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प्रभाकरन से नहीं मिल पाएँगे अकाशि | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों ने कहा है कि वे जापानी दूत यासुशि अकाशि को अपने नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन से नहीं मिलवाएँगे. अकाशि चार दिनों के दौरे पर शनिवार को कोलंबो पहुँचे हैं. उनका राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे समेत वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात का कार्यक्रम है. तमिल विद्रोहियों ने कहा है कि अकाशि उसके राजनीतिक संगठन के प्रमुख से मिल सकते हैं, लेकिन प्रभाकरन से उनकी मुलाक़ात नहीं कराई जाएगी. जापानी शांति दूत अकाशि 2002 में श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच युद्धविराम होने के बाद से कई बार श्रीलंका आ चुके हैं. उनकी मौजूदा यात्रा ऐसे समय हो रही है जब चार वर्षो में पहली बार युद्धविराम संकट में पड़ा दिख रहा है. गतिरोध पिछले कुछ सप्ताहों में युद्धविराम का कई बार उल्लंघन हुआ है और हिंसक झड़पों में 100 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. दोनों पक्षों के बीच जिनीवा शांति वार्ताओं के दूसरे दौर में गतिरोध बना हुआ है. अंतरराष्ट्रीय प्रेक्षकों का मानना है कि सरकार और विद्रोही जब तक अपने अड़ियल रुख़ को छोड़ रियायतें देने को राज़ी नहीं होते शांति वार्ता खटाई में पड़ी रहेगी. | इससे जुड़ी ख़बरें एलटीटीई की नौका को डुबोने का दावा05 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में बारुदी सुरंग विस्फोट, पांच मरे01 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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