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तालेबान ने इस्लामिक अदालतें खोलीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी प्रांत के मोहमंद इलाक़े में तालेबान चरमपंथियों ने स्थायी इस्लामिक अदालतें खोल ली हैं. मोहमंद प्रांत से तालिबान के प्रवक्ता डॉ असद ने बीबीसी वेबसाइट को यह जानकारी दी है और बताया कि मोहमंद ज़िले को चार न्यायिक ज़ोन में बांटा गया है जिसमें दो-दो जज होंगे और स्थायी अदालत भी. उल्लेखनीय है कि अफ़गानिस्तान से सटी पाकिस्तान सीमा यानी सूबा सरहद के आस पास के इलाक़े में तालिबान अत्यंत प्रभावशाली है और इन इलाक़ों पर उनका पूरा कब्ज़ा माना जाता है. अब तक तालेबान की अदालतें सचल हुआ करती थीं जो घूम घूम कर आपराधिक और वित्तीय मामले सुनते थे लेकिन अब स्थायी अदालतों से साफ़ है कि इलाक़े में पाकिस्तानी सरकार की स्थिति कैसी है. डॉ असद कहते हैं,'' कुल मिलाकर आठ न्यायाधीश होंगे और एक ज़ोन में दो न्यायाधीश काम देखेंगे. इसके अलावा एक शीर्ष न्यायाधीश होंगे जिनके समक्ष अपील की जा सकेगी.'' मोहमंद कबीलाई प्रशासन के एक अधिकारी ने भी तालेबान अदालतों के होने की पुष्टि की है और कहा है कि ये अदालतें अपना काम भी कर रही हैं. उधर पाकिस्तान तालेबान मूवमेंट ( पीटीएम) के शीर्ष प्रवक्ता मौलवी उमर ने बीबीसी उर्दू सेवा को बताया है कि मोहमंद प्रांत के उत्तर में स्थित बाज़ौर प्रांत में तालिबान की स्थायी अदालतें पहले से ही चल रही हैं. उन्होंने कहा, ''बाज़ौर में हमारी न्यायिक व्यवस्था बेहतरीन है और हर दिन वहां हमारे 20 धार्मिक न्यायाधीश स्थानीय मामलों का निपटारा कर रहे हैं.'' मौलवी उमर के मुताबिक पीटीएम का फता प्रांत में सचल अदालतों का एक नेटवर्क भी सक्रिय है और ये अदालतें ज़मीन से जुड़े मामलों से लेकर पारिवारिक मामलों की भी सुनवाई करती हैं. इन अदालतों का खुलना और काम करना पाकिस्तानी सरकार के लिए शर्मिंदगी का विषय है क्योंकि ये अदालतें पूर्व में स्थानीय लोगों को अपराधों के एवज़ में क्रूर सज़ाएं सुना चुकी हैं. पिछले महीने बाज़ौर प्रांत में ऐसी ही एक तालेबान अदालत ने एक अफ़गानी व्यक्ति को अमरीका के लिए गुप्तचर के रुप में कार्य करने के आरोप में सार्वजनिक रुप से मौत के घाट उतारने की सज़ा सुनाई थी. इससे पहले ओराकाज़ी में ऐसी ही एक अदालत ने आधे दर्ज़न कथित डाकूओं को सार्वजनिक रुप से मारने की सज़ा दे दी थी. इस बीच ओराकाज़ी के पास चरमपंथियों के साथ एक मुठभेड़ के बाद चरमपंथियों ने क़रीब 20 पाकिस्तानी सैनिकों को क़ैद कर रखा है और उनका कहना है कि वो इनके बदले तालेबानों की रिहाई चाहते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'कंधार से तालेबान का सफ़ाया'19 जून, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते हमलों पर चिंता27 जून, 2008 | भारत और पड़ोस नैटो का चरमपंथी ठिकाने पर हमला12 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान पर शक ही नहीं, सबूत भी'12 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों पर बढ़ते हमले01 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस इस वर्ष तालेबान के हमलों में तेज़ी संभव28 जून, 2008 | भारत और पड़ोस 'अफ़ीम से तालेबान की कमाई'24 जून, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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