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राजस्थान में अफ़ीम की खेती पर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र सरकार के नए दिशानिर्देश के अनुसार राजस्थान में अफ़ीम की खेती का क्षेत्रफल घटाया गया है और 7400 अफ़ीम उत्पादक किसानों को इस बार अफ़ीम की खेती से वंचित कर दिया गया है. अफ़ीम उत्पादक किसानों के नेता केंद्र पर किसान विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन पश्चिमी राजस्थान में लोग अफ़ीम की खेती बंद करने की माँग कर रहे हैं. राज्य के मरूस्थली भाग में अफ़ीम का सेवन सदियों से होता रहा है. वहाँ सामाजिक पंचायतों और चुनावों के दौरान अफ़ीम सेवन का प्रचलन बढ़ जाता है. अफ़ीम की खेती पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में की जाती है. राज्य में 'नारकोटिक्स उपायुक्त' मयंक कुमार ने बीबीसी को बताया कि नई अफ़ीम बंदोबस्त नीति में इस बार 28 हज़ार किसानों को खेती के लाइसेंस दिए जाएँगे. गत वर्ष 35 हज़ार किसानों को लाइसेंस मिला था और उन्होंने खेती की. पर्याप्त भंडार जिन किसानों को खेती करने की अनुमति नहीं दी जा रही उनकी पैदावार या तो औसत से कम थी या फिर मिलावटी थी. एक प्रतिशत ऐसे लोग भी थे जो मादक पदार्थ क़ानून के उल्लंघन के आरोपों से घिरे थे. इस बार कम लाइसेंस जारी करने पर अधिकारियों का कहना था कि भारत के पास इस समय अफ़ीम का पर्याप्त भंडार है. इस बार 2750 हेक्टेयर में खेती की अनुमति दी गई है. पिछले साल 3500 हेक्टेयर में अफ़ीम की खेती की गई थी. राज्य के झालावाड़, कोटा, बादां, भीलवाड़ा, उदयपुर और चितौड़गढ़ ज़िलों में ही अफ़ीम पैदा की जा सकती है. चितौड़गढ़ के भाजपा सांसद श्रीचंद कृपलानी केंद्र के नए दिशा निर्देशों से नाराज़ हैं. उनका कहना है, "भारत सरकार अफ़ीम की खेती मुकम्मल बंद करना चाहती है. सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में किसानों के पेट पर लात मार रही है. हम इसका ज़ोरदार विरोध करेंगे." लेकिन उन्हीं की पार्टी के जोधपुर से सांसद जसवंत विश्नोई ने बीबीसी से कहा,"अफ़ीम की खेती पूरी तरह बंद होनी चाहिए. या फिर इसे कड़े सरकारी नियंत्रण में केवल सरकारी फार्मों में पैदा किया जाना चाहिए." वे कहते हैं, "हमारे मरुस्थली भूभाग में अफ़ीम सेवन से सामाजिक समस्याएँ खड़ी हो रही हैं. लेकिन सरकार पर अफ़ीम पट्टी के लोगों का दबाव है." अफ़ीम मुक्ति का अभियान चला रहे राज्यसभा के नामांकित सदस्य नारायण सिंह मणकलाव 1987 से पश्चिमी राजस्थान में अफ़ीम मुक्ति पर काम कर रहे हैं." वे कहते हैं, "अब तक हम एक लाख लोगों को इससे मुक्ति दिला चुके हैं. लेकिन अब भी नशा प्रचलन में है तो इसकी खेती बंद होनी चाहिए." औषधीय उपयोग अफ़ीम का अपना औषधीय उपयोग है. लेकिन इसके दुरुपयोग की शिकायतें भी आ रही है. पिछले वर्ष अफ़ीम पट्टी के वादी ज़िले में मादक पदार्थ की तस्करी के 106, उदयपुर में 43, झालावाड़ में 79, भीलवाड़ा में 45 और चितौड़गढ़ में 106 मामले दर्ज किए गए थे. भारत में राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में भी अफ़ीम की खेती की जाती है. राजस्थान की अफ़ीम उपजाऊ पट्टी ने किसानों को मालामाल कर दिया है. अफ़ीम के हरे भरे खेतों को देखकर किसान बहुत हर्षित हैं. लेकिन यही बात पश्चिमी मरुस्थली भाग में चिंता पैदा करने लगी है. | इससे जुड़ी ख़बरें दिलचस्प रहे राजस्थान के चुनाव08 मई, 2004 | भारत और पड़ोस राजस्थान काँग्रेस अध्यक्ष का निधन04 मई, 2004 | भारत और पड़ोस राजस्थान में हुआ टेपकांड24 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस धर्मेंद्र के विवाह को लेकर विवाद17 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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