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नेपाल में हिंसा, दस की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों की बुलाई चार दिन की देशव्यापीर हड़ताल शुरू होने से पहले हुई हिंसा में कम से कम दस लोग मारे गए हैं जिनमें पाँच पुलिसकर्मी भी हैं. माओवादियों ने एक शहर पर हमला करके अपने कई साथियों को जेल से छुड़ा लिया है. इस घटना में दस लोग मारे गए. माओवादियों ने राजधानी काठमांडू से 120 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित मलंगवा पर बुधवार की रात को हमला किया. उन्होंने सुरक्षा बलों के उन जवानों पर गोलियाँ चलाईं जो वहाँ सरकारी इमारतों और जेल की हिफ़ाज़त के लिए तैनात थे. माओवादियों ने यह हमला करके अपने लगभग 100 साथियों को जेल से छुड़ा लिया. नेपाली सेना ने कहा है कि कुछ अन्य सुरक्षा कर्मी उस समय मारे गए जब घटनास्थल के लिए भेजा गया हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस बीच विपक्षी दलों के आहवान पर आम हड़ताल का असर दिख रहा है. राजधानी काठमांडू में सड़कें सूनी हैं और बड़ी संख्या में सुरक्षा बल पर गश्त लगा रहे हैं. विपक्षी दलों का कहना है कि अधिकारियों ने हड़ताल के पहले दिन क़रीब 50 प्रदर्शकारियों को गिरफ़्तार किया गया है. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने फ़रवरी 2005 में सरकार को बर्ख़ास्त करते हुए सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. इसी के विरोध में विपक्षी दलों ने आम हड़ताल का आह्वान किया है. राजधानी काठमांडू में विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदी लगी हुई है लेकिन इसके बावजूद शनिवार को यहाँ राजशाही के ख़िलाफ़ बड़ी रैली करने की योजना है. गिरफ़्तारी बुधवार को नेपाली अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते हुए 100 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया.
राजधानी काठमांडू के कुछ हिस्सों में बुधवार रात 11 बजे से गुरुवार तड़के तीन बजे कर रात का कर्फ़्यू भी लगाया गया था. स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से कर्फ़्यू ज़रूरी था. नेपाल में सात राजनीतिक दलों के गठबंधन ने आम हड़ताल का आह्वान किया है. पिछले साल फरवरी में राजा ज्ञानेंद्र ने सत्ता अपने हाथ में ले ली थी. उसके बाद से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौर में यह ताज़ा कड़ी है. बुधवार की सुबह क़रीब 20 विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह उनके विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश है. बुधवार को ही क़रीब 40 डॉक्टरों, वकीलों और पत्रकारों को भी उस समय गिरफ़्तार किया गया जब वे विपक्षी दलों के समर्थन में रैली निकालने की कोशिश कर रहे थे. बाद में इन से कुछ लोगों को रिहा कर दिया गया. अधिकारियों ने यह कहते हुए काठमांडू के कुछ इलाकों में राजनीतिक रैलियों पर पाबंदी लगा दी है कि इससे माओवादी हिंसा का ख़तरा बढ़ेगा. हालाँकि माओवादियों का कहना है कि उन्होंने काठमांडू में अपनी गतिविधियों पर रोक लगा दी है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वे विपक्षी रैलियों का सहारा लेते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें सरकार ने 'संघर्षविराम' को ख़ारिज किया04 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'माओवादियों का सशस्त्र अभियान बंद'03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस गो हत्या के लिए 12 साल की सज़ा03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस तलाक़ से जुड़े क़ानून पर फ़ैसले का स्वागत31 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस माधव के घर पर छापे की आलोचना23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में ताज़ा संघर्ष; कई मारे गए21 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस ग़ायब 'बुद्धावतार' के वीडियो का दावा21 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'संविधान सभा बने तो हथियार छोड़ेंगे'16 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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