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'सार्क सम्मेलन के दौरान संघर्षविराम' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों ने दस दिन के लिए संघर्षविराम की बात कही है लेकिन शांति वार्ता से इनकार किया है. कोलंबो में दस दिन के लिए सार्क सम्मेलन होना है और इसे देखते हुए ही विद्रोहियों ने सदभावना के तौर पर संघर्षविराम की पेशकश की है. ये सम्मेलन 26 जुलाई से चार अगस्त तक होना है. हालांकि तमिल विद्रोहियों ने स्पष्ट किया है कि उनके ख़िलाफ़ श्रीलंका सरकार का अभियान जारी है और ऐसे में शांति वार्ता संभव नहीं है. वर्ष 1983 से श्रीलंका में चल रहे युद्ध में 70 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने इस महीने कहा था कि अगर विद्रोही हथियार डाल दें, बमबारी और अन्य हमले करना बंद कर दें तो सरकार उनसे फिर से बात करने के लिए तैयार है. वर्ष 2002 में नॉर्वे ने मध्यस्थता कर विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार के बीच संघर्षविराम करवाया था लेकिन 2008 के शुरु में श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोहियों के साथ युद्घविराम समझौता औपचारिक रूप से ख़त्म कर दिया था. अब तमिल विद्रोहियों ने ई-मेल के ज़रिए जारी एक बयान में कहा है, "सदभावना के लिए उठाए गए क़दम के तहत हमें ये बताते हुई खुशी हो रही है कि सार्क सम्मेलन के दौरान हम संघर्षविराम रखेंगे." तमिल विद्रोहियों की राजनीतिक इकाई के प्रमुख बालसिंघम नादेसन ने कहा, "बातचीत के लिए महिंदा राजपक्षे ने दो शर्तें रखी हैं वो अव्यवहारिक हैं. जब श्रीलंका सरकार बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चला रही हो ऐसे में उस पक्ष के साथ बातचीत करना असंभव है." वहीं श्रीलंका सेना के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल सरथ फ़ोनसेका ने हाल ही में कहा था कि एक ताकत के तौर पर तमिल विद्रोही हार चुके हैं लेकिन धीमे स्तर पर विद्रोह लंबे समय तक चल सकता है. |
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