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बर्मा में बढ़े अफ़ीम उत्पादन पर चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बर्मा में अफ़ीम के उत्पादन में अचानक हुई वृद्धि और अफ़ीम की खेती के अपराधियों के हाथों में चले जाने पर चिंता ज़ाहिर की गई है. नशीली दवा और अपराध पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की इस इकाई (यूएनओडीसी) का कहना है कि अफ़ीम उत्पादन में भ्रष्टाचार भी शामिल हो गया है और बड़े अधिकारियों की साँठगाँठ भी जुड़ गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि थाईलैंड, लाओस और बर्मा में अफ़ीम की खेती में पिछले कुछ सालों में काफ़ी कमी आई थी लेकिन बर्मा में एक बार फिर इसमें बढ़ोत्तरी हो रही है. उल्लेखनीय है कि थाईलैंड, लाओस और बर्मा को नशीली दवाओं के स्वर्णिम त्रिभुज के रुप में जाना जाता था. संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट पर फ़िलहाल बर्मा के सैन्य शासकों की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है. चिंता पिछले वर्षों में नशीली दवाओं के खिलाफ़ चलाए गए अभियानों के कारण थाईलैंड, लाओस और बर्मा में अफ़ीम का उत्पादन बहुत कम हुआ है. लेकिन अभी भी बर्मा दुनिया का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा अफ़ीम उत्पादक है. इस समय सबसे अधिक अफ़ीम का उत्पादन अफ़ग़ानिस्तान में होता है. अनुमान है कि दुनिया का 90 प्रतिशत अफ़ीम अफ़ग़ानिस्तान में ही पैदा होता है. इस समय दक्षिण-पूर्वी एशिया में सिर्फ़ पाँच प्रतिशत अफ़ीम का उत्पादन होता है. यूएनओडीसी की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि बर्मा में अफ़ीम की खेती में 29 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन अच्छी खेती होने के कारण नशीली दवा का उत्पादन 46 प्रतिशत बढ़ गया है. यूएनओडीसी के कार्यकारी निदेशक एंटोनियो मारियो कोस्टा का कहना है, "भ्रष्टाचार, ऊँचे स्तर पर मिलिभगत और सीमा पर कमज़ोर निगरानी के चलते बर्मा में नशीली दवाओं का व्यापार बढ़ा है." उन्होंने इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अफ़ग़ानिस्तान में फिर रिकॉर्डतोड़ अफ़ीम'27 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम उत्पादन बेकाबू'26 जून, 2007 | भारत और पड़ोस नैटो ने विवादित विज्ञापन वापस लिया25 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस विज्ञापन को लेकर नैटो की निंदा24 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में 'रिकॉर्ड अफ़ीम'02 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ीम का नया 'स्वर्णिम-त्रिभुज'01 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना अफ़ीम की खेती में कमी29 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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