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शुक्रवार, 02 मई, 2008 को 04:06 GMT तक के समाचार
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अफ़ीम की खेती पर ब्रिटेन की आपत्ति
अफ़ीम की खेत में सैनिक
अफ़ीम की खेती में अफ़ग़ान सैनिकों के उपयोग के सुझाव भी दिए गए थे
ब्रिटेन को चिंता है कि दवाइयाँ बनाने के लिए अफ़ग़ानिस्तान में हो रही अफ़ीम की खेती की क़ानूनी अनुमति देना कारगर नहीं होगा.

विदेश विभाग के एक मंत्री लॉर्ड मैलक ब्राउन का कहना है कि न तो अफ़ग़ानिस्तान के पास संसाधन हैं और न ढाँचागत सुविधाएँ हैं कि वह अफ़ीम की खेती पर नियंत्रण कर सके.

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि ऐसा किया गया तो अफ़ीम की क़ीमतें बढ़ जाएँगीं और और इससे किसानों अफ़ीम की खेती ज़्यादा करने लगेंगे.

उल्लेखनीय है कि डॉक्टरों ने सुझाव दिया था कि अफ़ीम से मिलने वाली मॉर्फ़ीन का उपयोग ब्रिटेन में स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही दर्दनाशक दवाओं की कमी से निपटने के लिए किया जा सकता है.

ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन और कुछ विपक्षी नेताओं ने पहले यह सुझाव दिया था कि अफ़ग़ान सेना का उपयोग अफ़ीम की आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया जा सकता है.

उनका तर्क था कि इससे एक तो आवश्यकता पूरी हो सकेगी और दूसरे इससे अफ़ग़ानिस्तान को आय का एक नियमित स्रोत मिल जाएगा जिसकी उसे बहुत ज़रुरत है.

विरोध

लेकिन लॉर्ड मैलक ब्राउन का कहना है कि अफ़ीम की खेती से 'भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और देश के क़ानून की अपेक्षा' होती है.

उन्होंने कहा, "अफ़ग़ान सरकार के पास संसाधनों की कमी है और ढाँचागत सुविधाएँ नहीं है जिससे कि वह सुनिश्चित कर सके कि अफ़ीम की खेती सिर्फ़ क़ानूनी रुप से ही होगी."

"दवाएँ बनाने के लिए अफ़ीम की ख़रीदी का मतलब होगा अवैध रुप से अफ़ीम के धंधे में लगे लोगों से प्रतिस्पर्धा करना और इससे अफ़ीम की क़ीमत बढ़ेगी और इससे अफ़ीम की खेती करने वालों को बढ़ावा मिलेगा."

उनका तर्क है कि इसके बाद लोग दूसरी खेती छोड़ देंगे और माँग की आपूर्ति करने के लिए अफ़ीम की खेती करने लगेंगे.

लॉर्ड ब्राउन का सुझाव था कि इसकी बजाय सरकार को चाहिए कि वह किसानों को अफ़ीम की खेती छोड़ने के लिए ज़रूरी माहौल बढ़ाए, स्थानीय सरकारों को मज़बूत बनाए और नए आर्थिक स्रोत विकसित करे.

उनका कहना था कि अफ़ीम की ज़रुरत पूरी करने के लिए ऑस्ट्रेलिया और तुर्की पर निर्भर रहना अच्छा होगा जिन्होंने अफ़ीम की क़ानूनी खेती का ढाँचा विकसित कर लिया है.

उल्लेखनीय है कि अफ़ग़ानिस्तान दुनिया में सबसे अधिक अफ़ीम का उत्पादन करने वाले देशों में से है और वहाँ अफ़ीम की खेती को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित रहा है.

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