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अफ़ग़ान युद्ध जीतने का तालेबान का दावा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तालेबान के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने एक रेडियो इंटरव्यू में कहा है कि विदेशी फ़ौजों को अफ़ग़ानिस्तान छोड़ देना चाहिए. अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा की खिल्ली उड़ाते हुए उन्होंने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में और अधिक सैनिक तैनात करने से भी अफ़ग़ानिस्तान में विद्रोह ख़त्म नहीं होगा. किसी अज्ञात स्थान से टेलीफ़ोन पर बीबीसी के श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए ज़ैबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि आधे से अधिक अफ़ग़ानिस्तान पर अब तालेबान का कब्ज़ा है. तालेबान की ओर से यह चुनौती ऐसे समय में आई है जब अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद क़रज़ई देश की स्थिति पर चर्चा के लिए लंदन में हैं और उन्होंने कहा कि तालेबान विद्रोहियों से निपटने के लिए उन्हें लाख गुना बेहतर प्रयास करने होंगे. उन्होंने कहा है कि 'एक दुर्गम यात्रा' के दौरान जो कुछ घटा उसे लेकर अफ़ग़ानों को और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप बंद करना चाहिए. विद्रोही तालेबान बीबीसी के एक कार्यक्रम में ज़ैबीहुल्लाह मुजाहिद ने लगभग एक घंटे तक श्रोताओं और बीबीसी से रक्षा संवाददाता फ़ैंक गार्डनर के सवालों के जवाब दिए. उन्होंने कहा कि अब अफ़ग़ानिस्तान के आधे से अधिक हिस्से पर तालेबान का कब्ज़ा है और उन इलाक़ों में वे पहले की तुलना में ज़्यादा उदारता के साथ शासन कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि 1997 से 2001 के बीच अपने शासनकाल में तालेबान ने इस्लामिक शरिया क़ानून के मुताबिक़ शासन चलाया जिसमें समाज पर बड़ी पाबंदियाँ थीं. उस दौरान सिर काट कर लोगों को सज़ा देना आम बात थी, महिलाओं और लड़कियों के लिए शिक्षा पर प्रतिबंध था और संगीत जैसी बहुत सी चीज़ों पर पाबंदी थी जो तालेबान मौलवियों के मुताबिक़ पाश्चात्य प्रभाव वाली चीज़ें हैं. हालांकि ज़ैबीहुल्लाह मुजाहिद ने बीबीसी को बताया कि अब उन्होंने सर क़लम करने बंद कर दिए हैं और अपने प्रभाव वाले इलाक़ों में लड़कियों को शिक्षा भी दिलवा रहे हैं. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इस हफ़्ते कंधार में एक स्कूली बच्ची पर हुए तेज़ाबी हमले के पीछे तालेबान का हाथ था. मुजाहिद ने 2001 में अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीकी हमले की निंदा की और कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि न्यूयॉर्क और वाशिंगटन पर हुए हमलों के पीछे ओसामा बिन लादेन का हाथ था. उनका कहना था कि अलक़ायदा को अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका लेकर आया था न कि तालेबान. उन्होंने कहा कि वे नहीं जानते कि ओसामा बिन लादेन कहाँ हैं लेकिन 2001 से नहीं दिख रहे तालेबान नेता मुल्ला उमर के बारे में उन्होंने कहा कि वे 'सुरक्षित स्थान' पर हैं. तालेबान प्रवक्ता ने इस बात से इनकार किया कि उनका संगठन अपने लिए पैसों की व्यवस्था नशीली दवाओं से करता है. हालांकि बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस बात की संभावना कम ही है कि तालेबान प्रवक्ता का यह बयान पश्चिमी देशों में गंभीरता से सुनी जाएँगीं. | इससे जुड़ी ख़बरें आत्मघाती बम हमला: आठ मरे, 70 घायल13 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस अमरीकी राहतकर्मी की हत्या12 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'संदिग्ध चरमपंथियों' को मारने का दावा10 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस सैनिकों के बदले तालेबान चरमपंथी रिहा07 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान: ब्रितानी कमांडर का इस्तीफ़ा01 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस तालेबान और सरकार में समझौता नहीं!08 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'तालेबान-अफ़ग़ान अफ़सरों में मिलीभगत'05 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस अमरीकी कार्रवाई से नाराज़ करज़ई23 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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