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अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों पर बढ़ते हमले | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में तैनात विदेशी सेनाओं के लिए अभी-अभी ख़त्म हुआ जून का महीना वर्ष 2001 में तालेबान शासन समाप्ति के बाद से अब तक बहुत ख़तरनाक साबित हुआ है. संवाददाताओं का यह भी कहना है कि यह लगातार दूसरा ऐसा महीना रहा जब विदेशी सैनिकों के हताहत होने की संख्या इराक़ में हताहत होने वाले विदेशी सैनिकों की संख्या को पार कर गई. जून के महीने में जारी हुए सैनिक बयानों को देखें तो पता चलता है कि लड़ाई या दुर्घटनाओं के नतीजे में कम से कम 45 विदेशी सैनिक मारे गए हैं. ये सैनिक या तो नैटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता सेना या फिर अमरीकी गठबंधन से संबंधित थे. बढ़ते हमले इस वर्ष की इस पहली छमाही में अफ़ग़ानिस्तान में 122 विदेशी सैनिक मारे जा चुके हैं और उनमें से लगभग चालीस प्रतिशत सैनिकों की मौत सिर्फ़ जून के महीने में हुई है. इनमें से ज़्यादातर सैनिकों की मौत ऐसे हमलों में हुई जो उनके गश्ती दलों पर किए गए और उनमें सड़क किनारे विस्फोट सामग्री के ज़रिए किए गए हमले भी शामिल हैं. नैटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और सहायता सेना के प्रवक्ता जनरल कार्लोस ब्रैंको ने कहा है कि मारे गए सैनिकों की इस बढ़ी हुई संख्या को इस संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि वहाँ अब ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय सैनिक मोर्चे पर लड़ रहे हैं. प्रवक्ता का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय सैनिक अब अफ़ग़ानिस्तान में ऐसे स्थानों पर भी लड़ाई के लिए जा रहे हैं जहाँ अभी तक वे नहीं गए थे. आँकड़ों के अनुसार जून के महीने में इराक़ में कुल 31 विदेशी सैनिक मारे गए थे जिनमें से 29 अमरीकी सैनिक थे हालाँकि इराक़ में अफ़ग़ानिस्तान के मुक़ाबले दो गुना विदेशी सैनिक तैनात हैं. संवाददाताओं का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में मारे जाने वाले विदेशी सैनिकों की बढ़ती संख्या ये दिखाती है कि वहाँ तालेबान के हमले लगातार बढ़ रहे हैं और इससे यह भी झलकता है कि तालेबान अपनी ताक़त बढ़ाते जा रहे हैं. |
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