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शुक्रवार, 12 मई, 2006 को 15:50 GMT तक के समाचार
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श्रीलंका समय चक्र - 2
चंद्रिका कुमारतुंग
चंद्रिका का राष्ट्रपति कार्यकाल काफ़ी उथल-पुथल वाला रहा है
2000 - फ़रवरी में नॉर्वे ने कहा कि वह श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है.

2000 - अप्रैल में तमिल विद्रोहियों ने उत्तरी द्वीप में सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण एलीफ़ेंट पास पर क़ब्ज़ा कर लिया.

2000 - अक्तूबर में राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के पीपुल्स अलायंस ने आम चुनावों में जीत हासिल की.

2001 - फ़रवरी में ब्रिटेन ने नए आतंकवाद निरोधक क़ानून के तहत तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई को "आतंकवादी संगठन" घोषित किया.

2001 - जुलाई में राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने अपनी अल्पमत वाली सरकार को अविश्वास मत से बचाने के लिए संसद को दो महीने के लिए स्थगित कर दिया.

2001 - जुलाई में तमिल विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आत्मघाती हमला किया.

2001 - अक्तूबर में चंद्रिका कुमारतुंगा ने अपनी सरकार बचाने के लिए अविश्वास मत से कुछ ही घंटा पहले संसद को भंग कर दिया. उनकी सरकार को मार्क्सवादियों का समर्थन था. नए चुनाव पाँच दिसंबर को कराने की घोषणा की गई.

2001 - दिसंबर में चुनावों के बाद प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के नेतृत्व में एक नई सरकार बनी. उनकी यूनाइटेड नेशनल पार्टी ने मामूली बहुमत से संसदीय चुनाव जीता.

शांति वार्ता

2002 - फ़रवरी - सरकार और तमिल विद्रोहियों ने स्थायी युद्धविराम समझौते पर दस्तख़त किए जिससे इस लंबे हिसंक संघर्ष को समाप्त करने का कुछ रास्ता निकला. शांति वार्ता में मध्यस्थता नॉर्व ने शुरू की.

तमिल विद्रोही

2002 - मार्च-मई - हथियार छोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई. जाफ़ना को श्रीलंका के बाक़ी हिस्से से जोड़ने वाली सड़क 12 बाद खुली. जाफ़ना के लिए यात्री विमानों की उड़ान भी शुरू हुई.

2002 - सितंबर - सरकार ने तमिल विद्रोहियों पर से प्रतिबंध हटा लिया जो उनकी लंबे समय से माँग रही थी. पहले दौर की बातचीत थाईलैंड में शुरू हुई. दोनों पक्षों ने पहली बार युद्ध क़ैदियों की अदला-बदली की. तमिल विद्रोहियों ने अलग देश की माँग छोड़ दी.

2002 - दिसंबर - नॉर्व में हुई शांति वार्ता में दोनों पक्ष सत्ता बँटवारे पर सहमत हुए. इस समझौते के तहत अल्पसंख्यक तमिलों को मुख्य रूप से तमिलभाषी - पूर्वोत्तर क्षेत्रों में स्वायत्तता देने की बात हुई.

2003 - फ़रवरी - शांति वार्ता का अगला दौर बर्लिन में हुआ.

2003 - अप्रैल - तमिल विद्रोहियों ने शांति वार्ता से यह कहते हुए हाथ खींच लिया कि उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.

2003 - मई - देश में आई सबसे भीषण बाढ़ में 200 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई और लगभग चार हज़ार लोग बेघर हो गए.

राजनीतिक संकट

2003 - नवंबर - राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त किया और संसद स्थगित कर दी. शांति वार्ता को लेकर सरकार के साथ उनकी अनबन चल रही थी. एक पखवाड़े के बाद संसद बहाल कर दी गई लेकिन तमिल विद्रोहियों के साथ बातचीत स्थगित कर दी गई.

श्रीलंका
हिंसा में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं

2004 - मार्च - विद्रोही तमिल नेता करुणा ने अलग होकर अपना अलग धड़ा बना लिया और विद्रोही आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए अपने समर्थकों के साथ भूमिगत हो गया.

2004 - अप्रैल - राजनीतिक खींचतान के बीच समय से पहले आम चुनाव कराए गए. कुमारतुंगा की पार्टी को 225 में 105 सीटें मिलीं जो सरकार बनाने के लिए काफ़ी नहीं थीं. महिंद्रा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई.

2004 - जुलाई - कोलंबो में एक आत्मघाती हमला हुआ जो 2001 के बाद से इस तरह का बड़ा हमला था. इससे शांति वार्ता के औचित्य पर सवाल खड़े हो गए.

2004 - दिसंबर - सूनामी के कहर ने तीस हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान लील ली. लाखों लोग बेघर भी हो गए. श्रीलंका में राष्ट्रीय आपदा घोषित की गई.

2005 - जून - तमिल बहुल इलाक़ों में भी सूनामी प्रभावितों तक सहायता पहुँचाने के लिए समझौता हुआ.

2005 - अगस्त - विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिरगमर की हत्या के बाद राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई.

बढ़ती हिंसा

2005 - नवंबर - प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे ने राष्ट्रपति पद के लिए हुआ चुनाव जीता. तमिल विद्रोहियों के नियंत्रण वाले बहुत से इलाक़ों में लोगों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

2006 - फ़रवरी - सरकार और तमिल विद्रोहियों ने जेनेवा में हुई शांति बातचीत में उस युद्धविराम समझौते के लिए अपना सम्मान फिर से व्यक्त किया जो 2002 में हुआ था.

2006 - अप्रैल - पूर्वोत्तर में तमिल बहुल शहर ट्रिंकोमाली में विस्फोट हुए जिनके बाद दंगे भी फैले जिनमें 16 लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने उन विस्फोटों के लिए तमिल विद्रोहियों को ज़िम्मेदार ठहराया.

कोलंबो में मुख्य सैन्य परिसर में एक आत्मघाती हमला हुआ जिसमें आठ लोग मारे गए. श्रीलंका की सेना ने उसके बाद तमिल विद्रोहियों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए.

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