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शनिवार, 22 अप्रैल, 2006 को 08:00 GMT तक के समाचार
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नेपाल में प्रदर्शनकारी फिर सड़कों पर
राजा ज्ञानेंद्र
राजनीतिक दलों की माँग है कि राजा को संविधान सभा का गठन करना चाहिए
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के बहुदलीय लोकतंत्र स्थापित करने की घोषणा के बावजूद हज़ारों प्रदर्शनकारी फिर सड़कों पर उतर आए हैं और विरोध जता रहे हैं.

इस बीच सरकार ने फिर से दिन का कर्फ़्यू लागू करने की घोषणा की है और सुरक्षाबलों को आदेश दिए गए हैं कि गड़बड़ी फैलाने वालों को देखते ही गोली मार दी जाए.

इस बीच सात दलों के राजनीतिक गठबंधन के नेताओं की एक बैठक चल रही है जिसमें राजा ज्ञानेंद्र के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है.

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को टेलीविज़न पर राष्ट्र के नाम संबोधन में नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने राजनीतिक दलों के गठबंधन के समक्ष अंतरिम सरकार बनाने और नए प्रधानमंत्री का नाम सुझाने का प्रस्ताव रखा था.

इन राजनीतिक दलों का कहना है कि नेपाल नरेश की घोषणा उनकी मूलभूत मांगों की अनदेखी कर रहा है.

उनका कहना है कि इन मांगों में राजा के भविष्य का फैसला करने वाली संविधान सभा के गठन की बात शामिल है जिसके बारे में राजा ने कुछ नहीं कहा है.

भारत ने नरेश की घोषणा का स्वागत किया है और कहा है कि इससे राजनीतिक स्थायित्व आ सकेगा.

उधर अमरीका में सरकार के एक प्रवक्ता ने नरेश से अपने वादों को पूरा करने की अपील की है और राजनीतिक गठबंधन से राजा के प्रस्ताव पर जल्दी फ़ैसला करने के लिए भी कहा है.

लेकिन पत्रकार भारत भूषण का कहना है कि भारत को जल्दबाज़ी में नेपाल नरेश की घोषणा का स्वागत करने की बजाय इस पर विचार करना चाहिए.

उनका कहना है कि भारत जैसे लोकतंत्र से उम्मीद की जाती है कि वह जनता की माँगों और उनकी भावनाओं पर भी नज़र रखेगा.

ज्ञानेंद्र का संबोधन

शुक्रवार शाम टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधन में नेपाल नरेश ने कहा, "हम बहुदलीय लोकतंत्र और संवैधानिक राजतंत्र के प्रति वचनबद्ध हैं."

हालाँकि उन्होंने अभी संसद के गठन या चुनाव कराने के बारे में कुछ नहीं कहा है.

विपक्षी आंदोलन ने जनांदोलन का रूप ले लिया

ग़ौरतलब है कि नरेश ज्ञानेंद्र ने पहली फ़रवरी 2005 को तत्कालीन सरकार को बर्ख़ास्त करते हुए देश की सत्ता अपने हाथों में ले ली थी. तब उन्होंने कहा था कि माओवादी विद्रोहियों को कुचलने के लिए उन्होंने ऐसा किया है.

उनके इस क़दम के विरोध में जारी राजनीतिक आंदोलन ने पिछले पखवाड़े एक जनांदोलन का रूप ले लिया.

पिछले 15 दिनों के दौरान नेपाल में राजशाही के विरोध में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए. इस दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक भिड़ंतें भी हुईं.

राष्ट्र को संबोधन में नेपाल के 1990 के संविधान के अनुच्छेद 35 का उल्लेख करते हुए नरेश ज्ञानेंद्र ने कहा, "हम राष्ट्र की संप्रभुता जनता को सौंपते हैं. हम आशा करते हैं कि बहुदलीय लोकतंत्र की रक्षा से देश में शांति-व्यवस्था स्थापित होगी."

राजा ज्ञानेंद्र ने सात दलीय विपक्षी गठजोड़ को अंतरिम प्रधानमंत्री का नाम सुझाने को कहा है.

नेपाल में राजशाही का विरोधराजशाही का विरोध
नेपाल में राजशाही का विरोध थमता नज़र नहीं आ रहा है. विस्तार से पढ़िए.
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