पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहम्मद रिज़वान का इलाज करने वाले डॉक्टर का इंडिया कनेक्शन

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- Author, अब्दुल रशीद शकूर
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी उर्दू
टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में ताबड़तोड़ अर्धशतक बनाने वाले पाकिस्तान के विकेटकीपर मोहम्मद रिज़वान उस मैच से ठीक पहले क़रीब 36 घंटे आईसीयू में थे.
नौ नवंबर की सुबह बीमार पड़ने के बाद दुबई के एक अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था.
जब वे अस्पताल लाए गए थे तो उनकी स्थिति कैसी थी इस बारे में उनका इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताया है कि जब रिज़वान अस्पताल लाए गए थे तो उनकी हालत ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं यह 'दिल का दौरा' तो नहीं है.

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रिज़वान का इलाज दुबई के मेडियार अस्पताल के डॉ. सेहिर सेन उल-अबिदीन ने किया.
उन्होंने बीबीसी उर्दू को बताया, "जब रिज़वान को अस्पताल लाया गया तो उनके सीने में तेज़ दर्द था. मेडिकल शब्दों में दर्द के पैमाने को आंका जाए तो ये दस में से दस का स्कोर था. दर्द रिज़वान के लिए असहनीय था, लिहाजा तुरंत जाँच की गई कि कहीं यह दिल का दौरा तो नहीं है."
डॉ सेहिर ने इलाज के बारे में बताया, "गले में संक्रमण के कारण उनका गला और सांस की नली संकुचित हो गई थी. आईसीयू में दवाओं की मदद से सीने के दर्द को कम करने की कोशिश की गई फिर उन्हें आईसीयू में ही भर्ती किया गया."
डॉ. सेहिर के मुताबिक, इस दौरान मोहम्मद रिज़वान ने काफी पॉज़िटिव रिस्पांस दिखाया जिससे उनकी स्थिति में तेज़ी से सुधार हुआ.
रिज़वान की सबसे बड़ी ताक़त जो डॉ. सेहिर ने देखी, वह था उनका बुलंद हौसला.

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डॉक्टर ने बताया, "वे कह रहे थे कि उन्हें टीम में वापस जाना है और मैच खेलना है. ऐसी स्थिति में किसी मरीज़ को ठीक होने में आमतौर पर पांच से सात दिन लगते हैं, लेकिन रिज़वान की स्थिति में अविश्वसनीय सुधार हुआ."
डॉ. सेहिर इसका श्रेय मोहम्मद रिज़वान की इच्छा शक्ति और उनकी धार्मिक आस्था को देते हैं.
जब डॉ. सेहिर से पूछा गया कि क्या 36 घंटे तक आईसीयू में रहने वाले खिलाड़ी को मैच खेलने की अनुमति देना सही फ़ैसला था, तो उन्होंने जवाब दिया कि मोहम्मद रिज़वान को तब तक अस्पताल छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई थी जब तक कि डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति से संतुष्ट नहीं हो गई थी.
उन्होंने बताया, "अस्पताल से बाहर जाते समय उन्हें कई तरह की दवाइयां भी दी गईं ताकि मैच से पहले और खेल के दौरान उनका इस्तेमाल कर सकें. जहां तक उनके खेलने की बात है तो बेशक पाकिस्तान टीम के मेडिकल पैनल ने सभी पहलुओं से संतुष्ट होकर ही उन्हें मैच में उतारने का फ़ैसला लिया होगा."
डॉ. सेहिर ने बताया है कि अस्पताल में खेल में चोटिल खिलाड़ियों को अक्सर ही इलाज के लिए लाया जाता रहा है लेकिन अपने करियर में पहली बार उन्होंने इस हालत में किसी क्रिकेटर का इलाज किया था.

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रिज़वान ने दिया तोहफ़ा
अस्पताल से निकलने के बाद मोहम्मद रिज़वान ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल मैच में जिस तरह की आक्रामक बल्लेबाज़ी की और छक्के लगाए, उससे डॉ सेहिर सेन उल अबिदीन बेहद खुश हैं.
मोहम्मद रिज़वान ने डॉ. सेहिर का शुक्रिया अदा करते हुए उन्हें पाकिस्तान टीम की अपनी टी-शर्ट विशेष रूप भेंट की. इसके बारे में डॉ. सेहिर ने बताया कि वह टी-शर्ट को फ्रेम कराकर रखेंगे ताकि उनके बच्चे और पोते भी इसे देख सकें.
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पोते-पोतियां हैं, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि वह अब 40 साल के हो गए हैं और उनका एक बेटा और एक बेटी है.
डॉ. सेहिर ने कहा कि मोहम्मद रिज़वान वैसे भी उनके पसंदीदा बल्लेबाज़ हैं. उन्हें रिज़वान की बल्लेबाज़ी और उनका हमेशा मुस्कुराते रहना पसंद है लेकिन अस्पताल के नियमों की वजह से वे अपने पसंदीदा बल्लेबाज़ के साथ कोई तस्वीर नहीं ले सके.
डॉ. सेहर सेन उल अबिदीन भारत में केरल से हैं. वे पिछले छह साल से यूएई में रह रहे हैं. वे ख़ुद एक क्रिकेट फैन हैं लेकिन कोविड की मौजूदा स्थिति के चलते मैदान में जाकर टी-20 वर्ल्ड कप के मैच नहीं देख पाए.
अपने नाम के बारे में उनका कहना है कि जैसे ज़हीर और ज़ैन-उल-अबिदीन पाकिस्तान में लिखे और बोले जाते हैं, वैसे ही 'ज़ेड' के बजाय एस का इस्तेमाल किया जाता है और इसीलिए उनका नाम सेहिर सेन-उल-अबिदीन है.
उन्होंने यह भी बताया कि उनका अस्पताल वीपीएस मेडल ग्रुप का हिस्सा है, जिसने आईपीएल और टी20 वर्ल्ड कप के दौरान बायो-सिक्योर बबल विकसित किया है.
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