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शुक्रवार, 07 दिसंबर, 2007 को 09:02 GMT तक के समाचार
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'आज से नाच-गाना बंद है...'
स्वात की एक नृत्यांगना पलवाशा
पाकिस्तान में पलशावा जैसी लड़कियों को काम करना मुश्किल होता जा रहा है
अक्तूबर की एक ठंडी रात को एक आगंतुक पाकिस्तान के उत्तरी ज़िले स्वात के मिंगोरा शहर की एक पतली गली में मौजूद एक घर का बड़ा सा स्टील का गेट खटखटाता है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता.

गेट पर लगे एक बोर्ड पर लिखा है, “आज से नाचना-गाना बंद – 8 अगस्त, 2007”

एक पड़ोसी आगंतुक के पास आता है और बताता है कि अंदर रहने वाली लड़कियों को तालेबान का पत्र मिला है जिसमें तालेबान ने उन्हें धमकी दी है कि अगर वे चाहती हैं कि उनका घर न जलाया जाए तो वे नाचना-गाना बंद कर दें.

शराब और नृत्य

मिंगोरा की संगीत गली बँढ़ के आसपास के लोग भी इस बात को सही बताते हैं. स्थानीय नृत्यांगना नसरीन के पिता फ़ज़्ल-ए-मौला कहते हैं, "यहां के दर्जनों परिवार दूसरे शहरों में जा बसे लेकिन और जिनके पास जीने का कोई और विकल्प नहीं था, वे यहीं रह गए हैं."

स्वात में 2005 से स्थानीय तालेबान ने अपना दबदबा बनाया हुआ है. अगस्त 2007 में में उन्होंने बँढ़ और आसपास के क्षेत्रों में नर्तकियों और गायकों को एक दर्जन पत्र बाँट कर काम बंद करने की धमकी दी थी और नहीं मानने पर बम हमलों का सामने करने की बात कही थी.

स्वात अपनी गोरी-ख़ूबसूरत नृत्यांगनाओं के लिए लंबे समय से जाना जाता है. ख़ासतौर पर उन लोगों के बीच जो उत्तरी पाकिस्तान में शादी या अन्य निजी पार्टियों में नृत्य करवाना चाहते हैं.

लाहौर के शाही मौहल्ला क्षेत्र की महिलाओं की तरह इस रूढ़िवादी शहर की महिलाएं यौन सेवाएं देने के रूप में कभी नहीं पहचानी गईं. स्वात में बहुत से लोग इनके घरों में सिर्फ़ नृत्य और शराब पीने के लिए ही आते हैं.

दशकों पहले से इनमें से बहुत सी लड़कियों ने ख़ुद को गुणवान रेडियो गायिका और फ़िल्म कलाकार के रूप में साबित भी किया है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनके ख़िलाफ़ खड़े हुए बवंडर ने बड़ा रूप ले लिया है.

यह दरअसल 1980 में पूर्व मिलिटरी शासक ज़िया-उल-हक़ की इस्लामीकरण की नीति से शुरू हुआ था. तभी से सामाजिक जीवन में धार्मिक लोगों का असर पड़ना शुरू हुआ. इसके बाद से शादियों में नृत्यों की लोकप्रियता कम होती गई.

2002 में पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में एक धार्मिक संगठन एमएमए सत्ता में आया जिसने ऐसे सभी कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया जिन्हें यह लड़कियाँ किया करती थीं.

पिछले दशक के अंत में ऐसी ज़्यादातर लड़कियों ने अपना नाचना-गाना बंद कर दिया.

पाक में प्रतिबंध
तालेबान का लगाया हुआ यह बोर्ड बता रहा है कि लड़कियों का नाचना प्रतिबंधित है

अड़तीस वर्षीय शाहबानो कहती हैं, "मैं तो तब तक काफ़ी उम्रदराज़ हो चुकी थी लेकिन मेरी बेटी के चाहने वाले बहुत थे लेकिन एमएमए सत्ता में आई और हमें शादियों में बुलाना भी बेहद कम हो गया. इसके अलावा जनता से बेइज़्ज़ती और गिरफ़्तारी का भी ख़तरा था."

इससे दो साल पहले मिंगोरा के बेहतरीन ड्रम बजाने वाले उसके पति बाबू की मौत हो चुकी थी. इससे परिवार में नृत्य के विरोधी उसके बेटे को अपनी बहन को यह काम बंद करने के लिए दबाव देने का मौक़ा मिल गया.

शाहबानो का बेटा शौकत अली कहता है, "मैं स्थानीय कसाई के यहाँ काम करता हूँ, पैसा बहुत नहीं है लेकिन मैं खुश हूँ कि जीवन चलाने के लिए मेरी बहन को नाचना नहीं पड़ेगा."

हिंसात्मक आंदोलन

ऐसी लड़कियाँ जो म्यूज़िक कंसर्ट और स्टेज शो करने लगीं थीं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रोक के बाद अक्सर पेशावर में पकड़ी जातीं और इस काम से बाहर कर दी जातीं.

जब क्षेत्र में होने वाले शो बंद हुए तो नाटकों, नृत्यों और गायन की सीडी और वीडियो सीडी बनाई जाने लगीं, इससे इनमें से कुछ को अल्पावधि के लिए फ़ायदा भी हुआ लेकिन तालेबान के हिंसात्मक आंदोलन ने क्षेत्र में इस व्यापार को भी ढलान पर ला दिया.

वीडियो की सैकड़ों दुकानें जला दी गई हैं. अन्य ने ख़ुद ही या तो इन्हें बंद कर दिया या किसी दूसरे व्यापार में चले गए.

आशावादी और विद्रोही

इसने ऐसी बहुत सी लड़कियों और उनके परिवारों को कुंठाग्रस्त कर दिया. दो बच्चों की माँ 26 वर्षीय नसरीन इनमें से एक है.

वह कहती है कि जब कुछ मौलवियों ने पेशावर में चार साल पहले उसका स्टेज शो देखकर प्रतिबंधित करा दिया तो वह बहुत दुखी हुई थी.

उसने कहा, "सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि घर के पुरुष – मेरे पति और ससुर- को वाद्य यंत्र बजाने के सिवाय कुछ और करना नहीं आता था."

उसे 2006 में म्यूज़िक वीडियो सीडी में काम करने के करीब छह कांट्रेक्ट मिले जिन्हें निजी स्थानों पर रिकार्ड किया जाना था.

पाक नृत्यांगना
पलवाशा बाँलीवुड के कलाकारों की नकल करती है

इससे उसे काफ़ी पैसा मिला जिससे उसने अपने पति के लिए एक वैन खरीदी. फिर भी इस काम से अनजान उसके परिवार के लिए इससे होने वाली आमदनी कम ही थी.

वह कहती है, "मिंगोरा में नाचने-गाने पर तालेबान के प्रतिबंध लगाने से पहले तक तो वह अपने घर पर ही कुछ मेहमानों को बुलाकर थोड़ा-बहुत पैसा कमा लेती थी. अब यह बहुत हो गया, नाचने का काम मैं अब और नहीं कर सकती."

लेकिन मिंगोरा की संगीत गली में अब भी बहुत से आशावादी और विद्रोही मौजूद हैं.

एक 18 वर्षीय नौसिखिया पलवाशा का कहना है, "मेरा दिल कहता है कि बेहतर समय आएगा और मैं उम्मीद करती हूँ कि तब तक मैं जीवित रहूँगी."

तालेबान के पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद पलवाशा ने ख़तरा उठाते हुए भी 20 से भी ज़्यादा सीडी नाटकों और वीडीयो नृत्यों में काम किया है.

उसने पाकिस्तान के सरकारी टीवी, पश्तो भाषा के निजी टीवी चैनल और एवीटी ख़बर के लिए गाने भी गाए हैं. तीन महीने पहले उसने पाकिस्तान के जिओ मनोरंजन टीवी चैनल के लिए बनाए गए टेलीप्ले में एक छोटा सा रोल भी किया था.

अब वह लाहौर जाना चाहती है और फ़िल्मों में काम करना चाहती है. पर उसके चाचा और अभिभावक मोहम्मद सलीम का वहाँ कोई जानने वाला नहीं है और मिंगोरा में रहना ख़तरे से ख़ाली नहीं है.

पलवाशा कहती है, "मैंने तालेबान के प्रतिबंध को हरा दिया है. कभी-कभी मुझे लगता है कि वे जानते हैं. मैं दुआ करती हूँ कि इससे पहले कि वे मुझे जला दें, मैं यहाँ से कहीं और चली जाऊँ."

(कुछ लोगों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए उनके नाम बदल दिए गए हैं.)

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