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माओवादियों ने राजा का प्रस्ताव ठुकराया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के माओवादियों ने राजा ज्ञानेंद्र के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और कहा है कि जब तक संविधान सभा की घोषणा नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा. बीबीसी हिंदी से एक विशेष बातचीत में माओवादी पार्टी के प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महरा ने कहा, “इसे हम अपनी जीत नहीं मान सकते हैं क्योंकि इस संबोधन में हमारे आंदोलन और हमारी माँगों का कोई ज़िक्र नहीं है.” नेपाल नरेश ने सोमवार की देर रात राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में संसद को फिर से बहाल करने की घोषणा की और कहा कि वो बहुदलीय लोकतंत्र की रक्षा और शांति स्थापना के लिए यह क़दम उठा रहे हैं. माओवादियों ने राजा की इस घोषणा पर अंदेशा जताया कि राजनीतिक समस्या को संवैधानिक तरीक़े से सुलझाने के लिए सात राजनीतिक पार्टियाँ और राजा हाथ मिला सकते हैं. एक गुप्त स्थान से बीबीसी के साथ बातचीत करते हुए महरा ने संसद की पुनर्स्थापना करने की राजा की घोषणा को “राजनीतिक षडयंत्र” बताया है. उन्होंने कहा कि राजा के संबोधन में “हमारा यानी एक प्रमुख राजनीतिक आंदोलन का कोई ज़िक्र नहीं है उसके अलावा सात राजनीतिक दल और हमारी समझदारी की भी बात नहीं है." कृष्ण बहादुर महरा ने इसे नेपाली जनता के विरुद्ध साज़िश बताया और कहा कि “इस घोषणा से देश की समस्या समाधान होने की दिशा में हम इतने आशावान नहीं हैं.” उनका कहना था, “हम साफ़ साफ़ देखते हैं कि अभी की समस्या राजनीतिक है संवैधानिक नहीं. अगर संवैधानिक दृष्टि से समस्या का समधान होना हो तो राजा और सात राजनीतिक पार्टियाँ मिल भी सकती हैं.” “ऐसे पहले भी हो चुका है और दोनों ने मिलकर हमारी पार्टी पर प्रहार किया है. ऐसा फिर हो सकता है.” माओवादी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि वो सात पार्टियों से कहना चाहते हैं कि इस घोषणा को काफ़ी अच्छी तरह देखना चाहिए क्योंकि इसमें संविधान सभा का भी कोई ज़िक्र नहीं है. उन्होंने कहा कि संसद का अर्थ होता है पार्टी और राजा के बीच की समझदारी. लेकिन बारह सूत्री समझदारी हुई थी हमारे और सात राजनीतिक पार्टियों के बीच. माओवादी नेता के अनुसार इस घोषणा का मक़सद है माओवादी और सात राजनीतिक पार्टियों के बीच में फूट डालना. माओवादी नेता ने कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है. जब तक संविधान सभा की घोषणा नहीं होती तब तक नेपाल की समस्या हल करने का साफ़ मानचित्र नहीं बन सकता. इसलिए हम संविधान सभा के नारे के साथ आगे बढ़ते रहेंगे.” | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में घटनाचक्र: एक नज़र23 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस राजनीतिक दलों ने एक और रैली बुलाई23 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत ने नेपाली जनता को निराश किया'24 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में प्रदर्शनकारी फिर सड़कों पर22 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में और विरोध प्रदर्शनों की तैयारी20 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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