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जापानी दूत की विद्रोहियों से मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में शांति स्थापित करने की प्रयासों के तहत जापानी दूत यासुशि अकाशि मंगलवार को तमिल विद्रोहियों से मुलाक़ात करने जा रहे हैं. जापानी दूत तमिल विद्रोहियों की राजनीतिक संगठन के प्रमुख तमिलसेल्वन से मुलाक़ात करेंगे. इसके पहले विद्रोहियों के नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था. सोमवार को जापानी दूत यासुशि अकाशि की श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के साथ मुलाक़ात हुई थी. लेकिन इस बातचीत का ब्यौरा अभी तक सामने नहीं आया है. जापानी शांति दूत अकाशि 2002 में श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच युद्धविराम होने के बाद से कई बार श्रीलंका आ चुके हैं. उनकी मौजूदा यात्रा ऐसे समय हो रही है जब युद्धविराम संकट में नज़र आ रहा है. पिछले कुछ सप्ताह में युद्धविराम का कई बार उल्लंघन हुआ है और हिंसक झड़पों में 100 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ताओं को लेकर गतिरोध बना हुआ है. प्रेक्षकों का मानना है कि सरकार और विद्रोही जब तक अपने अड़ियल रुख़ को नहीं छोड़ते हैं शांति वार्ता पर संकट छाया रहेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रभाकरन से नहीं मिल पाएँगे अकाशि07 मई, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई की नौका को डुबोने का दावा05 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में बारुदी सुरंग विस्फोट, पांच मरे01 मई, 2006 | भारत और पड़ोस दोनों पक्षों से शांतिवार्ता की अपील28 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई विद्रोहियों ने विरोधियों को मारा'30 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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