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माओवादियों को सहायता का प्रस्ताव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने कहा है कि यदि माओवादी हथियार छोड़कर राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने को तैयार होते हैं तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय मदद कर सकता है. दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के अमरीकी विदेश उपमंत्री रिचर्ड बाउचर ने कहा है कि हालांकि ये इस पर भी निर्भर करेगा कि राजनीतिक दल और माओवादी की प्रतिक्रिया क्या है. अमरीका का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार ने माओवादी विद्रोहियों की माँग मानते हुए संविधान सभा के लिए चुनाव करने का वादा किया है. रिचर्ड बाउचर नेपाल दो दिनों की यात्रा पर आए थे. उन्होंने कहा है कि हथियार डालकर पुनर्वास में माओवादी विद्रोहियों की सहायता करने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रसन्नता होगी. हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक विद्रोही हथियार डाल कर अपना व्यवहार नहीं बदल देते, अमरीका उन्हें 'आतंकवादी' मानता रहेगा. उन्होंने कहा है कि वे नेपाल की सहायता के लिए पड़ोसी भारत से भी चर्चा करेंगे. अमरीकी विदेश उपमंत्री ने कहा है कि नेपाल की जनता ने स्पष्ट कर दिया है कि राजनीति में नेपाल के राजा की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस दौरे में उन्होंन राजा ज्ञानेंद्र से मिलने की कोई योजना नहीं रखी थी क्योंकि वे उन राजनीतिज्ञों ने मिलना चाहते थे जिनके हाथों में नेपाल की कमान दी गई है. उन्होंने अमरीका की ओर से दोहराया है कि यदि नेपाल की सरकार चाहेगी तो अमरीका नेपाल की सैन्य सहायता बहाल करने को तैयार है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाली संसद की ऐतिहासिक बैठक हुई27 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस आसान नहीं है नेपाल में लोकतंत्र की राह27 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादियों ने किया संघर्षविराम26 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री पद के लिए कोइराला चुने गए25 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नरेश ने संसद बहाल करने की घोषणा की24 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादियों ने राजा का प्रस्ताव ठुकराया24 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत ने नेपाली जनता को निराश किया'24 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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