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अफ़ीम खेती लेकर संयुक्त राष्ट्र चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक आकलन में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान के समस्याग्रस्त दक्षिणी हिस्से में इस वर्ष यानी 2008 में अफ़ीम की खेती में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है. हालाँकि संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा है कि देश में अफ़ीम की कुल खेती में कोई बदलाव नहीं होगा और वह उतनी ही रहेगी या उससे कम होगी जितनी साल 2007 में रही थी. ग़ौरतलब है कि साल 2007 में अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेती ने नया रिकॉर्ड बनाया था. नशीले पदार्थों और अपराधों पर संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय यूएनओडीसी ने अपना यह आकलन लगभग 500 गाँवों में विभिन्न लोगों के साथ बातचीत करने के बाद तैयार किया है. हेलमंद प्रांत के नज़दीकी प्रांत नीमरोज़ में अफ़ीम की खेती में साल 2008 में होने वाली बढ़ोत्तरी की संभावना पर बड़ी चिंता जताई गई है. हेलमंद प्रांत में अभी तक अफ़ीम की खेती सबसे ज़्यादा होती रही है और साल 2008 में भी पूरे देश की लगभग आधी अफ़ीम हेलमंद प्रांत में ही तैयार होने की संभावना है हालाँकि अफ़ीम की खेती में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी और जितनी खेती पिछले साल हुई थी उतनी ही खेती से यह अफ़ीम तैयार होगी. हालाँकि आकलन में कहा गया है कि अफ़ीम की खेती में तो कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी लेकिन फ़सल में बढ़ोत्तरी होने की बात कही गई है. दक्षिण में ज़्यादा कंधार और कुछ अन्य दक्षिणी प्रांतों में भी अफ़ीम की मात्रा में बढ़ोत्तरी होने का अनुमान लगाया गया है लेकिन पूर्वी प्रांत नंगरहार में अफ़ीम की खेती में कुछ कमी होने की संभावना जताई गऐ है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अफ़ीम की खेती को रोकने के कार्यक्रमों को अगर सुनियोजित ढंग से देश के सुरक्षित हिस्सों में लागू किया जाए तो अफ़ग़ानिस्तान के ज़्यादा प्रांतों को अफ़ीम मुक्त घोषित किया जा सकता है.
बहुत कुछ इस पर भी निर्भर करता है कि जब अफ़ीम की खेती तैयार होती है तो उसे नष्ट करने के अभियान में कितनी कामयाबी मिलती है. दक्षिणी प्रांत हेलमंद में अफ़ीम की खेती की शुरूआत पहले से ही काफ़ी ज़ोर-शोर से हो चुकी है. असुरक्षित इलाक़ों में अफ़ीम की खेती को रोकना मुश्किल है क्योंकि वहाँ भ्रष्टाचार का भी बोलबाला है. साल 2008 में अफ़ग़ानिस्तान में भांग की खेती में भी बढ़ोत्तरी होने की चेतावनी जारी की गई है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि यह साल भी अफ़ग़ानिस्तान में नशीले पदार्थों के ख़िलाफ़ अभियान के लिए धुधला ही रहेगा. ग़ौरतलब है कि इस अभियान का नेतृत्व ब्रिटेन कर रहा है. नशीले पदार्थों की रोकथाम के अभियान में लगे एक ब्रितानी अधिकारी ने कहा, "अफ़ीम की कुल खेतीबाड़ी से हम ख़ुश नहीं हैं लेकिन यह देखकर भी कुछ संतोष होता है कि इसमें कुल मिलाकर कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी." | इससे जुड़ी ख़बरें 'अफ़ीम का विकल्प देना होगा'05 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस बर्मा में बढ़े अफ़ीम उत्पादन पर चिंता11 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में फिर रिकॉर्डतोड़ अफ़ीम'27 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम उत्पादन बेकाबू'26 जून, 2007 | भारत और पड़ोस वादी में लहलहाती नशे की फ़सल17 मई, 2007 | भारत और पड़ोस विज्ञापन को लेकर नैटो की निंदा24 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में 'रिकॉर्ड अफ़ीम'02 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस राजस्थान में अफ़ीम की खेती पर विवाद23 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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