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अफ़ीम का नया 'स्वर्णिम-त्रिभुज' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की नशीली दवा और अपराध शाखा के प्रमुख ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान अफ़ीम व्यापार के नए ठिकाने बनते जा रहे हैं. इस शाखा के अधिकारी एंतोनियो मारिया कोस्टा ने इसे अफ़ीम व्यवसाय का 'स्वर्णिम त्रिभुज' कहा है. इंटरनेशनल हेरॉल्ड ट्रिब्यून में लिखे अपने एक लेख में उन्होंने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से लगी ईरान की सीमा इस समय नशीली दवा का सबसे बड़ा तस्करी का रास्ता है. उनका कहना है कि दुनिया के 90 प्रतिशत अफ़ीम का उत्पादन अफ़ग़ानिस्तान में होता है और वह इस पर कोई नियंत्रण नहीं कर पा रहा है. उनका कहना है कि ईरान इसी का खामियाजा भुगत रहा है. नशीली दवाओं के नियंत्रण के ईरान के प्रयासों की सराहना करते हुए कोस्टा ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से लगी सीमा पर उसने 20 हज़ार पुलिस और बॉर्डर गार्ड्स की नियुक्ति कर रखी है. उन्होंने अपने लेख में ज़िक्र किया है कि ईरान ने पिछले साल 350 टन अफ़ीम ज़ब्त करने में सफलता पाई थी, जो दुनिया के किसी अन्य देश में ज़ब्त की गई नशीली दवा से अधिक है, लेकिन उनका कहना है कि ईरान को इसकी बड़ी क़ीमत अदा करनी पड़ रही है. संयुक्त राष्ट्र के इस अधिकारी ने बताया है कि पिछले 20 सालों में नशीली दवाओं के तस्करों से साथ हुई मुठभेड़ में ईरान पुलिस और बॉर्डर गार्ड्स के साढ़े तीन हज़ार जवान मारे गए हैं. उन्होंने कहा है कि ईरान की इन कोशिशों के बावजूद यह भी तथ्य है कि वहाँ नशीली दवाओं की खपत का अनुपात दुनिया के किसी और देश से ज़्यादा है. एंतोनियो मारिया कोस्टा ने इसे रोकने के लिए पश्चिमी देशों की सहायता की ज़रुरत बताई है. | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ीम की बढ़ती खेती पर चिंता02 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना अफ़ीम की खेती में कमी29 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस मादक पदार्थों की ख़पत बढ़ीः रिपोर्ट29 जून, 2005 | पहला पन्ना अफ़ीम की खेती नष्ट करने पर हिंसा22 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस करज़ई ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की09 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस 'तालेबान की नशा विरोधी नीति कामयाब'19 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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