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तालेबान ने करज़ई की पेशकश ठुकराई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तालेबान ने अपने नेता मुल्ला उमर को लेकर अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई की ओर से की गई पेशकश को ठुकरा दिया है. राष्ट्रपति करज़ई ने यह प्रस्ताव रखा था कि वे मुल्ला उमर को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं बशर्ते वे शांति वार्ता के लिए तैयार हो जाएँ और ख़ुद बातचीत के लिए अफ़ग़ानिस्तान में आएँ. लेकिन तालेबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने बीबीसी को बताया कि हामिद करज़ई के पास ऐसी पेशकश करने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने पेशकश को ठुकराते हुए कहा कि करज़ई को बातचीत कराने का भी अधिकार नहीं है. ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि अगर राष्ट्रपति करज़ई के पास ऐसा अधिकार होता तो वे अमरीकी सैनिकों के बम हमले को रोक सकते थे. विचार-विमर्श माना जाता है कि मुल्ला उमर पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के सीमावर्ती इलाक़े में कहीं छिपे हुए हैं.
अमरीका ने मुल्ला उमर को पकड़वाने में मदद करने वाले को लाखों डॉलर ईनाम देने की घोषणा बहुत पहले से कर रखी है. रविवार को अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने मुल्ला उमर को सुरक्षा प्रदान करने की पेशकश की थी. उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि अगर अमरीका या अन्य पश्चिमी देश इससे सहमत नहीं तो वे देश छोड़कर जा सकते हैं या उन्हें हटा सकते हैं. वर्ष 2001 में तालेबान के तख़्तापलट के बाद मुल्ला उमर देश छोड़कर भाग गए थे. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ये चर्चा तेज़ हुई है कि तालेबान को भी बातचीत में शामिल करना चाहिए या नहीं. इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान की शक्ति बढ़ी है और गठबंधन सैनिकों के ख़िलाफ़ भी हिंसा में तेज़ी आई है. |
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