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अफ़ीम की बढ़ती खेती पर चिंता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में साल 2006 में अफ़ीम की खेती में 59 प्रतिशत बढ़ोत्तरी होने की संभावना है और अगर ऐसा हुआ तो दुनिया भर में अफ़ीम की उपलब्धता में अफ़ग़ानिस्तान की हिस्सेदारी 92 प्रतिशत हो जाएगी. संयुक्त राष्ट्र के नशीले पदार्थों और अपराधों के मामलों से संबंधित विभाग का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में 6100 टन अफ़ीम की खेती होने की संभावना है जिसका ज़्यादातर हिस्सा देश के दक्षिणी हिस्सों से आएगा जहाँ तालेबान का दबदबा है. अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेतो से छुटकारा पाने के प्रयासों में सबसे ज़्यादा बढ़चढ़कर भाग ले रहा है. लेकिन अमरीकी के एक अधिकारी ने आगाह किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में यह अफ़ीम समस्या काफ़ी गंभीर हो सकती है. अफ़ग़ानिस्तान में लगभग दो अरब 70 करोड़ डॉलर की क़ीमत की अफ़ीम की खेती होती है जो देश की अर्थव्यवस्था का लगभग एक तिहाई हिस्सा है. संयुक्त राष्ट्र के नशीले पदार्थों और अपराध संबंधित विभाग का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के अकेले हेलमंद प्रांत में अफ़ीम की खेती में 162 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. ग़ौरतलब है कि हेलमंद प्रांत में हाल के दिनों में तालेबान और अंतरराष्ट्रीय सेना के बीच लड़ाई में तेज़ी आई है. विएना स्थित इस विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान के कुल 34 प्रांतों में से सिर्फ़ छह ही ऐसे हैं जहाँ अफ़ीम की खेती नहीं होती है. 'स्थिति ख़तरनाक' इस विभाग के प्रमुख एंतोनियो मारिया कोस्टा ने अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई को अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद कहा, "यह बहुत चौंकाने वाले आँकड़े हैं. अफ़ग़ानिस्तान अपनी ख़ुद के पैदा किए हुए नशीले पदार्थों में उलझता जा रहा है." कोस्टा ने कहा कि दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में ऐसे संकेत नज़र आ रहे हैं जिससे तमाम ढाँचे का पतन हो सकता है.
देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में भी अफ़ीम की खेती में बढ़ोत्तरी हुई है जहाँ स्थानीय क़बायली सरदारों का दबदबा है और केंद्रीय सरकार का ढाँचा कमज़ोर है. कोस्टा का कहना था, "आम लोगों में यह देखकर लगातार हताशा बढ़ रही है कि देश में अफ़ीम की खेती नियंत्रण से बाहर होती जा रही है." "गठबंधन देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में जो राजनीतिक, सैनिक और आर्थिक निवेश किया है, अफ़ीम की खेती पर उसका कुछ ठोस असर नज़र नहीं आता." कोस्टा ने राष्ट्रपति हामिद करज़ई का आहवान किया कि वे न्यायपालिका का सहारा लेकर अफ़ीम की खेती को रुकवाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करें और ज़रूरत हो तो गिरफ़्तारियाँ भी करें. अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेतीबाड़ी करने वाले किसानों को इसके बदले कुछ अन्य फ़सल उगाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए दो साल से एक योजना चलाई जा रही है. लेकिन उसके कुछ ठोस नतीजे सामने नहीं आए हैं. नशीले पदार्थों के नियंत्रण संबंधी अमरीकी विभाग के निदेशक डुग वेन्केल ने शनिवार को कहा, "अगर यह स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है तो देश पूरी तरह से इसकी चपेट में आ जाएगा." वेन्केल ने कहा, "तब अफ़ग़ानिस्तान उस लायक़ नहीं बन सकेगा जो उसे एक लोकतांत्रिक और लोगों का सही प्रतिनिधिक देश बनने के लिए ज़रूरी होगा." | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की बड़ी पहल18 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस महफ़िले अफ़ीम से चढ़ता है चुनावी ख़ुमार08 मई, 2004 | भारत और पड़ोस अफ़ीम की खेती नष्ट करने पर हिंसा22 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस 'तालेबान की नशा विरोधी नीति कामयाब'19 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान अफ़ीम में अव्वल | भारत और पड़ोस अफ़ीम पर हमला23 जुलाई, 2002 | पहला पन्ना 94 टन अफ़ीम नष्ट की गई20 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना अफ़ीम की पैदावार बढ़ने का ख़तरा10 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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