जापानी 'भालू' कुमामोन कमाता है लाखों!

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- Author, नील स्टेनबर्ग
- पदनाम, बीबीसी फ्यूचर
जापान में इन दिनों एक 'भालू' बड़ी चर्चा में है. इसका नाम है कुमामोन.
ये 'भालू' इतना मशहूर, इतना लोकप्रिय हो गया है कि दूसरे देशों से लोग कुमामोन से मिलने के लिए जापान आते हैं.
असल में ये कुमामोन कोई असली भालू नहीं, ये जापानी सूबे कुमामोटो की नुमाइंदगी करने वाला एक शुभंकर है.
शुभंकर अक्सर खेलों से जोड़ दिए जाते हैं, जैसे कि ओलंपिक खेलों या एशियाई खेलों के मैस्कट. मगर कुमामोन इन सबसे बढ़कर है.
जापानी भाषा में कहें तो वो एक युरू-कियारा या अलग ही तरह का क़िरदार है.
उसकी ज़िम्मेदारी है जापान के कुमामोटो सूबे के बारे में अच्छी बातों का प्रचार करना.

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जापान में तमाम राज्यों में युरू-कियारा या कुमामोन जैसे मैस्कट के ज़रिए अपने-अपने इलाक़ों के प्रचार का चलन है.
इनके बीच बाक़ायदा मुक़ाबला भी कराया जाता है. जिससे कि साल का सबसे कामयाब युरू-कियारा चुना जाए और उसको सम्मान किया जाए.
आज की तारीख़ में कुमामोन को लेकर लोगों में ज़बरदस्त दीवानगी देखने को मिल रही है.
हाल ही में जब 14 अप्रैल 2016 को जापान में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया तो लोगों को इंसानों से ज़्यादा कुमामोन की फ़िक्र दिखी.
जब काफ़ी दिनों तक कुमामोन के ट्विटर अकाउंट से कोई ट्वीट नहीं किया गया तो, उसके दीवाने उसे तलाशने निकल पड़े थे.
उसकी सलामती के लिए ढेरों फोन कॉल आए. लोगों ने कुमामोन के लिए दुआएं मांगीं.

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कुमामोन, जिस जापानी सूबे का शुभंकर है वो बहुत सामान्य सा इलाक़ा है. वहां पर तरबूज और स्ट्रॉबेरी होती हैं.
क़रीब सात लाख़ की आबादी वाले इस सूबे में ज़्यादातर लोग खेती करते हैं.
कुमामोन की ज़िम्मेदारी, अपने इलाक़े की शोहरत पूरी दुनिया में फैलाने की है.
मगर आज से छह साल पहले तक कुमामोन को कोई जानता ही नहीं था.
साल 2010 में जापान रेलवे ने देश के मेट्रो नेटवर्क शिन्कासेन से कुमामोटो को भी जोड़ दिया.
स्थानीय लोगों को इसमें अपने इलाक़े के प्रचार का मौक़ा दिखा.
इसीलिए उन्होंने एक लोगो डिज़ाइन कराया जो कुमामोन के तौर पर दुनिया के सामने आया.

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इसका मक़सद था कुमामोटो सूबे में सैलानियों की आमद बढ़ाना.
तो जब जापान की मशहूर मेट्रो ट्रेन शिन्कासेन, पहली बार कुमामोटो पहुंची तो स्टेशन पर उसके स्वागत के लिए ख़ुद कुमामोन मौजूद थे.
उसके बाद तो कुमामोन ने कामयाबी का जो सफ़र शुरू किया तो पीछे मुड़कर नहीं देखा.
एक बार प्रचार के लिए कुमामोन के बारे में अफ़वाह फैला दी गई कि वो लापता हो गया है.
बाद में मीडिया के ज़रिए लोगों को बताया गया कि कुमामोन तो असल में जापान के बड़े शहर ओसाका गया है.
वहां से वो लोगों को अपने इलाक़े यानी कुमामोटो की सैर के लिए भेज रहा है. ये स्टंट काम आया. कुमामोन की शोहरत दूर-दूर तक फैल गई.
आज वो जापान के तमाम युरु-कियारा में सबसे ज़्यादा क़ामयाब माना जाता है.

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जापान में तमाम मैस्कट के बीच होने वाले मुक़ाबले में कई बार कुमामोन अव्वल आ चुका है.
कुमामोटो सूबे के अधिकारियों ने कुमामोन के लोगो को इस्तेमाल करने की आज़ादी तमाम कंपनियों को दे रखी है.
इसके बदले में इन कंपनियों को कुमामोटो की किसी चीज़ या किसी इलाक़े का प्रचार करना होता है.
आज कुमामोन को लेकर लोग इतने दीवाने हैं कि इसके नाम से बोतलों से लेकर, छाते, साइकिलें, मोटर बाइक तक बेची जा रही हैं.
स्थानीय प्रशासन हर साल 12 मार्च को इसका जन्मदिन मनाता है. ये वही दिन है जब शिन्कासेन मेट्रो ट्रेन पहली बार कुमामोटो पहुंची थी.
कुमामोन के जन्मदिन पर बड़ी तादाद में लोग जमा होते हैं, केक कटता है और उसे तोहफ़े दिए जाते हैं.
इसका नाम कुमामोटो के हर गली-कूचे में दिख जाता है. एक बार उसका कटआउट शहर के मेट्रो स्टेशन पर भी लगाया गया था.

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वहां इसके लिए बाक़ायदा स्टेशन मास्टर का दफ़्तर तक बनाया गया था.
एक बार कुमामोटो के प्रशासन ने इसके प्रचार के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई थी.
कुमामोन की तरफ़ से उसके मातहत ने पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए थे.
जापान की महारानी भी कुमामोन को अपने राजमहल बुलाकर मिल चुकी हैं.
जापान के अलावा हॉन्गकांग, थाईलैंड जैसे देशों में कुमामोन से जुड़ी तमाम चीज़ें बेची जा रही हैं.
इसके नाम पर सालाना अरबों रुपयों का कारोबार हो रहा है.
कई लोग सवाल उठाते हैं कि आख़िर कुमामोन लोगो की कामयाबी का राज़ क्या है?

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इसके जवाब में कुमामोन के तमाम मुरीद कहते हैं कि वो क्यूट और शरारती है.
अब नया सवाल खड़ा होता है कि आख़िर क्यूट क्या होता है? असल में क्यूट ऐसा शब्द है जो लोगों के लिए अलग-अलग मायने रखता है.
किसी को टेडी बीयर क्यूट लगता है तो किसी को गोल-मटोल बच्चे. महिलाएं अक्सर क्यूट चीज़ों पर फिदा हो जाती हैं.
ज़्यादातर क्यूट शब्द को गोल-मटोल बच्चों से जोड़ा जाता है. जिनके मोटे गाल, नन्ही सी नाक और ऐंठे हुए गोल-मटोल हाथ पैर लोगों को लुभाते हैं.
आख़िर ये क्यूट किरदार लोगों को इतना पसंद क्यों आते हैं? इसकी वजह समाज में हमदर्दी की कमी है.
बहुत से लोग होते हैं जो अकेलापन महसूस करते हैं. रात के अंधेरों में जब वो अकेले होते हैं, तो उन्हें हमदर्दी की ज़रूरत महसूस होती है.

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इसी जज़्बाती ज़रूरत को कुमामोन जैसे मैस्कट की मदद से पूरा करने की कोशिश की जाती है.
फिर आपके जज़्बातों का कारोबार शुरू हो जाता है. जैसे कि जापान में हर इलाक़े का अपना युरु-कियारा है.
तमाम कंपनियां अपने प्रचार के लिए ऐसे ही लोगो बनवाती हैं.
जैसे कि जापान में ही हैलो किटी नाम का एक टेडी बीयर ख़ूब मशहूर हुआ. जिसके नाम का कारोबार अरबों का है.
आज की तारीख़ में कमोबेश वैसी ही शोहरत कुमामोन को हासिल है. मुसीबतों में घिरे लोग हमदर्दी के लिए उसे याद करते हैं.
इसी तरह, 14 अप्रैल के भूकंप के बाद जब कुमामोन कई दिन ग़ायब रहा था, तो उसके ट्विटर हैंडल पर सवालों की बौछार हो गई थी.

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उसके क़रीब पांच लाख फॉलोवर हैं. सबका एक ही सवाल था कि कुमामोन कहां गया? उसकी सलामती के लिए दुआएं मांगी गईं.
कई दिनों तक ग़ायब रहने के बाद कुमामोन ने एक स्थानीय अस्पताल का दौरा किया. उसे देखने और उसके साथ फोटो खिंचवाने की लोगों में होड़ लग गई.
लोगों के बीच उनका सच्चा हमदर्द जो आ गया था.
(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href=" http://www.bbc.com/future/story/20160719-meet-japans-kumamon-the-bear-who-earns-billions" platform="highweb"/></link>, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)
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