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स्वात में शरिया क़ानून पर समझौता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान सरकार और सूबा सरहद की स्वात घाटी में सक्रिय तालेबान ग्रुप के बीच शांति समझौता हो गया है. इस समझौते के बाद अब स्वात घाटी में इस्लामी शरिया क़ानून लागू हो सकेगा. रविवार को ही तालेबान ने स्वात घाटी में एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा की थी. इलाक़े के अधिकारियों ने तालेबान से अपील की है कि वो स्थायी रूप से अपने हथियार डाल दें. एक समय पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही स्वात घाटी का ज़्यादातर नियंत्रण तालेबान के हाथ में है. वर्ष 2007 से इस इलाक़े में तालेबान के विद्रोह के कारण हज़ारों लोग पलायन कर चुके हैं और बड़ी संख्या में स्कूलों को भी नष्ट कर दिया गया है. सूबा सरहद के मुख्यमंत्री अमीर हुसैन होती ने घोषणा की है कि एक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ है, जिसके तहत मालाकंड डिविज़न में नई 'न्याय व्यवस्था' लागू होगी. मालाकंड डिविज़न में ही स्वात भी है. समझौता इस समझौते के कारण पूरे इलाक़े में एक अलग न्याय व्यवस्था तैयार हो जाएगी. बीबीसी संवाददाता मोहम्मद इल्यास ख़ान हाल ही में स्वात के दौरे पर थे. उनका कहना है कि तालेबान ने पहले से ही अपनी इस्लामी न्याय व्यवस्था तैयार कर रखी है. महिला शिक्षा के ख़िलाफ़ उनके अभियान के कारण ही लाखों बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है. सूबा सरहद की सरकार स्थानीय चरमपंथी नेता सूफ़ी मोहम्मद के साथ बातचीत कर रही थी ताकि स्वात में जिस शरिया क़ानून को लागू किया जा रहा है, उसमें संशोधन किया जा सके. सूफ़ी मोहम्मद तालेबान समर्थक मौलवी हैं. वे मौलाना फ़ज़लुल्लाह के ससुर हैं. मौलाना फ़ज़लुल्लाह इलाक़े में शरिया क़ानून लागू करने को लेकर हिंसक अभियान चला रहे हैं. सूबा सरहद के मुख्यमंत्री अमीर हुसैन होती ने कहा है कि सूफ़ी मोहम्मद के प्रतिनिधिमंडल के साथ समझौता हो गया है और ये एक बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने कहा, "सिफ़ारिश और प्रस्ताव तैयार हो गए हैं लेकिन वे तभी लागू होंगे तब शांति स्थापित हो जाएगी." मुख्यमंत्री होती ने कहा कि राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने भी सैद्धांतिक रूप में इन प्रस्तावों को मंज़ूर कर लिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौता किसी दबाव में नहीं हुआ है और न ही ये असंवैधानिक है. उन्होंने कहा कि ये समझने के बाद ये समझौता हुआ है कि ये जनता की मांग है. अपील आमिर हुसैन होती ने कहा कि सरकार ने वो सब किया है जो वह कर सकती थी और उन्होंने तालेबान से अपील की है कि वो हथियार डाल दे.
उन्होंने बताया कि सूफ़ी मोहम्मद के नेतृत्व में स्वात में लोया जिरगा का आयोजन किया गया है, जिसमें सभी गुटों को साथ लेने की कोशिश की जाएगी. दूसरी ओर तालेबान का कहना है कि वे दस्तावेज़ का अध्ययन करने के बाद ही स्थायी रूप से अपनी कार्रवाई रोकने पर विचार करेंगे. समाचार एजेंसी एएफ़पी से सूफ़ी मोहम्मद ने कहा, "हम 22 बिंदुओं वाली मांग को लेकर सरकार के साथ बातचीत कर रहे थे. पाँच बिंदुओं पर असहमति थी, जिसे रविवार की बैठक में हटा दिया गया." मालाकंड में शरिया क़ानून वर्ष 1994 से ही लागू है लेकिन अपील का मामला पेशावर हाई कोर्ट में जाता है, जो सिविल कोड के तहत काम करती है. |
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