टी- 20 वर्ल्ड कप: आखिरी मैच से पहले ही बंध गया भारत का बोरिया बिस्तर

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
विराट कोहली की अगुआई वाली भारतीय टीम का नामीबिया से आखिरी मैच खेलने से पहले ही टी-20 विश्व कप से बोरिया बिस्तर बंध गया.
वैसे भी जब कोई टीम अपने प्रदर्शन के बजाय दूसरी किसी टीम के प्रदर्शन पर निर्भर हो तो इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ता है.
भारत को सेमीफाइनल की संभावना बनाने के लिए अफगानिस्तान को न्यूजीलैंड को फतह करना जरूरी था.
और यह काम उसके अथक प्रयासों के बाद भी संभव नहीं हो सका.

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न्यूजीलैंड की जीत ने तोड़ी उम्मीदें
न्यूजीलैंड ने अपने आखिरी ग्रुप मैच में अफगानिस्तान को आसानी से आठ विकेट से हराकर सेमीफाइनल में खेलने का अधिकार बनाकर भारत के आखिरी मैच के महत्व को खत्म कर दिया.
कप्तान केन विलियम्सन और कॉनवे ने क्रमश: नाबाद 40 और 36 रन की पारी खेलकर जीत में अफगान गेंदबाजों को बाधा नहीं बनने दिया.
अफगानिस्तान के बल्लेबाज कीवी अटैक के सामने सिर्फ 124 रन बना सके. उस समय ही स्थिति काफी हद तक साफ हो गई थी.
न्यूजीलैंड ने एक बार फिर दिखा दिया कि उनकी टीम में भले ही सुपरस्टार नहीं हैं पर वह एक इकाई के रूप में खेलकर आईसीसी चैंपियनशिपों में हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रही है.

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भारत-नामीबिया मैच के कोई मायने नहीं
अगर अफगानिस्तान यह मैच जीत जाता तो भारत के आखिरी मैच के मायने एकदम से बढ़ जाते. लेकिन अब ग्रुप की दो टीमों का सेमीफाइनल में पहुंचने से अब इस मैच की सिर्फ अैपचारिकता निभाई जाएगी.
भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा से एक दिन पहले पूछा गया था कि अगर अफगानिस्तान न्यूजीलैंड को नहीं हरा पाया तो, इस पर जडेजा ने कहा कि तो क्या, बैग पैक करके घर जाएंगे.
विश्व कप शुरू होने से पहले यह माना जा रहा था कि भारतीय टीम को सेमीफाइनल में स्थान बनाने में शायद ही कोई दिक्कत हो, क्योंकि ग्रुप भारत के अलावा पाकिस्तान और न्यूजीलैंड ही मजबूत टीमें थीं.
लेकिन भारतीय टीम शुरुआती मैचों में अपनी छवि के अनुरूप प्रदर्शन करने में एकदम से असफल रही. वह शुरुआत में पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के हाथों हारने के झटके से कभी उभर ही नहीं सकी.

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भारत के रंगत पाने से पहले ही ट्रेन छूट गई
भारतीय टीम ने अफगानिस्तान के खिलाफ खेले तीसरे मैच से रंगत में खेलना शुरू किया और तब तक सही मायनों में ट्रेन छूट चुकी थी.
इस मैच से भारतीय गेंदबाजों को विकेट मिलने शुरू हो गए और रोहित, राहुल और विराट के बल्ले से भी रन निकलने लगे.
इसके अलावा जिस हार्दिक पांड्या को लेकर टीम चयनकी आलोचना हो रही थी, वह भी रंगत में खेलने लगे.
यही नहीं हार्दिक के गेंदबाजी नहीं करने से भारत को पांच गेंदबाजों के साथ खेलने को मजबूर होना पड़ा.
लेकिन इन मैचों से वह गेंदबाजी भी करने लगे और इससे गेंदबाजी भी संतुलित नजर आने लगी.

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पाक और न्यूजीलैंड खेली चैंपियनों की तरह खेली
इस विश्व कप में पाकिस्तान ने चैंपियनों की तरह खेल की शुरुआत की.
इसमें उसकी कप्तान बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान की ओपनिंग जोड़ी के अलावा हैरिस रउफ और शाहीन शाह आफरीदी की पेस जोड़ी ने अहम भूमिका निभाई.
इस तालमेल से उसे भारत और न्यूजीलैंड पर जीत पाने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई.
वहीं न्यूजीलैंड ने पाकिस्तान से हारने के बाद बाकी सभी मैचों में दबदबे वाला प्रदर्शन करके अपनी राह बनाई.

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टीम में बाएं हाथ के पेस गेंदबाज की कमी खली
हम यदि विश्व कप में बाएं हाथ के पेस गेंदबाजों के प्रदर्शन को देखें तो उन्होंने अपनी टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई.
इस तरह के गेंदबाजों में शाहीन आफरीदी और ट्रेंट बोल्ट के नाम लिए जा सकते हैं.
लेकिन भारतीय टीम में बाएं हाथ का पेस गेंदबाज शामिल नहीं करना खलने वाला रहा. इन पेस गेंदबाजों ने अंदर गेंद को लेकर बल्लेबाजों को परेशान किया.

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शुरुआत में ही टफ मैच मिलने से भी हुई मुश्किल
भारत को अभियान की शुरुआत पाकिस्तान और फिर न्यूजीलैंड से खेलकर करनी पड़ी.
इन मैचों के दौरान भारतीय गेंदबाज और बल्लेबाज बिलकुल भी रंगत में नजर नहीं आए.
भारतीय गेंदबाजों ने पहले दो मैचों में सिर्फ दो विकेट निकाले. इस तरह के प्रदर्शन से कोई भी टीम जीत की उम्मीद कर भी कैसे सकती है.
भारतीय बल्लेबाजी हमेशा ही ओपनर रोहित शर्मा और केएल राहुल के अलावा कप्तान विराट कोहली के प्रदर्शन पर निर्भर रही है.
लेकिन पहले दो मैचों में इस तिकड़ी के बल्ले से रन नहीं निकल सके और भारतीय अभियान को ऐसा तगड़ा झटका लग गया, जिससे वह कभी उभर ही नहीं सका.

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वरुण का उम्मीदों पर खरे नहीं उतरना
वरुण चक्रवर्ती को मिस्ट्री गेंदबाज माना जा रहा था पर वह आईपीएल की तरह इस विश्व कप में अपना जलवा नहीं बिखेर सके.
वह असल में तीन-चार अच्छी गेंदें ओवर में फेंकने के बाद एक ढीली गेंद फेंककर कभी दवाब बनाते नजर नहीं आए.
सही मायनों में अंतरराष्ट्रीय मैचों को खेलने का अनुभव नहीं होना उनके अच्छे प्रदर्शन में बाधा बना.
सही टीम का चयन नहीं कर पाने ने भी भारत की उम्मीदों को भी तोड़ा. पहले दो मैचों में अपने सबसे अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का नहीं खिलाना खलने वाला रहा.
उन्हें जब अफगानिस्तान के खिलाफ खिलाया गया तो उन्होंने अपने पहले स्पैल में ही जलबा बिखेरकर टीम प्रबंधन की गलती को सामने ला दिया.

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पाकिस्तान के मैच से होगी सेमीफ़ाइनल की तस्वीर साफ़
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप एक से पहले ही सेमीफाइनल में स्थान बना चुकी हैं. अब ग्रुप दो से पाकिस्तान और न्यूजीलैंड का सेमीफाइनल में जाना तो तय हो गया.
लेकिन ग्रुप में पहली और दूसरी टीम का फैसला पाकिस्तान और स्कॉटलैंड के मैच से होगा.
पाकिस्तान यदि यह मैच जीतता है तो वह पहले स्थान पर रहेगा और स्थिति में उसका सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मुकाबला होगा.
वहीं पाकिस्तान के हारने पर नेट रन रेट से पहली और दूसरी टीम का फैसला होगा. इस ग्रुप की दूसरे नंबर की टीम इंग्लैंड से खेलेगी.
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