कच्चे तेल की मांग से बसते-वीरान होते शहर

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- Author, क्रिस बारानियूक
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
आज कल कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट देखी जा रही है. दुनिया पर छाई आर्थिक मंदी और कच्चे तेल के बढ़ते उत्पादन के चलते कच्चे तेल की क़ीमतें तीन सालों के सबसे कम स्तर पर हैं.
पिछली एक सदी से ज़्यादा वक़्त से कच्चे तेल की मांग दुनिया की आर्थिक तरक़्क़ी की गवाही देती रही है.
मगर आपको ये जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में कच्चे तेल की मांग में उतार-चढ़ाव के साथ ही शहर बसते और वीरान होते रहे हैं.
आज कई देशों में ऐसे शहर मिल जाएंगे जो तेल की खोज से आबाद हुए और उसकी मांग कम होने पर वीरान हो गए.
अमरीका की नॉर्थ डकोटा यूनिवर्सिटी के इतिहासकार विलियम काराहर कहते हैं कि तेल के घाव पूरी दुनिया के जिस्म पर देखे जा सकते हैं.
आज आपको ऐसे ही कुछ शहरों से रूबरू कराते हैं.

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तेल के साथ किसी शहर की क़िस्मत कैसे चमकती और रूठती है, अमरीका का ये शहर इसकी सबसे बड़ी मिसाल है.
1865 में यहां तेल का बड़ा भंडार मिला था. उस वक़्त दूर-दूर से लोग यहां आकर बसे थे. एक वक़्त शहर की आबादी बीस हज़ार हो गई थी.
मगर पांच साल के भीतर ही तेल की मांग कम होने से शहर की रौनक ख़त्म हो गई.
पांच सालों में ही पिटहोल सिटी की आबादी बीस हज़ार से घटकर 237 रह गई थी.
उस वक़्त कच्चे तेल की इतनी मांग भी नहीं थी. इसी वजह से काला सोना होने के बावजूद ये शहर वीरान हो गया.

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अमरीका का कैलिफ़ोर्निया राज्य तेल के उत्पादन वाले इलाक़ों के लिए जाना जाता है. मेंट्रीविल आज की तारीख़ में पूरी तरह वीरान हो चुका है.
हालांकि इस इलाक़े को कई टीवी सीरियल्स और फ़िल्मों के सीन शूट करने के लिए इस्तेमाल किया गया, जैसे एक्स फ़ाइल्स, द ए टीम और मर्डर.
बीसवीं सदी के तीस के दशक में ही ये शहर वीरान होने की तरफ़ बढ़ चला था.
कहते हैं कि यहां के बाशिंदे जब शहर छोड़कर जाने लगे तो अपने मकान तोड़कर उसका सामान भी अपने साथ लेते गए थे.
क्योंकि उनके पास इतने पैसे भी नहीं बचे थे कि वो कहीं और जाकर अपना घर बना सकें.
आज मेंट्रीविल के क़रीब के शहर बेकर्सफ़ील्ड का भी यही हाल है क्योंकि 1930 के दशक की तरह आज फिर से तेल की मांग कम हो गई है.
बेरोज़गारी बढ़ गई है. ऐसे में तेल के कारोबार पर निर्भर शहरों को तो वीरान होना ही है.

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अमरीका का टेक्सास राज्य अपने तेल के भंडारों के लिए जाना जाता है.
तेल की खोज के साथ ही यहां कई नए शहर बसे थे. इनमें से ज़्यादातर अस्थाई बस्तियां थीं.
ऐसा ही एक शहर था ओर्ला, जहां अच्छी ख़ासी तादाद में लोग बसते थे.
यहां रहने वाली एक महिला सैंडी कंट्रीमैन ने हाल के दिनों में शहर की कुछ पुरानी तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट की हैं.
इससे मालूम होता है कि कभी ये शहर कितना गुलज़ार हुआ करता था.
लेकिन अब शहर के मकान ख़ाली पड़े हैं. चर्च में पानी रिस रहा है. दरवाज़े यूं ही खुले पड़े हैं. जंगली जानवरों का राज हो गया है.

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अमरीका के ओक्लाहोमा राज्य में ऐसे कई शहर हैं, जो कभी गुलज़ार हुआ करते थे. मगर आज उजड़ गए हैं.
ऐसा ही एक शहर था बरबैंक. पिछली सदी के बीस के दशक में यहां की आबादी तीन हज़ार के आस-पास थी.
मगर दस साल के भीतर ही अमरीका पर आर्थिक मंदी छा गई. तेल की मांग घटी तो बरबैंक शहर से लोग दूसरे इलाक़ों में जाने लगे.
आज यहां सिर्फ़ खंडहर दिखाई देते हैं. आस-पास और भी ऐसी ही वीरान बस्तियों के नमूने आपको देखने को मिल जाएंगे. इनमें थ्री सैंड्स और व्हिज़बैंग प्रमुख हैं.
विलिस्टन, नॉर्थ डकोटा

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अभी चार साल पहले की ही बात है, तेल के कारोबार से विलिस्टन शहर चमक रहा था. लोगों के पास ख़ूब पैसे थे.
ज़िंदगी में रौनक थी. आबादी इतनी तेज़ी से बढ़ रही थी कि लोगों के रहने के लिए नए मकान बनाने पड़े.
पास ही स्थित बैकेन इलाक़े से बड़ी मात्रा में तेल मिला था. लेकिन, साल भर के भीतर ही मंदी की मार का असर यहां दिखने लगा.
पिछले तीन सालों से तेल की डिमांड है ही नहीं. इसलिए यहां का तेल उद्योग अचानक ही लापता सा हो गया है.
लोगों के पास जब काम नहीं बचा, तो, वो ये शहर छोड़कर जाने लगे. आज यहां के नए बने मकान में बेघर लोगों ने बसेरा डाल रखा है.

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ब्रिटेन के स्कॉटलैंड में स्थित ये क़स्बा, बसने से पहले ही वीरान हो गया.
सत्तर के दशक में यहां तेल की खुदाई के बाद लोगों की ज़रूरत महसूस होने लगी.
तो यहां पर पांच सौ लोगों के बसने के लिए मकान बनाए गए ताकि वो पास की तेल की खान में काम कर सकें.
लेकिन यहां पर कभी भी काम नहीं शुरू हुआ और ये शहर बसने से पहले ही उजड़ गया.

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अरब देश, तेलों के बड़े भंडार के लिए जाने जाते हैं. लेकिन यहां भी तेल की मांग के साथ उतार-चढ़ाव के साथ कई शहर बसे और उजड़े हैं.
संयुक्त अरब अमीरात का अल जज़ीरा अल हमरा शहर भी ऐसा ही एक शहर है.
कभी ये शहर इंसानों से गुलज़ार हुआ करता था. साठ के दशक में यहां का बंदरगाह ख़ूब चलता था. मछली का कारोबार होता था.
तेल का निर्यात होता था. लेकिन, कुछ ही सालों में मंदी की ऐसी मार पड़ी कि यहां के बाशिंदे, शहर छोड़कर चले गए.
अमरीकी इतिहासकार विलियम काराहर कहते हैं कि तेल के कारोबार की बुनियाद पर बसे शहरों का मुस्तक़बिल ही यही है.
पहले बसना और फिर उजड़ना. तो जब तक दुनिया का पहिया तेल से चलेगा, शहर ऐसे ही बसते और उजड़ते रहेंगे.
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