रोहित शर्मा को क्यों सौंपी गई विराट कोहली के बाद टीम इंडिया की कमान

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
रोहित शर्मा को विराट कोहली की जगह पर न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ खेलनेवाली भारत की टी20 टीम का कप्तान बनाया गया है. तीन मैचों की सिरीज़ का पहल मैच 17 नवंबर को जयपुर में खेला जाएगा.
विराट कोहली ने टी-20 की कप्तानी छोड़ने का ऐलान पहले ही कर दिया था. सितंबर में उन्होंने अपने बयान में कहा था कि वे टी-20 विश्व कप के बाद कप्तानी छोड़ देंगे.
उनके इस एलान के कुछ दिनों बाद भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा था कि रोहित शर्मा कोहली की जगह ले सकते हैं. उन्होंने साथ ही एक स्पोर्ट्स चैनल से कहा था कि रोहित शर्मा अगले दो विश्व कप के लिए भारत के कप्तान हो सकते हैं
गावस्कर ने कहा,"अगला टी-20 विश्व कप अगले साल ही होना है. उसके एक साल बाद एकदिवसीय विश्व कप भी होगा यानी एक के बाद एक लगातार. ऐसी स्थिति में कप्तानी में बहुत अधिक बदलाव करना ठीक नहीं है. केएल राहुल टीम के उप-कप्तान बन सकते हैं."
सुनील गावस्कर ने बातचीत के दौरान ये भी कहा था कि ऋषभ पंत जिस तरह से इस बार आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी कर रहे हैं और अपने गेंदबाज़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे भी उन्हें समझदार कप्तान साबित करता है. क्रिकेट में वैसे भी परिस्थितियों के अनुसार जल्दी फ़ैसले लिए जाते हैं, जिस पर वे खरे उतरते हैं. ऐसे में केएल राहुल के साथ पंत भी टीम के उपकप्तान बन सकते हैं.
वैसे किसी भी टीम में उप-कप्तान की भूमिका तब तक महत्वपूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक वह कप्तान ना बन जाए. महेंद्र सिंह धोनी के कप्तानी छोड़ने के बाद ही विराट कोहली की कप्तान के रूप में क्षमताओं का पता चला. यही बात अजिंक्य रहाणे के बारे में भी कही जा सकती है.
भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वे टीम के उपकप्तान थे, लेकिन एडिलेड में पहले टेस्ट मैच में दूसरी पारी में 36 रन पर ऑलआउट होने और नियमित कप्तान विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद जिस अंदाज़ में उन्होंने भारत की कप्तानी की और सिरीज़ जीताई, उससे वे सबकी आँखों का तारा बन गए.
विराट कोहली ने अब बीसीसीआई के सबसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट आईपीएल की कप्तानी छोड़ने का फ़ैसला भी किया है. ज़ाहिर है उन पर कप्तानी का दबाव पड़ रहा था ख़ासकर उनकी बल्लेबाज़ी पर. पिछले दो साल से उनके बल्ले से टेस्ट मैच, एकदिवसीय और टी-20 में कोई शतक नहीं निकला.
वह अपनी कप्तानी में भारत को ना तो न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप का फ़ाइनल जिता पाए और ना ही आईसीसी एकदिवसीय विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफ़ी. इसके अलावा उनकी कप्तानी में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलौर ने एक बार भी आईपीएल का ख़िताब नहीं जीता.

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विराट कोहली ने अभी तक 50 टी-20 मुक़ाबलों में भारत की कप्तानी की है, जिनमें से 30 मैच उन्होंने जीते और 16 में हार मिली. दो मैच टाई रहे और दो में कोई परिणाम नहीं निकला.
दूसरी तरफ़ रोहित शर्मा ने अभी तक भारत के लिए 10 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों में भारत की कप्तानी की है, जिनमें से भारत ने 8 जीते और दो हारे. इसके अलावा उन्होंने 19 टी-20 मैचों में भी भारत की कप्तानी की, जिनमें वे 15 में जीते और चार में हारे.
रोहित शर्मा की कप्तानी का लोहा मानते हुए उनकी सबसे ज़्यादा चर्चा की वजह उनकी कप्तानी में मुंबई इंडियंस का पाँच आईपीएल ख़िताब जीतना भी है. उनकी कप्तानी में मुंबई इंडियंस ने साल 2013-2015-2017-2019 और 2020 में आईपीएल जीता.
रोहित शर्मा को कप्तान बनाए जाने की सुनील गावस्कर की बात को लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन कहते हैं कि सबकी तरह शायद शायद सुनील गावस्कर की भी सोच यही है कि सफ़ेद गेंद और लाल गेंद के लिए क्रिकेट में अलग अलग कप्तान होने चाहिए.
विराट कोहली ने विश्व कप के बाद टी-20 में कप्तानी छोड़ने की बात करते हुए ये भी इशारा किया कि वह एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट में कप्तान बने रहेंगे. दुनिया में कुछ टीमों जैसे पाकिस्तान में बाबर आज़म तीनों प्रारूप में कप्तान है, ऑस्ट्रेलिया में एरॉन फ़िंच एकदिवसीय और टी-20 में टीम के कप्तान हैं, लेकिन टेस्ट में टिम पेन हैं. इंग्लैंड के जो रूट टेस्ट में और इयॉन मॉर्गन सफ़ेद बॉल क्रिकेट में टीम की कप्तानी करते है.

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इनमें कुछ कप्तान कामयाब हैं कुछ नाकाम है. अब साल 2022 में टी-20 विश्व कप और 2023 में एकदिवसीय विश्व कप है तो दोनों प्रारूप में एक ही कप्तान हो तो ठीक है क्योंकि इन दोनों प्रारूप में खिलाड़ियों का एक पूल सा बन जाता है. अब यह सही नहीं है कि टेस्ट में अलग कप्तान हो, एकदिवसीय में कोई और टी-20 में भी कोई दूसरा. यही बात गावस्कर कह रहे है.
विराट कोहली और रोहित शर्मा की कप्तानी की तुलना करते हुए अयाज़ मेमन कहते हैं कि दोनों की कप्तानी का अंदाज़ और सोच अलग है. विराट कोहली बेहद उच्च स्तर की ऊर्जा में भरोसा करते हैं, जोश के साथ मैदान में उतरते हैं. रोहित शर्मा रणनीति और तरकीब के साथ कप्तानी करते है. उन्हें देखकर लगता ही नहीं है कि वह कप्तानी कर रहे हैं लेकिन दृश्य के पीछे बहुत कुछ करते है.
उनकी कप्तानी में मुंबई ने पाँच बार आईपीएल जीता है, भारत ने एशिया कप जीता है, इसलिए सबको लगता है कि रोहित को कप्तान होना चाहिए. अब यह तो परिणाम ही बताएगा कि कौन बेहतर कप्तान हैं लेकिन विराट को मौक़ा मिल चुका है. वह 2019 के विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में हारे. 2017 की चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में पहुंचे लेकिन ट्रॉफ़ी नहीं मिली.
यही वजह है कि इस बार टी-20 विश्व कप में महेंद्र सिंह धोनी को टीम का मेंटॉर बनाया गया है. इसके साथ ही सबको लग रहा है कि वह अपनी कप्तानी छोड़कर अपनी बल्लेबाज़ी पर अधिक ध्यान दें. यह टेस्ट क्रिकेट में उनके और भारत के लिए ज़्यादा बेहतर रहेगा.
आईपीएल के पाँच ख़िताब रोहित के पास होना और विराट का ख़ाली हाथ होना भी क्या एक कारण है? इसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि हालाँकि आईपीएल एक धरेलू टूर्नामेंट है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत ज़्यादा है. यह बेहद लोकप्रिय है और इसकी चर्चा इसके शुरू होने से दो महीने पहले और बाद में भी होती रहती है. ऐसे में अगर कोई पाँच बार ख़िताब जीते, तो सब कहते ही हैं कि इनकी कप्तानी के कारण टीम जीती.
उनकी कप्तानी से पहले मुंबई ने ख़िताब नहीं जीते थे. विराट ने कोई ख़िताब नहीं जीता है इसलिए तुलना तो होगी ही. आईपीएल में मिली कामयाबी से ही रोहित शर्मा को कप्तान बनाए जाने की माँग तेज़ हो रही है.
तो क्या अब एकदिवसीय में भी रोहित को कप्तान बनाने की बात शुरू होगी?
इसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि गावस्कर भी इस बात को कह रहे हैं कि लगातार दो विश्व कप हैं, 2022 में टी-20 और 2023 में एकदिवसीय. ऐसे में अगर दोनों में अलग-अलग कप्तान होंगे, तो कप्तानी भी आगे पीछे चलती रहेगी. वैसे यह नहीं भूलना चाहिए कि विराट कोहली ने लंबे समय से भारत की कप्तानी की है और उनके आँकड़े बहुत बुरे नहीं बल्कि बेहतरीन है, बस उन्होंने ख़िताब नहीं जीते.

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टी-20 में तो वे धोनी से बेहतर कप्तान साबित हुए, लेकिन सब ख़िताब याद रखते हैं. रोहित शर्मा का कप्तान के तौर पर भी घरेलू स्तर और आईपीएल में शानदार रिकार्ड है. वे बल्लेबाज़ी में भी दमदार है. वैसे रोहित शर्मा, विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह और शायद रविंद्र जडेजा, यह वह चार खिलाड़ी हैं जिनकी जगह तीनों प्रारूपों में पक्की है. फ़िर रोहित शर्मा के पास पिछले 10 से ज़्यादा साल से मुंबई और छह सात साल से आईपीएल में कप्तानी का अनुभव है.
रोहित शर्मा और विराट कोहली के बीच प्रतिद्वंद्विता पर अयाज़ मेमन मानते हैं कि बड़े खिलाड़ियों में आपस में प्रतिद्वंद्विता तो होती ही है. क्रिकेट का इतिहास उठाए तो डॉन ब्रैडमैन की भी कप्तान रहते आलोचना होती थी कि वह दूसरे खिलाड़ियों की परवाह नहीं करते थे, और उनका ध्यान नहीं रखते थे. आजकल जो चैंपियन खिलाड़ी हैं या जिनका प्रदर्शन शानदार रहता है उनके बीच ऐसा होना तो आम है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि अगर रोहित शर्मा कप्तान हैं तो विराट कोहली हल्का प्रदर्शन करेंगे.
इसका जीता जागता उदाहरण इंग्लैंड में सबने देखा कि कैसे विराट की कप्तानी में रोहित शर्मा ने टेस्ट सिरीज़ में सबसे ज़्यादा रन बनाए और एक टेस्ट मैच जिताने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आम जीवन में भी सबकी कुछ लोगों से बनती है कुछ से नही, परिवार में भी ऐसा होता है. इनमें किस हद तक बन रही है या नहीं कहना मुश्किल है लेकिन अगर बन भी नहीं रही है तो एक उदाहरण यह भी है कि सबने सुना कि गावस्कर और कपिल की भी नहीं बनी. लेकिन एक ने सर्वाधिक शतक के साथ रिकार्ड 10,122 रन बनाए तो एक ने यानी कपिल देव ने रिकार्ड 434 विकेट लिए. अगर प्रदर्शन शानदार हो तो आपसी ख़राब संबंध मायने नहीं रखते.
अपनी पसंद के खिलाड़ियों के टीम में ना चुने जाने से कोहली की नाराज़गी की रिपोर्ट पर अयाज़ मेमन मानते हैं कि ऐसी बहुत सी चीजें हवा में फैली हैं कि इस वजह से या उस वजह से उन्होंने कप्तानी छोड़ी. उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी उनकी अपनी बल्लेबाज़ी की ख़राब फ़ॉर्म थी. दो साल से उनसे बड़े स्कोर नहीं बने. कोई भी पहले खिलाड़ी हैं बाद में कप्तान.
(ये रिपोर्ट मूल रूप में 1 अक्टूबर 2021 को प्रकाशित रिपोर्ट का संशोधित संस्करण है)
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