'रेलवे में सर्ज प्राइसिंग दिनदहाड़े चोरी है'

भारतीय रेल

इमेज स्रोत, THINKSTOCK

भारतीय रेल में ऐप आधारित टैक्सी और हवाई टिकटों की तरह रेल टिकटों पर भी फ्लेक्सी फेयर सिस्टम, चढ़ते दामों वाला तरीक़ा अपनाया जाएगा.

फिलहाल इस नए तरीक़े को राजधानी, दुरंतो और शताब्दी पर लागू किया जाएगा. जैस-जैसे अधिक टिकट बिकते जाएंगे किराए में उसी आधार पर बढ़ोतरी होती जाएगी.

10 प्रतिशत सीटें बुक होने पर टिकटों के दाम भी 10 प्रतिशत बढ़ जाएंगे.

ये नियम फ़र्स्ट क्लास और एग्जीक्यूटिव क्लास पर लागू नहीं होगें. ये सिर्फ़ सेकेंड क्लास, स्लीपर, सेकंड एसी और चेयर कार के किरायों पर लागू होगें. हालांकि थर्ड एसी में 40 प्रतिशत सीटों के बुक होने के बाद ही उसके टिकटों के किराए में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी.

किराए की इस फ्लेक्सी प्रणाली को ले कर भारत में सोशल मीडिया पर लोग बहस कर रहे हैं. surge price यानि सर्ज प्राइस ट्रेंड कर रहा है और लोग इस पर टिप्पणी कर रहे हैं.

रेल किराए में सर्ज प्राइस प्रणाली पर चर्चा

ट्विटर पर दीपक शर्मा ने रेल मंत्रालय से सवाल किया है, “क्या ट्रेनों में सर्ज प्राइस ले कर आना उपभोक्ताओं के साथ अन्य़ाय नहीं है?”

विरल शाह ने लिखा, “सुरेश प्रभु जी, निवेश के लिए पैसा जुटाने की आपकी कोशिशों की तारीफ़ करता हूं लेकिन आप इस तरह किरायों में बढ़ोतरी कर के आम लोगों को परेशान न करें.”

रेल किराए में सर्ज प्राइस प्रणाली पर चर्चा

अंकित कुमार लिखते हैं, “सर्ज प्राइसिंग वहां ठीक हैं जहां प्रतियोगिता हो, लेकिन एकाधिकार वाले बाज़ार में कैसे ठीक है?”

इंडिया टीवी से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने लिखा, “आपका भी जवाब नहीं प्रभु. रेल किराया बढ़ाने का लाजवाब तरीक़ा खोजा है आपने.. जो कोई नहीं कर सका, आपने कर दिखाया. जय हो.”

रेल किराए में सर्ज प्राइस प्रणाली पर चर्चा

सर्ज प्राइस का मतलब है एक ही सुविधा के लिए लोग अलग-अलग दाम देंगे. ट्विटर पर ये कहना है सुभंकर मुखर्जी का.

नीति आयोग के अमिताभ कांत ने इस प्रणाली को सही ठहराया है. एक ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, “बढ़िया क़दम है!”

रेल किराए में सर्ज प्राइस प्रणाली पर चर्चा

इसके जवाब में सुमीत रेवाड़ी लिखते हैं, “ये किस तरह से बढ़िया क़दम है? ओला ऊबर सर्ज प्राइस लगाएं तो आप उनके ख़िलाफ़ लड़ते हैं, लेकिन रेलवे के साथ आप इसे ठीक बताते हैं. ये तो दिनदहाड़े चोरी है. ”

रेल किराए में सर्ज प्राइस प्रणाली पर चर्चा

इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार राहुल कंवल ने ट्विटर पर लिखा, “लोग हर सप्ताह के आख़िर में लाखों रुपये मॉल में ख़र्च कर देते हैं. कुछ लोग चाहते हैं कि रेल का किराया सस्ता हो. क्यों? जब आप बाहर जाते हैं तो खर्च करते हैं ना.”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “लोग सस्ती क़ीमत पर रेल में सफ़र करना चाहते हैं लेकिन सेवाओं के लिए पैसे देना नहीं चाहते. यह नज़रिया बदलना चाहिए.”

उनके ट्वीट्स को ले कर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया और उनके बीच ट्विटर पर बहस छिड़ गई.

रेल किराए में सर्ज प्राइस प्रणाली पर चर्चा

मनीष सिसौदिया ने लिखा, "तो बुलेट ट्रेन के लिए आप राजधानी, दुरंतो जैसी गाड़ियों के यात्रियों से पैसा वसूलना चाहते हैं?"

एक अन्य टिवीट में उन्होने लिखा, “कर लीजिए जस्टिफाई. वैसे ये गाड़ियां उनके लिये भी हैं जो रिच नहीं हैं. हर आम आदमी रिच नहीं होता है.”

रेल किराए में सर्ज प्राइस प्रणाली पर चर्चा

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सर्जएक्सप्रेस हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए लिखा लिखा, “112000 करोड़ का कॉर्पोरेट ऋण मोदी सरकार माफ़ कर सकती है लेकिन आम आदमी को सर्ज प्राइस से परेशान करती है.”

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉयड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर </caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)