|
'नेपाल मुद्दे पर भारत बड़ी भूमिका निभाए' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में नॉर्वे के विशेष दूत एरिक सोल्हाइम ने कहा है नेपाल में शांति वार्ता की प्रक्रिया में पड़ोसी देश भारत को भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने कहा कि नेपाल में माओवादी समस्या को सुलझाने में मदद करने का नार्वे का कोई इरादा नहीं है. ये बात उन्होंने अपनी नेपाल की चार दिन की यात्रा के आख़िरी दिन कही. एरिक सोल्हाइम श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि एरिक सोल्हाइम के मुताबिक नेपाल में शांति वार्ता में मदद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय अगर कोशिश करता है तो नॉर्वे उसमें हिस्सा ले सकता है. लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि नॉर्वे कोई बड़ी भूमिका निभा सकता है. अपनी नेपाल यात्रा के दौरान एरिक सोल्हाइम ने नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला, नेपाली राजनेताओं और विभिन्न देशों के राजनयिकों से मुलाकात की. एरिक सोल्हाइम की ये यात्रा नेपाल में चले जनआंदोलन के ख़त्म होने के बाद हुई है. नेपाल में व्यापक स्तर पर हुए जनआंदोलन के बाद नेपाल नरेश ने संसद को फिर बहाल किया था. नेपाल की नई गठबंधन सरकार ने माओवादियों के साथ अनिश्चितकालीन संघर्षविराम की घोषणा की है. इससे पहले माओवादियों ने भी तीन महीने के लिए एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा की थी. |
इससे जुड़ी ख़बरें माओवादी शांति वार्ता के लिए तैयार04 मई, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादियों को सहायता का प्रस्ताव03 मई, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल सरकार की संघर्षविराम घोषणा03 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'लोकतंत्र के रास्ते की रुकावटें दूर होंगी'02 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||