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'पाकिस्तान पर शक ही नहीं, सबूत भी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने काबुल में दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले के लिए पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई को ज़िम्मेदार ठहराया है. नारायणन ने दो टीवी चैनलों को दिए गए इंटरव्यू में ये बातें कही हैं. उन्होंने कहा, "हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इस हमले के पीछे आईएसआई ही है. आईएसआई बहुत ही घातक खेल में लगी है, आईएसआई को पूरी तरह से ख़त्म करना ज़रूरी है. हम शांति प्रक्रिया के हामी हैं, उसमें आईएसआई की कोई भूमिका नहीं है." नारायणन ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों और हमारे पास इस बात के पुख़्ता सबूत हैं, हमें महज शक नहीं है." धमाके के अगले ही दिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने इन आरोपों का खंडन किया है कि काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हुए हमले में उनके देश का कोई हाथ था. मलेशिया में एक बैठक में शामिल होने पहुँचे गिलानी ने पत्रकारों से कहा, "पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता क्यों फैलाएगा? अफ़ग़ानिस्तान में शांति हमारे हक़ में है. हम क्षेत्र में स्थिरता चाहते हैं." आरोप-प्रत्यारोप भारतीय दूतावास पर हुए हमले की संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय यूनियन और अमरीका सहित कई देशों ने कड़ी निंदा की थी. हमले के अगले ही दिन अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों ने इसके लिए 'विदेशी हाथ'को ज़िम्मेदार ठहराया था लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया था. भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाले आरोप-प्रत्यारोप के सिलसिले में एक विराम सा आ गया था, एक लंबे दौर के बाद भारत ने नाम लेकर पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया है. नारायणन का कहना है कि "आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए भारत और पाकिस्तान ने मिलकर एक साझा तंत्र क़ायम किया था, हमें उम्मीद थी कि उन्हें जो जानकारी मिलेगी हमें देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ." पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के पूर्व निदेशक असद दुर्रानी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "दोनों मुल्कों के बीच आतंकवाद के ख़िलाफ़ साझा तंत्र बन चुका है तो ऐसे में वहाँ पर ये सबूत पेश करके स्थिति साफ़ कर लेनी चाहिए वर्ना भारत कहता रहेगा और पाकिस्तान मना करता रहेगा, मसले का हल नहीं होगा. " सात जुलाई को काबुल शहर के बीचोबीच स्थित भारतीय दूतावास पर हुए हमले में भारतीय सेना के एक ब्रिगेडयर और भारतीय विदेश सेवा के एक अधिकारी समेत चार भारतीय नागरिक मारे गए थे. विस्फोटक से भरी एक कार को आत्मघाती हमलावर ने दूतावास के मुख्य द्वार से टकराकर धमाका कर दिया था, इस हमले में कुल 41 लोग मारे गए थे और लगभग 140 लोग घायल हुए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय दूतावास पर हमले की कड़ी निंदा07 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस हमले की निंदा, भाजपा ने सवाल उठाए07 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस धमाके में चार भारतीयों समेत 41 मारे गए07 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस अमरीकी हेलीकॉप्टर को मार गिराया02 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस हमले में बाल-बाल बचे राष्ट्रपति करज़ई27 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस काबुल में कार बम फटा, छह मरे13 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस कंधार में धमाका, दस से ज़्यादा मरे17 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान ने नए दूत का विरोध किया27 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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