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तलाक़ से जुड़े क़ानून पर फ़ैसले का स्वागत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में महिला कार्यकर्ताओं ने उस क़ानून को ख़त्म करने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है जिसके तहत अगर महिला माँ नहीं बन सकती तो पति उससे तलाक़ लेने की माँग कर सकते थे. ये क़ानून 43 साल पुराना है. इस क़ानून में प्रावधान था कि अगर पुरुष डॉक्टर की मदद के ज़रिए ये साबित कर दे कि उसकी पत्नी 10 सालों तक बच्चे को जन्म नहीं दे सकी, तो पुरुष तलाक़ की अर्ज़ी दाख़िल कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पत्नी के बांझ होने की सूरत में, पति के उसे तलाक़ दे सकने का प्रावधान नेपाल के संविधान की भावना और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ है. कोर्ट ने सरकार से इस क़ानून को ख़त्म कर, नया क़ानून बनाने को कहा है. महिला कार्यकर्ताओं के मुताबिक़ ये क़ानून इस बात पर ग़ौर नहीं करता कि अगर महिला बच्चे को जन्म नहीं दे पा रही, तो इसके लिए पुरुष भी ज़िम्मेदार हो सकता है. महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोर्ट का ये फ़ैसला ऐसे क़ानूनों को हटाने की दिशा में मील का पत्थर है, जो महिलाओं के प्रति भेदभाव करते हैं. नेपाल में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों के सिलसिले में हाल में कई फ़ैसले दिए हैं. पिछले साल नेपाल में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से उस क़ानून को ख़त्म करने के लिए कहा था जिसके तहत विरासत में मिली संपत्ति को बेचने से पहले महिलाओं को परिवार वालों की अनुमति लेनी होती है. नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने पासपोर्ट के लिए महिलाओं पर लागू होने वाले प्रावधानों को भी आसान करने के लिए कहा था. | इससे जुड़ी ख़बरें एड्स पीड़ित महिला चुनावी मैदान में..08 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस फ़ैशन के दौर में बदल रहा है बुर्क़ा28 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ान महिलाओं के लिए नई पहल22 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'महिलाएँ शराब पेश कर सकती हैं'13 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में महिलाओं को मिली राहत16 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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