय सिरीज़ जीती है, जैसे ऑस्ट्रेलिया को उन्हीं के घर में दो बार हराया. पिछले दिनों इंग्लैंड को इंग्लैंड में हराया. इसके अलावा टीम को बहुत सारी ऐसी जीत मिलीं, जो पहले कभी नहीं मिली थी. रवि शास्त्री और विराट कोहली की जोड़ी ने टीम को आक्रामक अंदाज़ में खेलना सिखाया, जबकि इसे लेकर इनकी आलोचना भी ख़ूब हुई, लेकिन टीम को उसका बहुत फ़ायदा हुआ."

भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सिरीज़

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इमेज कैप्शन, जब भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सिरीज़ में जीती भारतीय टीम

अयाज़ मेमन आगे कहते हैं, "इनकी इस बात को लेकर भी बहुत आलोचना हुई कि यह टीम में बहुत अधिक बदलाव करते हैं. एक तरह से इनमें टीम को नंबर एक बनाने का उतावलापन था. अगर इनका पिछले तीन साल का रिकॉर्ड देखें, तो टीम टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक रही, एकदिवसीय और टी-20 में भी पहले से तीसरे स्थान पर रही. कुल मिलाकर टीम में ज़बरदस्त निरंतरता रही. अफ़सोस यह है कि साल 2019 में विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड से और पिछले दिनों विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में हार गए. इस बार टी-20 विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में भी नहीं पहुँचे. टूर्नामेंट में ख़िताब नहीं जीत सके जो एक अंतर रह गया."

एक कोच के रूप में उनकी नियुक्ति को लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि कुंबले के कोच बनने से पहले भी वह एक साल तक भारत के कोच थे. बाद में किसी वजह से अनिल कुंबले और विराट कोहली की आपस में नहीं बनी. ऐसा लगा कि यह जोड़ी जन्नत में बनी है और स्वर्ग से उतरी है लेकिन बाद में ऐसा हुआ नहीं. उसके बाद चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में पाकिस्तान से हारने के बाद कुंबले ने कोच का पद छोड़ दिया.

महेंद्र सिंह धोनी, रवि शास्त्री और विराट कोहली

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कोहली और धोनी को संभाला

इसके बाद रवि शास्त्री का स्वर्णिम युग तब शुरू हुआ, जब कोच के रूप में उन्हें लंबा कार्यकाल मिला. उसके बाद शायद लोगों को यह समझ में नहीं आएगा कि कैसे उन्होंने ऊर्जावान कोच के अंदाज़ में विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी को तब तक ड्रेसिंग रूम में संभाला, जब तक धोनी खेलते रहे. विराट कोहली जो नए कप्तान के रूप में खेल रहे थे. अगर उन दोनों से बराबर बातचीत ना की जाती, तो बहुत मुश्किल हो सकती थी लेकिन रवि शास्त्री ने दोनों को सँभाला. अगर कोई कप्तानी छोड़ दे और वह टीम में भी हो तो फ़िर अक्सर इगो यानी अहम की समस्या शुरू हो जाती है लेकिन ऐसा बिल्कुल देखने में नहीं आया. यह बहुत कम देखने को मिलता है.

लेकिन क्या रवि शास्त्री विराट कोहली और रोहित शर्मा के बीच चले तनाव को दूर करने में कामयाब हुए? इसे लेकर अयाज़ मेमन कहते हैं कि बहुत हद तक कामयाब हुए. वैसे तनाव तो हर टीम के ड्रेसिंग रूम में होता है. जब हमने लिखना शुरू किया तो बिशन सिंह बेदी और अजित वाडेकर के बीच या सुनील गावस्कर और कपिल देव के बीच तनाव था, और ऐसा भारत ही नहीं दुनिया की हर टीम के बीच होता है क्योंकि आख़िरकार सब इंसान हैं और सबका सोचने का अंदाज़ अलग होता है.

रोहित शर्मा और विराट कोहली

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अयाज़ मेमन कहते हैं- ऐसा नहीं है कि पाँचों उंगलियाँ बराबर होती हैं लेकिन सब मिलकर एक मुट्ठी बनती हैं जिसका फ़ायदा होता है. कई बार कोई ग़लती करता है तो दूसरा सुधार देता है और फिर सब आगे चलकर अपनी भूमिका निभाते हैं. ऐसे में जो टीम में सबसे बड़ा होता है उसकी भूमिका बेहद कठिन लेकिन बेहद अहम होती है और यह भूमिका रवि शास्त्री ने बखूबी निभाई है.

विराट कोहली को लेकर अयाज़ मेमन कहते हैं कि अगर उनका रिकॉर्ड देखें, तो वह टेस्ट में सबसे कामयाब कप्तान हैं. एकदिवसीय और टी-20 में भी सबसे सफ़ल कप्तान हैं, लेकिन अगर आईसीसी या बहुत-सी टीमों वाले टूर्नामेंटों को देखें तो जैसे ख़ासकर आईपीएल में तो उनका रिकॉर्ड बहुत हल्का है. वैसे आईसीसी के टूर्नामेंट में इस विश्व कप को हटा दें, तो वह बाक़ी जगह सेमीफ़ाइनल फ़ाइनल तक पहुँचे हैं. शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए नए कोच राहुल द्रविड़ को सोचना होगा कि क्या यह रिसर्च का विषय है कि जो खिलाड़ी द्विपक्षीय सिरीज़ खेलते हैं और लगातार निरंतरता से जिताते भी हैं लेकिन वही खिलाड़ी टीम को मल्टीनेशनल टूर्नामेंट नहीं जीताते. इस बात को नए कोच और आने वाले नए कप्तान को सोचना चाहिए.

रोहित शर्मा और विराट कोहली

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रोहित, विराट और द्रविड़ के बीच तालमेल

अब टी-20 में नए कप्तान रोहित शर्मा और कोच राहुल द्रविड़ की जुगलबंदी कैसी रहेगी, जबकि टीम में विराट कोहली भी होंगे? इसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि यह अच्छी बात है कि रोहित शर्मा कप्तान बन रहे हैं क्योंकि उनकी साख बहुत है. वह लंबे समय से सफ़ेद गेंद की क्रिकेट में उपकप्तान हैं. मुंबई से आते हैं जहं बहुत ही प्रतिस्पार्धात्कम क्रिकेट खेली जाती है और उन्हें जीतना आता है. एशिया कप भी उन्होंने जिताया. पिछले तीन चार साल से फ़ॉर्म में हैं. पहले लगता था कि वे टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल सकते लेकिन अब उनकी क्षमता पर कोई शक नहीं है. टीम के बाक़ी सदस्य उनकी बहुत तारीफ़ करते हैं और समय के साथ उनमें परिपक्वता आई है. एक अच्छी जोड़ी रहेगी. राहुल द्रविड़ भी बड़े ही सौम्य और नपे तुले व्यक्ति हैं. वह निरंतरता में विश्वास रखते हैं. हमें पूरा भरोसा है कि यह जोड़ी अच्छा करेगी.

लेकिन क्या द्रविड़ विराट कोहली के आक्रामक स्वभाव को भी नियंत्रित कर पाएँगे? इसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि विराट कोहली अपने अंदाज़ से खेलते हैं और वैसी ही कप्तानी भी करते हैं. विराट कोहली की सबसे अच्छी बात यह है कि वह टेस्ट क्रिकेट की आलोचना नहीं करते. वह टेस्ट क्रिकेट की तारीफ़ करते हुए उसे आगे ले जाना चाहते हैं. अगर उन्होंने टी-20 में कप्तानी छोड़ी है तो वह अपना स्वभाव भी बदलेंगे.

भारतीय क्रिकेट टीम

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इसी मुद्दे को लेकर एक और क्रिकेट समीक्षक जी राजारमन कहते हैं कि रवि शास्त्री में जो सबको एक करने की क्षमता थी, वही वे भारतीय टीम में लाए. ऐसा नहीं है कि धोनी में यह क्षमता नही थी, ख़ूब थी और विराट कोहली के साथ उनकी ख़ूब जमी. रवि शास्त्री और विराट कोहली ने तय किया कि दोनों मिलकर टेस्ट क्रिकेट में जीतेंगे, ड्रॉ के लिए नहीं खेलेंगे और जीतकर ही इज़्ज़त कमाएँगे. इनकी क़िस्मत से कुछ अच्छे तेज़ गेंदबाज़ निकलकर सामने आए जो लगातार विकेट लेते रहे और बल्लेबाज़ मैच जिताते रहे. विराट कोहली की आक्रामकता को संयोजित करने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा. उन्हें टीम में बहुत अच्छा माहौल बनाने के लिए भी याद रखा जाएगा. इसके अलावा विदेशी ज़मीन पर निडर होकर खेलना और जीतना उन्होंने सिखाया. टीम ने भी जीतकर दिखाया कि वह सही सबक़ ले रही है.

विराट कोहली और रोहित शर्मा के बीच तनातनी को राजारमन सिरे से नकारते हैं और कहते हैं कि कोहली दिल्ली के हैं और वहां की आक्रामकता उनमें है जैसा वह दिखाते हैं. रोहित शर्मा मुंबई के हैं, जहाँ के खिलाड़ी खड़ूस क्रिकेट के लिए जाने जाते हैं लेकिन वे सबसे अलग हैं. रोहित शर्मा बेहद आक्रामक बल्लेबाज़ हैं और उनके विचार अलग हो सकते हैं. लोकतंत्र में विभिन्न विचार वाले खिलाड़ियों का ड्रेसिंग रूम में होना अच्छी बात है. इन सब विचारों को एक कर रवि शास्त्री, विराट कोहली और रोहित शर्मा टीम को आगे ले गए जो अच्छी बात है. बुमराह को टीम में लाना, मोहम्मद शमी का फ़िट होकर वापसी करना और ईशांत शर्मा का टेस्ट मैच में एक ही दिन में 20-20 ओवर करना यह सब रवि शास्त्री की देन है. मोहम्मद सिराज का भी भारत के लिए खेलना और जड़ेजा और अश्विन की जोड़ी से लेकर टीम का माहौल ठीक रखना शास्त्री की विशेषता रही.

राहुल द्रविड़

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क्या नयापन ला पाएंगे राहुल द्रविड़

राहुल द्रविड़ कोच के रूप में क्या नयापन टीम में लाएँगे? इसे लेकर राजारमन कहते हैं कि राहुल द्रविड़ की विशेषता यह है कि भारत की बेंच स्ट्रेंथ के साथ उन्होंने काम किया है. भारत ए और जूनियर टीम के बहुत से खिलाड़ियों के साथ उन्होंने काम किया है और उनमें से कुछ खिलाड़ी भारतीय टीम में आने का इंतज़ार कर रहे हैं.

राहुल द्रविड़ उनकी ताक़त और कमज़ोरी को अच्छी तरह से जानते हैं. भारत के बहुत से खिलाड़ी एक या दो सीज़न ही टीम में रहेंगे ऐसे में द्रविड़ का टीम के साथ आना अच्छा है, क्योंकि उन्होंने आने वाले खिलाड़ियों के साथ पिछले चार सालों में काम किया है. वह एक कप्तान के रूप में भी अलग थे, जब सौरव गांगुली के बाद वह कप्तान बने.

द्रविड़ की सोच ग्रेग चैपल से मेल खाती है. चैपल का मानना था कि आप कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाते रहें नतीजे अपने आप सामने आएँगे. उनके लिए ऑस्ट्रेलिया में दो टेस्ट सिरीज़ में मिली कामयाबी को बरक़रार रखने की चुनौती होगी. लोगों को द्रविड़ के साथ धैर्य दिखाना होगा. कप्तान के साथ उनका तालमेल बेहतरीन होगा. राहुल द्रविड़ अभी युवा हैं और लगता है आज के खिलाड़ी उनकी भाषा बोलेंगे. सचिन तेंदुलकर जैसे बड़े खिलाड़ी के साथ उनका विवाद था लेकिन उससे भी वह उभरे. यह सब बताता है कि वह एक कामयाब कोच साबित हो सकते हैं.

वैसे जी राजारमन मानते हैं कि विराट कोहली की जगह रोहित शर्मा के स्थान पर किसी युवा को टी-20 क्रिकेट में कप्तानी का भार देना ज़्यादा ठीक रहेगा ताकि वह अनुभव हासिल करने के बाद लंबे समय तक कप्तानी कर सके. अब देखना है द वॉल के नाम से मशहूर रहे राहुल द्रविड़ कोच के रूप में कितनी मज़बूत दीवार साबित होते है जबकि टीम में तीन प्रारूप में दो कप्तान भी हैं.

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