टी-20 विश्व कप में भारत की सातवें आसमान जैसी उम्मीदें टूटने के सात कारण

भारतीय टीम

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

संयुक्त अरब अमीरात और ओमान में खेला जा रहा आईसीसी टी-20 विश्व कप भारत के लिए एक बुरे सपने जैसा साबित हुआ. भारत का टूर्नामेंट जीतने का सपना तो क्या सच होता, उसका अभियान ही सेमीफ़ाइनल से पहले समाप्त हो गया. नतीजा सोमवार को अपने ग्रुप बी में नामीबिया के ख़िलाफ़ होने वाला मैच भी महज़ औपचारिक बन कर रह गया.

भारत की सेमीफ़ाइनल में पहुँचने की आख़िरी उम्मीद तब टूटी, जब रविवार को न्यूज़ीलैंड ने अफ़ग़ानिस्तान को बेहद आसानी से आठ विकेट से हरा दिया. अगर किसी तरह से अफ़ग़ानिस्तान उलटफेर करते हुए न्यूज़ीलैंड को हरा देता, तो भारत की संभावनाएँ जीवित रहती और नामीबिया के ख़िलाफ़ परिणाम पर भारत के क्रिकेट प्रेमियों और न्यूज़ीलैंड टीम की निगाहें टिकी रहती.

आख़िरकार भारत के ग्रुप से पाकिस्तान ने बेहद दमदार प्रदर्शन करते हुए अपने पाँचों मैच जीतकर 10 अंकों और न्यूज़ीलैंड ने चार जीत और आठ अंकों के साथ सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई.

भारत के कप्तान विराट कोहली, कोच रवि शास्त्री और मेंटॉर महेंद्र सिंह धोनी जैसे धुरंधरो की देखरेख और रोहित शर्मा, केएल राहुल, ऋषभ पंत, जसप्रीत बुमराह और बेहद अनुभवी मोहम्मद शमी जैसे सितारा खिलाड़ियों से सजी टीम काग़ज़ पर बेहद मज़बूत दिखने के बावजूद मैदान पर मज़बूत टीमों के ख़िलाफ़ टिक नहीं पाई.

नामीबिया के ख़़िलाफ़ मुक़ाबले से पहले उसकी हालत 'अब पछताएगा होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत' जैसी थी.

आख़िरकार जिस टीम के अधिकांश खिलाड़ी टी-20 विश्व कप के शुरू होने से पहले उन्हीं मैदानों पर आईपीएल खेल रहे थे, जहाँ उनके विश्व कप के मुक़ाबले होने थे और वह वहाँ के माहौल के अनुरूप सबसे अधिक ढले हुए थे, वे बड़ी परीक्षा में कैसे नाकाम हो गए?

आख़िरकार जिस टीम से चैम्पियन बनने की सबसे अधिक उम्मीदें थीं, वह केवल शुरूआती दो मैच हारने से ही कैसे चकनाचूर हो गई, इसके सात कारण साफ़ साफ़ नज़र आते हैं.

1. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अति आत्मविश्वास ले डूबा

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत बुरी तरह हारा

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भारत इस विश्व कप में अपने पहले ही मुक़ाबले में जब पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैदान में उतरा. तो शायद टीम के मन में पिछले शानदार रिकॉर्ड की यादें थी. इससे पहले पाकिस्तान सात बार एकदिवसीय विश्व कप और पाँच बार टी-20 विश्व कप में भारत के हाथों मात खा चुका था.

भारत को लगा कि विश्व कप में हर बार जीतने का मिथक इस बार भी साथ देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पाकिस्तान ने पिछला सारा सूद चुकाते हुए भारत को 10 विकेट से मात दी. भारत की सलामी जोड़ी केएल राहुल और रोहित शर्मा के तीसरे ओवर में ही विदा होने के साथ भारत पर हार का ख़तरा मँडराने लगा.

बाद में विराट कोहली ने 57 रन ज़रूर बनाए लेकिन टीम के कुल जमा 151 रन कम ही साबित हुए, क्योंकि पाकिस्तान 10 विकेट से जीत गया. इसके साथ ही भारतीय गेंदबाज़ी की पोल भी खुल गई. यह स्कोर इतना भी कम नहीं था कि भारतीय गेंदबाज़ तीन चार विकेट भी ना ले पाते.

वहीं पाकिस्तानी गेंदबाज़ों ने मैच से पहले नेट पर ख़ूब पसीना बहाया. मैच में तीन विकेट लेने वाले शाहीन शाह अफ़रीदी ने बाद में कहा कि उन्होंने थोड़ी स्विंग हासिल करने के लिए बहुत मेहनत की, जो रंग लाई.

2. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ टीम में बदलाव घातक साबित हुए

विराट कोहली और केन विलियम्सन

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पाकिस्तान से 10 विकेट से हारने के बाद हैरान भारतीय टीम के न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में जैसे हाथ पाँव ही फूल गए. भारत के थिंक टैंक ने टीम में परिवर्तन करते हुए सूर्यकुमार यादव की जगह ईशान किशन और भुवनेश्वर कुमार की जगह शार्दूल ठाकुर को मैच में मौक़ा दिया.

चलो बात यहाँ तक तो ठीक थी, लेकिन जब टॉस हारकर भारतीय टीम पहले बल्लेबाज़ी का न्यौता पाकर मैदान में उतरी, तो बैटिंग ऑर्डर देखकर सब हैरान रह गए क्योंकि रोहित शर्मा की जगह ईशान किशन केएल राहुल के साथ सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर उतरे.

यह बदलाव कुछ ख़ास साबित नहीं हुआ, क्योंकि ट्रेंट बोल्ट ने ईशान किशन को जल्दी ही मिचेल सैंटनर के हाथों कैच करा दिया. वह आठ गेंद खेलकर केवल चार रन बना सके. इसके बाद रोहित शर्मा मैदान में उतरे लेकिन वह भी 14 रन बनाकर स्पिनर ईश सोढी का शिकार हो गए.

बैटिंग ऑर्डर में बदलाव का असर यह पड़ा कि तीन नंबर पर खेलने वाले कप्तान विराट कोहली को चौथे नंबर पर खेलना पड़ा और वह भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे. ऐसे बदलाव तो प्रयोग के तौर पर तब किए जाते हैं जब कोई भी टीम टूर्नामेंट में अपने आपको पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती है.

एक तरह से थिंक टैंक का यह क़दम भारत के लिए अपने ही पाँव पर ख़ुद कुल्हाड़ी मारने जैसा साबित हुआ. भारतीय टीम पूरे मुक़ाबले में बेहद थकी और झुके हुए कंधो के साथ खेलती बेजान और लाचार सी दिखी जिसे बाद में कप्तान विराट कोहली ने भी ईमानदारी से स्वीकार किया.

उन्होंने कहा- हमारी टीम में न्यूज़़ीलैंड जैसी स्फ़ूर्ति और जोश नहीं था और हमारी शारीरिक भाषा भी उनके मुक़ाबले नकारात्मक थी.

3. दो हार के बाद बजी ख़तरे की घंटी और उठे चयन पर सवाल

भारतीय टीम

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ऐसा नहीं है कि भारतीय टीम के चयन पर सवाल पाकिस्तान और न्यूज़ीलैंड से हारने के बाद उठे. दरअसल चेतन शर्मा की अगुवाई वाली चयन समीति ने विश्व कप के लिए जो टीम चुनी, वह पहले ही आधी अधूरी टीम लग रही थी जिस पर लगातार दो हार ने सच की मुहर भी लगा दी.

न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ हारते ही टूर्नामेंट से बाहर होने का ख़तरा भारत पर मँडराने लगा था, जिसकी वजह आईपीएल में फ़ॉर्म से बाहर खिलाड़ियों का टीम में चयन था, वह भी एक दो नहीं पूरे आधा दर्जन.

अगर विश्व कप में टीम के चयन का आधार ठीक कुछ दिन पहले समाप्त हुआ आईपीएल था, तो क्यों बल्लेबाज़ी में ढेरों रन बनाने वाले रितुराज गायकवाड़, शिखर धवन और श्रेयस अय्यर के नाम पर चर्चा तक नहीं हुई, और स्पिनर युजवेंद्र चहल और बीते आईपीएल में सबसे अधिक विकेट लेने वाले हर्षल पटेल, आवेश खान और बेहद उत्साह से खेलने वाले और पिछले एक साल से विदेशों तक में भारत की जीत में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज को टीम में नहीं चुना गया.

सूर्यकुमार यादव, ईशान किशन और हार्दिक पांडया तो इस बार बुरी तरह नाकाम हुए तो राहुल चहर भी कुछ ख़ास प्रदर्शन नहीं कर सके थे. टीम का हाल ऐसा था कि कप्तान विराट कोहली भी सोच रहे थे किसे खिलाए और किसे बाहर रखें.

4. आर अश्विन को देर से मौक़ा और लचर गेंदबाज़ी

आर अश्विन

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टूर्नामेंट में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक भी विकेट ना पाना और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ केवल दो विकेट लेना पहले ही दर्शा गया था कि टीम की गेंदबाज़ी में कुछ ख़ास दमख़म नहीं है. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार नाकाम साबित हुए.

वह 120-130 की रफ़्तार से गेंद कर रहे है जो शायद ही टी-20 जैसे बल्लेबाज़ों के लिए ही बने प्रारूप में प्रभावी हो. हार्दिक पांडया ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ गेंदबाज़ी नहीं की जिससे टीम का गेंदबाज़ी संयोजन बिगड़ गया, जबकि विश्व कप से पहले कहा गया था कि वह गेंदबाज़ी भी करेंगे.

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न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ उनसे दो ओवर कराना आँख में धूल झोंकने जैसा था. साफ़ पता चल रहा था कि उनसे ज़बरदस्ती गेंदबाज़ी करवाई जा रही है. एक खब्बू स्पिनर अक्षर पटेल एक अच्छे चयन के रूप में टीम में शामिल थे, उन्हें भी बाद में टीम से हटाकर शार्दूल ठाकुर को शामिल कर लिया गया. रहे मोहम्मद शमी. तो वह अपनी फ़ॉर्म में नहीं दिखे और जब उन्होंने वापसी की तब तक सब कुछ समाप्त हो चुका था.

आख़िरकार जब टूर्नामेंट से बोरिया बिस्तर समेट लेने का समय आया तो कप्तान विराट कोहली को आर अश्विन टीम में दिखाई दिए. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ चार ओवर में केवल 14 रन देकर दो और अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ एक विकेट लेकर अपनी उपयोगिता भी शामिल की लेकिन वह देर आयद दुरुस्त आयद वाली कहावत सही साबित नहीं कर सके क्योंकि वह पाकिस्तान और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अंतिम ग्यारह में नहीं थे.

भारत को जसप्रीत बुमराह ने भी बहुत निराश किया क्योंकि शुरूआत दो मैचों में ना तो उनके यॉर्कर प्रभावी थे और ना ही बाउंसर.

5. बल्लेबाज़ों की नाकामी ले डूबी

विराट कोहली और सूर्य कुमार यादव

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यह बात सही है कि अगर भारत के शुरुआती मुक़ाबले अफ़ग़ानिस्तान, स्कॉटलैंड या नामीबिया के ख़िलाफ़ होते, तो शायद भारत के बल्लेबाज़ केएल राहुल, रोहित शर्मा और विराट कोहली के अलावा ऋषभ पंत अपने खाते में कुछ अच्छी पारियों के साथ बचे हुए मैच खेलते, लेकिन पहले तो पाकिस्तान और उसके बाद न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ उनकी नाकामी टीम पर भारी पड़ी.

पाकिस्तान के ख़िलाफ केएल राहुल और रोहित शर्मा बड़ी पारी खेलने से चूक गए जिसका असर मध्यम क्रम पर पड़ा और वह दबाव में बिखर गया.

विराट कोहली और ऋषभ पंत ने विकेट पर जमकर रन तो बनाए, लेकिन वह रनों की रफ़्तार को तेज़ नहीं कर सके. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ तो टीम केवल 110 रन ही बना सकी.

नतीजा अफ़ग़ानिस्तान और स्कॉटलैंड के ख़िलाफ़ रोहित शर्मा और केएल राहुल की ज़ोरदार पारियाँ भी भारत के काम नहीं आई. दरअसल इस विश्व कप में भारत की नाकामी की पहली वजह टीम की कमज़ोर बल्लेबाज़ी रही ख़ासकर पहले दो मैच में.

6. विराट कोहली और रवि शास्त्री को लेकर फ़ैसले

विराट कोहली और रवि शास्त्री

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सबको मालूम था कि इस विश्व कप के बाद भारत का कोचिंग स्टॉफ़ बदला जाएगा, जिसमें हेड कोच रवि शास्त्री भी शामिल है और टूर्नामेंट के दौरान ही उनकी जगह पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ के नाम की घोषणा भी हो गई.

इंग्लैंड में खेली गई क्रिकेट सिरीज़ के दौरान ही यह भी तय हो गया कि ट्वेंटी-20 क्रिकेट में विराट कोहली आख़िरी बार भारत की कप्तानी करते दिखेंगे.

विराट कोहली ने इसके बाद आईपीएल में अपनी फ्रैंचाइज़ी रॉयल चैलेंजर्स की कप्तानी छोड़ने का भी एलान कर दिया. उनकी टीम आईपीएल जीतने में नाकाम रही तो भारतीय टीम भी विश्व कप में उन्हें खिताबी जीत का तोहफ़ा देने में नाकाम रही.

दबी आवाज़ में यह भी कहा जा रहा है कि टीम के अधिकतर सीनियर खिलाड़ी उनके व्यवहार से आहत है. ख़ुद विराट कोहली ने इंग्लैंड में दूसरा टेस्ट मैच हारने के बाद कहा था कि टीम के कुछ खिलाड़ी अपनी पूरी ताक़त या क्षमता के साथ नहीं खेल रहे है.

ज़ाहिर है इससे साफ़ साफ़ पता चलता है कि कोच रवि शास्त्री का हटना और विराट कोहली का विश्व कप के बाद कप्तानी छोड़ने का निर्णय टीम में नकारात्मकता भर गया. शायद इससे कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली निर्णय लेने की क्षमता ही खो बैठे. टीम के चयन और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ थोक में टीम में बदलाव इसे दर्शाता भी है.

7. टीम पर आईपीएल की थकान हावी थी

जसप्रीत बुमराह

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भारतीय टीम के अहम खिलाड़ी और तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह ने विश्व कप के दौरान प्रैस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि टीम लंबे समय से बायोबबल में रहने के कारण मानसिक रूप से थकी हुई है.

लेकिन गेंदबाज़ तो छोड़िए बल्लेबाज़ तक थकान से भरे दिखे और आईपीएल के दौरान ही इसकी झलक दिख गई थी. संयुक्त अरब अमीरात में आईपीएल के दूसरे चरण में सूर्य कुमार यादव, ईशान किशन, रोहित शर्मा, आर अश्विन, हार्दिक पांडया, भुवनेश्वर कुमार और राहुल चहर अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे और वह अपनी उसी फ़ॉर्म और फ़िटनेस के साथ विश्व कप खेले.

थके तन-मन से विश्व कप जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट चमत्कार के भरोसे ही जीते जाते हैं और वह भी जब टीम ख़ुद के नहीं अफ़ग़ानिस्तान के परिणाम पर निर्भर जैसी स्थिति में पहुँच जाए.

ख़ैर इस विश्व कप में तो भारत का अभियान समाप्त हो गया है लेकिन इत्तेफ़ाक़ से अगला टी-20 विश्व कप भी ऐसे ही हालात के बीच खेला जाएगा जब पहले आईपीएल और बाद में विश्व कप होगा. क्या तब बीसीसीआई अपने खिलाड़ियों को आईपीएल से दूर रखकर तरोताज़ा होकर खेलने का मौक़ा देगा जैसा इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ियों ने किया.

इस विश्व कप में सेमीफ़ाइनल से पहले ही भारत का बाहर होना कप्तान विराट कोहली का आईसीसी के किसी भी टूर्नामेंट के जीतने के सपने को भी तोड़ गया.

वह साल 2017 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में पाकिस्तान और साल 2019 के आईसीसी विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड से हारे. इसे नियति की विडम्बना ही समझिए की अब भी पाकिस्तान और न्यूज़ीलैंड ने ही उनके ख़्वाब में ख़लल डाली है.

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