क्या आवाज़ से कांच टूट सकता है?

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आपने ऐसे कई क़िस्से सुने होंगे कि फलां गायक ने अपनी आवाज़ से शमां जला दी थी. किसी ने अपने सुरों से बारिश कराई. और किसी की गायकी से शीशे टूट गए थे.
आवाज़ से आग लगी हो, या बारिश हुई हो, इसका तो पता नहीं, लेकिन आवाज़ से कांच ज़रूर तोड़ा जा सकता है.
भौतिक विज्ञान के नियम इस दावे को सही बताते हैं. असल में ये एक प्रक्रिया से होता है. इसमें आवाज़ गूंजती है. जब किसी चीज़ से निकलती आवाज़ कांच को छूती है, तो कांच के अंदर कंपन पैदा होती है.
वो चीज़ क़ुदरती तौर पर कंपकंपाने लगती है. उसमें थरथराहट होने लगती है. होता ये है कि हर चीज़ एक ख़ास फ्रीक्वेंसी पर थरथराने लगती है. और जब आप आवाज़ की फ्रीक्वेंसी को उस चीज़ के कांपने की फ्रीक्वेंसी से मिला देते हैं, तो उस चीज़ की थरथराहट और तेज़ हो जाती है. और एक वक़्त में इतनी तेज़ हो जाती है कि वो चीज़ टूट जाती है.
ये कुछ इसी तरह होता है जब आप झूला झूलते किसी शख़्स को धक्का देते हैं. उसकी रफ़्तार से आप धक्का देने की ताक़त का यदि मिला दें तो झूला आगे जाकर उतनी ही रफ़्तार से आपके पास वापस आता है. ज़्यादा तेज़ रफ़्तार होने पर बहुत से लोग रुकने की अपील करने लगते हैं. वहीं ठीक से धक्का न देने पर झूले की रफ़्तार धीमी हो जाती है.
तो, आवाज़ से कांच तोड़ने के लिए पहले आपको कांच की रेज़ोनेंट फ्रीक्वेंसी पता करनी होगी. ये वो फ्रीक्वेंसी है, जिससे ग्लास का कांच कंपन करने लगता है. फिर उतनी ही फ्रीक्वेंसी की आवाज़ निकालनी होगी. इसे आप स्पीकर से निकाल सकते हैं, किसी म्यूज़िक सिस्टम से निकाल सकते हैं. या ख़ुद ही कोई गाना गाकर इतनी फ्रीक्वेंसी की आवाज़ निकाल सकते हैं.

कांच के ग्लास को तोड़ने के लिए आपको सौ डेसिबल की आवाज़ निकालनी होगी. ये घास काटने की किसी मशीन से निकलने वाली आवाज़ के बराबर है.
हालांकि ये फ़ॉर्मूला मोटे कप पर लागू नहीं होगा. शैम्पेन और वाइन पीने वाले ग्लास पतले कांच के बने होते हैं. इसीलिए उनमें जल्दी ही कंपकंपाहट पैदा की जा सकती है. कप का कांच मोटा होता है. जिस पर आवाज़ से पैदा हुई थरथराहट का कम ही असर होगा.
आपको तो पता ही होगा कि जो सबसे महंगे ग्लास होते हैं वो ज़्यादा जल्दी टूटते हैं. क्योंकि वो ज़्यादा नाज़ुक होते हैं. पुरानी चीज़ें भी ऐसे ही चटख जाती हैं.
इसीलिए पुरानी चीज़ों का ख़ास ख़याल रखा जाता है कि शोर वाली जगह पर उन्हें न रखा जाए. इसलिए अगली बार जब आप ऊंचे सुर में गाना शुरू करें तो पहले आस-पास देख लें, कहीं कांच की कोई महंगी चीज़ तो नहीं रखी है. आपके सुर से उसके चटखने का डर है.
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