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'आतंकवाद क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोलंबो में सार्क शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा है कि दक्षिण एशिया के लिए 'आतंकवाद' सबसे बड़ा ख़तरा है. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन के 15वें शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "आतंकवाद लगातार इस क्षेत्र में अपना सर उठा रहा है. ये हमारे विकास और स्थायित्व के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है. हम नफ़रत की विचारधारा के ख़िलाफ़ युद्ध हारने का ख़तरा मोल नहीं ले सकते." प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था, "आतंकवादी सीमाओं का फ़र्क नहीं करते. काबुल में भारतीय दूतवास पर हमला, फिर बंगलौर और हाल ही के दिनों में अहमदाबाद में सिलसिलेवार बम धमाके एक बार फ़िर से उस बर्बरता की याद दिलाते हैं जो अभी भी दक्षिण एशिया में मौजूद है. हमें एकजुट होकरा पूरे ज़ोरशोर से आतंक का मुकाबला करना है." महत्वपूर्ण है कि शनिवार को ही भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की बैठक होनी है. कोलंबो जाने से पहले भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ये कह चुके हैं कि 'पाकिस्तान अपनी धरती से आतंकवाद को न पनपने देने की अपनी प्रतिबद्धता को निभाए.' इससे पहले कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में सार्क सम्मेलन शुरु हुआ. एक तरह से सम्मलेन से पहले ही इसकी धारा तय करते हुए सभी नेताओं ने दक्षिण एशिया में 'आतंकवाद की समस्या' पर चिंता जताई. दो दिनों के इस सम्मेलन में आपसी संबंध बढ़ाने के उपायों पर चर्चा होनी है लेकिन सबसे अहम चर्चा 'आतंकवाद से निपटने के लिए साझा क़ानूनी प्रयासों' पर होने की संभावना है. पर्यवेक्षकों का मानना है कि हाल में भारत और अफ़ग़ानिस्तान में हुए बम धमाकों और आत्मघाती हमलों के कारण इस सम्मेलन में भारत और अफ़ग़ानिस्तान के पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण बने रिश्तों की छाया नज़र आ रही है. 'पाकिस्तान ने आतंकवाद के घाव सहे' उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने अपने भाषण में कहा की दुनिया चरमपंथ और आतंकवाद की चुनौती से झूझ रही है. सार्क देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "ये हमारे मूल्यों को चुनौती है और इससे हमारा सामाजिक-आर्थिक ढांचा प्रभावित हुआ है. मैं काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए हमले की भर्त्सना करता हूँ. हालाँकि पकिस्तान ने दक्षिण एशिया में आतंकवाद के सबसे ज़्यादा घाव सहे हैं. आतंकवाद की वजह से हमने अपनी महान नेता बेनज़ीर भुट्टो को खोया है." गिलानी ने ज़ोर दिया की चरमपंथ से मुक्ति दिलाना सभी देशों की संयुक्त ज़िम्मेदारी है. उन्होंने कहा की चरमपंथ से सभी देशों को अलग-अलग और एक साथ, दोनों तरह से लड़ने की ज़रूरत है. करज़ई के तीखे तेवर अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने अपने संबोधन में पाकिस्तान पर तीखे प्रहार किए और आरोप लगाया, "पकिस्तान में आतंकवादी और उनके शरण स्थल मज़बूत होते जा रहे हैं. ये शहीद बेनज़ीर भुट्टो के कत्ल से साबित होता है. उनका कहना था, "इस साल कोलंबो में आम नागरिकों पर हमले और हाल के दिनों में भारतीय शहरों अहमदाबाद-बंगलौर और साथ ही काबुल पर हमले हमें पुनः आतंकवादियों की बढ़ती पकड़ की याद दिलाते हैं." अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने ये भी कहा की दक्षिण एशिया में चरमपंथ संकीर्ण राजनीति की परंपरा के कारण पनप रहा है. हामिद करज़ई का कहना था, "इस क्षेत्र में आतंकवादी संस्थागत सहयोग और बढ़ावा पा रहे हैं. और आतंक का यही पक्ष है जो उसे हमारी साझा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बनाता है." 'सार्क में एकजुटता और सहयोग' प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने संबोधन में चरमपंथ के साथ-साथ विकास, व्यापार, तकनीक और सभी सार्क देशों की एकजुटता पर बल दिया. उनका कहना था, "आर्थिक सहयोग और सार्क देशों का एक दूसरे से जुड़ना ख़ुशहाली के लिए बहुत ज़रूरी है. भारत ने सार्क के कम विकसित देशों के लिए शून्य कर नीति लागू की है. श्रीलंका के साथ मुक्त व्यापार समझौते से संतोषजनक परिणाम मिले हैं." प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "दक्षिण एशियाई लोग पश्चिमी देशों के बारे में ज़्यादा जानते हैं और एक दूसरे के बारे में कम. दिल्ली में वर्ष 2010 में दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय बनने से वहाँ 5000 लोग पढ़ेंगे और विश्व स्तर के वैज्ञानिक और समाजशास्त्री निकलेंगे जो अपने देशों को ही नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया का प्रतिनिधित्व करेंगे." भारतीय प्रधानमंत्री ने वर्ष 2007 में दक्षिण एशियाई खाद्यान्न बैंक बनाने के सार्क के फ़ैसले की सराहना करते हुए कहा कि विश्व में वर्तमान खाद्य पदार्थों के संकट को देखते हुए समझा जा सकता है कि वह फ़ैसला कितना सही था. सार्क सम्मेलन को शनिवार को संबोधित करने वाले सभी नेताओं ने अधिक आर्थिक सुधारों की बात कही और खाने की वस्तुओं और तेल भावों से निपटने के लिए संयुक्त नीति बनने पर ज़ोर दिया. सभी नेताओं ने वैकल्पिक उर्जा के साधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी प्रतिबद्धता जताई और खाद्य उत्पादन को बढ़ाने की बात पर भी सबने रज़ामंदी जताई. सम्मलेन को नेपाल और भूटान के प्रधानमंत्रियों, बांग्लादेश के मुख्य सलहाकार और मालदीव के राष्ट्रपति ने भी संबोधित किया. |
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