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भारत ने नेपाल को लेकर प्रयास तेज़ किए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने नेपाल की समस्या को सुलझाने के लिए अपने प्रयास तेज़ कर दिए हैं. इसी के तहत भारत के विशेष दूत डॉक्टर कर्ण सिंह और भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन बुधवार को काठमांडू पहुँच रहे हैं. कर्ण सिंह राजा ज्ञानेंद्र से बातचीत करेंगे. साथ ही वे विभिन्न दलों के नेताओं से भी मुलाक़ात करेंगे. उनका कहना था,'' भारत नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता है पर हम वहाँ के संकट की अनदेखी भी नहीं कर सकते हैं.'' उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण नेपाल भारत के हित में है. लेकिन वहाँ स्थिति बिगड़ रही है. कर्ण सिंह कश्मीर के पूर्व शासक के बेटे हैं और उनकी पत्नी नेपाल के राजपरिवार से संबंधित हैं. इसके पहले भारत के नेपाल में राजदूत शिवशंकर मुखर्जी राजा ज्ञानेंद्र से मिले थे और उन्होंने उनसे राजनीतिक दलों से तत्काल बातचीत करने का अनुरोध किया था. हड़ताल नेपाल में पिछले 13 दिन से सात राजनीतिक दलों के गठबंधन के आह्वान पर हड़ताल चल रही है. राजनीतिक दल चाहते हैं कि राजा ज्ञानेंद्र फ़रवरी 2005 में सत्ता सीधे अपने हाथ में लेने का फ़ैसला वापस लें और लोकतांत्रिक सरकार फिर स्थापित करें. नेपाल में धरने प्रदर्शनों का दौर जारी है और इस दौरान सुरक्षाबलों की गोलीबारी से पाँच लोगों की जानें भी जा चुकी हैं. इस हड़ताल के कारण नेपाल में खाद्य पदार्थों की कमी हो गई है और इसे सुनिश्चित करने के लिए सेना को तैनात किया गया है. ग़ौरतलब है कि सोमवार को हड़ताल में सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारी शामिल हुए थे और मंगलवार को सरकारी कर्मचारी भी इससे जुड़ गए. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में 25 अधिकारी गिरफ़्तार18 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में खाद्य पदार्थों की कमी17 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस काठमांडू में कर्फ़्यू, मोबाइल फ़ोन बंद08 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में विरोध प्रदर्शनों के दौरान झड़पें07 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में हिंसा, दस की मौत06 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार ने 'संघर्षविराम' को ख़ारिज किया04 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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